पिछले कुछ दशकों के बाद पहली बार बिहार और झारखंड में वोटरों को लालू यादव के चुटीले अंदाज में भाषण सुनने को नहीं मिल पा रहा है, जो देश के लगभग हर एक व्यक्ति तक को गुदगुदा जाता था।
तेजस्वी ने न सिर्फ़ राजनीतिक प्रताड़ना का आरोप लगाया बल्कि यह भी कहा कि उनके पिता का इलाज ठीक से नहीं किया जा रहा है। पुलिस प्रशासन के ख़िलाफ़ भी उन्होंने नाराज़गी जताई।
इसके अलावा बिहार की सड़कों को हेमा मालिनी के गालों की तरह बनाने, बिहार से झारखंड को अलग करने के विषय पर अपनी लाश पर राज्य का बँटवारा करने, लालकृष्ण आडवाणी को अंतराष्ट्रीय फ़रार बताने के साथ-साथ, इसलामिक पोषाक धारण कर एमवाई (मुसलिम-यादव) समीकरण को फ़िट बैठाने को लेकर लालू हमेशा चर्चा में रहे।