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बिहार: लालू के कथित ऑडियो को लेकर पटना में एफ़आईआर दर्ज

बिहार में विधानसभा स्पीकर के चुनाव से ठीक पहले एक ऑडियो वायरल होने के बाद बिहार की सियासत में उठे तूफ़ान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को एक और मुश्किल का सामना करना पड़ा है। बता दें कि बीजेपी नेता सुशील मोदी ने बुधवार को एक ऑडियो जारी किया था, जिसमें उन्होंने आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की आवाज़ होने का दावा किया। 

मोदी ने जैसे ही इस ऑडियो को ट्वीट किया, न्यूज़ चैनलों ने इसे उठा लिया और हंगामा शुरू हो गया था। मोदी ने कहा था कि लालू यादव ने अपनी असलियत दिखा दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि लालू प्रसाद यादव ने बीजेपी के विधायक ललन पासवान को बिहार विधानसभा स्पीकर के चुनाव में महागठबंधन के पक्ष में मतदान करने का लालच दिया। 

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इस मामले में ललन पासवान ने गुरूवार को पटना में एफ़आईआर दर्ज करा दी है। साथ ही लालू प्रसाद यादव को रिम्स निदेशक के बंगले से वापस रिम्स अस्पताल में शिफ़्ट कर दिया गया है। 

झारखंड सरकार ने दिए जांच के आदेश 

उधर, झारखंड सरकार ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। आईजी (जेल) वीरेंद्र भूषण ने पीटीआई-भाषा को बताया कि उन्होंने रांची के उपायुक्त, एसपी और बिरसा मुंडा जेल के अधीक्षक को मामले की जांच करने के आदेश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा है कि अगर लालू पर लगे आरोप सही पाए जाते हैं तो वे क़ानूनी कार्रवाई शुरू करें। 

भूषण ने कहा कि उन्होंने ख़ुद भी इस वायरल ऑडियो को सुना है। उन्होंने कहा कि जेल के नियमों के मुताबिक़ न्यायिक हिरासत के दौरान मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं है। आईजी (जेल) ने पीटीआई-भाषा से कहा कि आरोप सही पाए जाने पर इस बात की जांच की जाएगी कि लालू के पास मोबाइल फ़ोन कैसे आया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। 

इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की गई है। याचिका में मांग की गई है कि लालू की बीमारी की जांच की जाए और उन्हें वापस जेल में भेजा जाए। 

सुशील मोदी का आरोप है कि लालू ने यह कॉल बीजेपी के विधायक ललन पासवान को की है और उनसे स्पीकर के चुनाव में वोटिंग के दौरान गैर हाजिर रहने के लिए कहा। 

कथित रूप से लालू की आवाज़ वाले ऑडियो में एक शख़्स कहते हैं कि लालू जी बात करना चाहते हैं, दूसरी ओर से आवाज़ आती है कि वह विधायक के पीए बोल रहे हैं। इसके बाद कथित रूप से लालू कहते हैं- पासवान जी बधाई। दूसरी ओर से कथित रूप से ललन पासवान कहते हैं, ‘प्रणाम जी, चरण स्पर्श।’ 

आगे लालू कथित रूप से कहते हैं, ‘अच्छा सुनो, हम तुमको आगे बढ़ाएंगे, कल जो स्पीकर का चुनाव है, उसमें हम लोगों का साथ दो। हम तुमको मंत्री बनाएंगे, कल तो हम इसको गिरा देंगे।’ दूसरी ओर से पासवान कहते हैं- हम पार्टी में हैं। 

लालू कथित रूप से कहते हैं- ‘पार्टी में हो तो एबसेंट हो जाओ, कोरोना हो गया था, फिर तो स्पीकर हमारा हो जाएगा तो हम देख लेंगे।’ दूसरी ओर से पासवान संकोच करते हुए कहते हैं कि पार्टी में हैं। लालू कथित रूप से फिर से कहते हैं- एबसेंट हो जाओ। 

Lalu yadav audio viral in bihar assembly speaker election - Satya Hindi

सुशील मोदी पहले भी लालू के चारा घोटाले को लेकर खुलासे करते रहे हैं और लालू यादव के तीखे आलोचक रहे हैं। 

आरजेडी का इनकार 

आरजेडी ने सुशील मोदी के इस दावे को खारिज कर दिया। पार्टी के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि इस सरकार ने जुगाड़ करके जनादेश हासिल किया है, इसलिए यह हमेशा ख़तरे में ही रहेगी। तिवारी ने कहा कि सुशील मोदी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं और उन्हें डर है कि यह सरकार कभी भी गिर सकती है। तिवारी ने कहा कि मोदी मूल मुद्दों से भटकाने के लिए इस तरह के आरोप लगा रहे हैं। 

बिहार के चुनाव नतीजों पर देखिए चर्चा- 

बीजेपी-जेडीयू में खटपट शुरू

बिहार में सरकार बने अभी जुमा-जुमा चार दिन ही हुए हैं कि बीजेपी-जेडीयू के बीच खटपट शुरू हो गयी है। सरकार बनते ही अपनी पार्टी जेडीयू के नेता मेवालाल चौधरी का इस्तीफ़ा लेने को मजबूर हुए नीतीश कुमार को बीजेपी के हिंदुवादी फ़ायरब्रांड नेता गिरिराज सिंह ने मुसीबत में डाल दिया है। देश भर में बीजेपी शासित कई राज्य सरकारों ने कहा है कि वे लव जिहाद को लेकर क़ानून लाने की तैयारी कर रही हैं। गिरिराज सिंह ने कहा है कि हर राज्य को लव जिहाद पर क़ानून बनाना चाहिए और बिहार इससे अलग नहीं है। 

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जेडीयू ने दिया जवाब 

गिरिराज के इस बयान के बाद जेडीयू की ओर से भी प्रतिक्रिया आनी स्वाभाविक थी। नीतीश कुमार के पुराने साथी और पार्टी के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा, ‘बिहार में लव जिहाद जैसी कोई समस्या नहीं है, इसलिए ऐसे किसी क़ानून की भी वहां ज़रूरत नहीं है।’

जेडीयू की बिहार इकाई के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह से जब गिरिराज सिंह के बयान को लेकर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने मुंह बनाते हुए पत्रकारों से कहा, ‘ऐसे बयानों पर आप चर्चा मत करिए। कभी-कभी किसी का बयान आता है तो इसका मतलब नहीं है कि उसको चर्चा का विषय बनाया जाए।’ वशिष्ठ नारायण सिंह के चेहरे के हाव-भावों से लग रहा था कि इस सवाल से वह असहज हुए हैं। 

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