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योगी बोले- घुसपैठिये जाएँगे; नीतीश बोले- फालतू बात

बिहार चुनाव प्रचार में बीजेपी और जेडीयू में वैचारिक खाई साफ़ तौर पर दिखने लगी है। इस चुनाव में बीजेपी के स्टार प्रचारक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब नागरिकता संशोधन क़ानून यानी सीएए का ज़िक्र कर कहा कि घुसपैठिए को बाहर निकालेंगे तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस तरह की बातों को 'फालतू बात' क़रार दे दिया है। हालाँकि, नीतीश ने किसी का नाम नहीं लिया। योगी ने अपने भाषण वाले वीडियो को ट्विटर पर डाला था तो नीतीश कुमार ने भी अपने इस भाषण को ट्विटर पर डाला। उस वीडियो में नीतीश ग़ुस्से में दिख रहे हैं। हाल ही में नीतीश कुमार ने जाति की आबादी के आधार पर आरक्षण की वकालत की थी। माना जाता है कि इससे बीजेपी को नुक़सान हो सकता है क्योंकि बीजेपी के कोर वोटर सवर्ण हैं और नीतीश के इस आरक्षण की बात से बीजेपी को नुक़सान हो सकता है। ऐसा इसलिए कि बीजेपी और जेडीयू गठबंधन में हैं। 

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नीतीश कुमार का अब ताज़ा हमला योगी आदित्यनाथ के उस भाषण को निशाने पर लेते हुए दिख रहा है जिसमें उन्होंने 'घुसपैठिये को बाहर फेंकने' की बात की थी। नीतीश कुमार ने अपने भाषण की क्लिप को ट्विटर पर भी पोस्ट किया है और यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनकी विचारधारा बीजेपी की उस विचारधारा से मेल नहीं खाती है जिसे योगी आदित्यनाथ ने बिहार की रैली में एक दिन पहले व्यक्त की है। 

नीतीश कुमार ने चुनावी रैली में कहा, '...कौन दुष्प्रचार करता रहता है, फालतू बात करता रहता है। यहाँ से कौन किसको देश से बाहर करेगा। ऐसा इस देश में किसी में दम नहीं है कि हमारे लोगों को...। सब हिंदुस्तान के हैं। सब भारत के हैं। कौन इनको बाहर करेगा। ये सब कैसी बात करते रहते हैं यूँ ही। हमने तो जब से आपने मौक़ा दिया है तब से, आप बताइए, समाज में प्रेम का, भाईचारे का, सद्भावना का माहौल पैदा किया है। सबको हमने एकजुट करने की कोशिश की है।' 

नीतीश ने इस वीडियो में एक तरह से सीधे उन नेताओं को निशाने पर लिया है जो नफ़रत फैलाते रहे हैं और समाज को तोड़ने की कोशिश करते रहे हैं। हालाँकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा किसकी तरफ़ है, यह समझना मुश्किल नहीं है। नीतीश ने वीडियो में आगे कहा है, 'कुछ लोग चाहते हैं कि समाज में झगड़ा चलता रहे, कोई काम करने की ज़रूरत नहीं है। और हम तो काम करते रहते हैं। और हमारा मक़सद यही है कि जब सब लोग प्रेम से, भाईचारे से, सद्भावना के साथ रहेंगे तभी समाज आगे बढ़ेगा। लोग आगे बढ़ेंगे, तरक्की करेंगे।'

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यह प्रतिक्रिया योगी आदित्यनाथ की एक दिन पहले कटिहार में रैली के बाद आई है। 

योगी ने कहा कि घुसपैठ की समस्या का समाधान भी मोदी जी ने निकाला है। यूपी के मुख्यमंत्री ने अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति और सीएए का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत घुसपैठ की समस्या से परेशान है।  उन्होंने कहा, 'भारत सरकार ने इस बात को भी कहा है कि अगर कोई घुसपैठिया भारत की सुरक्षा में सेंध लगाने का कुत्सित प्रयास कर रहा है उसे निकाल बाहर करने का कार्य भी करेंगे।'

उन्होंने आगे कहा, '...देश की सुरक्षा के साथ और देश की संप्रभुता के साथ हम कोई भी खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। आज यह कार्य इसलिए हो रहा है क्योंकि भारत को एक परिवार के रूप में भारत की 135 करोड़ की आबादी को एक परिवार के रूप में मानने के लिए बीजेपी और बीजेपी के सहयोगी दल पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं...।'

nitish kumar calls yogi throw out infiltrators comment as nonsense in bihar poll  - Satya Hindi

बता दें कि पिछले दिसंबर में लागू किये गए सीएए के विरोध में देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन किया गया था। विरोध करने वालों ने आरोप लगाया था कि नेशनल रजिस्टर फॉर सिटिजन्स (एनआरसी) के साथ, सीएए का इस्तेमाल अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।

यह सब उस माहौल में हो रहा है जब कहा जा रहा है कि इस चुनाव में बीजेपी और जेडीयू के बीच तनातनी चल रही है। यह संकेत तब भी मिला था जब नीतीश कुमार ने हाल ही में अचानक आरक्षण का मुद्दा छेड़ दिया।

दूसरे चरण की वोटिंग से पहले वाल्मीकिनगर में नीतीश कुमार ने जातियों की आबादी के हिसाब से आरक्षण की बात कही। यानी सीधे तौर पर नीतीश पिछड़ों को लुभाने में लगे हैं। पिछड़ों को लुभाने का मतलब है कि अगड़ों यानी सवर्णों को नाराज़ करना जो बीजेपी का कोर वोटबैंक है। बीजेपी नीतीश कुमार के जेडीयू के साथ गठबंधन में है। ऐसे में क्या नीतीश के जातियों की आबादी के हिसाब से आरक्षण की बात करने से बीजेपी को नुक़सान नहीं होगा? सवाल यह भी है कि नीतीश अपने लिए वोटबैंक का जुगाड़ कर रहे थे या बीजेपी को नुक़सान पहुँचा रहे थे? 

वीडियो में देखिए, नीतीश कुमार ने मोदी को फँसा दिया?

नीतीश कुमार ने आरक्षण पर उसी राग को छेड़ दिया है जो बीजेपी को चुभता है। नीतीश कुमार के ताज़ा आरक्षण के बयान को उससे भी जोड़कर देखा जा सकता है जिसमें कहा जा रहा है कि बीजेपी नीतीश कुमार को चुनाव में कथित तौर पर दरकिनार करना चाहती है।

इसमें एलजेपी के चिराग पासवान की उस रणनीति को भी जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें वह एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ रही है। एलजेपी ने कहा है कि वह जेडीयू को हराने के लिए उसके ख़िलाफ़ उम्मीदवार तो उतारेगी लेकिन बीजेपी का समर्थन करेगी। चिराग तो इसके लिए यह भी कह चुके हैं कि उनके दिल में प्रधानमंत्री मोदी हैं। 

अब इस संदर्भ में नीतीश के ताज़ा रुख़ को कैसे देखा जा सकता है? 

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