जदयू में अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच खुली लड़ाई की ख़बरें हैं। ललन सिंह और संजय झा मतभेद से इनकार कर रहे हैं, लेकिन नीतीश कुमार की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है। पढ़िए, पटना से समी अहमद का विश्लेषण।
कहने को तो नीतीश कुमार अपनी पार्टी जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं लेकिन इन दिनों पार्टी के अंदर मचे घमासान पर उनकी बेबसी भरी चुप्पी ही देखने को मिल रही है। एक तरफ बाहुबली माने जाने वाले जनता दल यूनाइटेड के विधायक अनंत सिंह और पटना स्नातक चुनाव क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार एक दूसरे के खिलाफ जमकर भड़ास निकाल रहे हैं तो दूसरी ओर पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन ‘ललन सिंह’ और मौजूदा कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा, जनता दल यूनाइटेड में किसी तरह की मतभेद नहीं होने की सफाई पेश कर रहे हैं।
ओरिएंटेशन प्रोग्राम में ललन सिंह नहीं पहुंचे
पार्टी में आंतरिक तौर पर मचे घमासान में अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच बयानबाजी तो पहले से चल रही थी लेकिन शुक्रवार को पटना में आयोजित जदयू के विधायकों के ओरिएंटेशन प्रोग्राम में जब ललन सिंह नहीं पहुंचे तो इस विवाद का एक दूसरा रुख भी सामने आया। ललन सिंह का कहना है कि उन्हें इस प्रोग्राम के बारे में जानकारी नहीं थी और वह उस समय गुजरात में थे।
ललन सिंह ने यह भी कहा कि जदयू के कुछ विधायकों ने उनसे यह जानने की कोशिश की थी कि वह प्रोग्राम में क्यों नहीं आए। इससे समझा जा सकता है कि ललन सिंह और जदयू के मौजूदा कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा के बीच कुछ ना कुछ गड़बड़ है। एक तरफ ललन सिंह यह भी कह रहे हैं कि उनसे कुछ विधायकों ने बातचीत की और उस ओरिएंटेशन प्रोग्राम के बारे में नहीं जानकारी नहीं थी लेकिन दूसरी तरफ वह यह भी कह रहे हैं कि जब उनकी बात कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा से हुई तो उन्होंने बताया कि यह विधायकों के लिए एक सामान्य कार्यक्रम था। नीतीश से मिलने क्यों गये ललन सिंह?
शुक्रवार को पार्टी के कार्यक्रम में न पहुंचने के बाद ललन सिंह शनिवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार से मुलाकात करने पहुंचे। इस बारे में बताया गया कि दोनों नेताओं के बीच संगठन के मुद्दे पर देर तक बातचीत हुई। इससे पहले नीतीश कुमार के पुत्र और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत से बातचीत के बारे में भी ललन सिंह ने जानकारी दी। दरअसल, इन दिनों निशांत से नजदीकी बनाने की कोशिश भी जनता दल यूनाइटेड में आपसी वर्चस्व कायम करने का एक बड़ा माध्यम बना हुआ है। ललन सिंह ने अपनी बातचीत में यह बात भी दोहराई कि वह समता पार्टी के जमाने से ही नीतीश कुमार के साथ हैं।
इधर, जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने अपनी बात कहने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ का सहारा लिया और लिखा कि जदयू में कहीं से भी किसी तरह का 0.1% भी विवाद नहीं है। बकौल संजय झा, “यहां नेता एक हैं- नीतीश कुमार जी। उनके नेतृत्व में ही हम सभी लोग काम करते हैं। उनके बाद पार्टी में जितने भी सीनियर लीडर हैं, उन सभी के बीच आपस में अच्छी सहमति है। जो भी नीतिगत बात पार्टी में होती है, या जो भी महत्वपूर्ण फैसला होता है, उसे सभी लोग आपस में बात करके फाइनल करते हैं और सभी नियमित संपर्क में रहते हैं। इसमें कहीं कोई कन्फ्यूजन नहीं है।” सवाल यह है कि जब पार्टी में कोई कंफ्यूजन नहीं है तो उन्हें इस पर सफाई क्यों देनी पड़ रही है और नीरज कुमार और अनंत सिंह खुल्लम-खुल्ला एक दूसरे को चुनौती क्यों दे रहे हैं?
संजय कुमार झा की सफाई
दरअसल पिछले कई महीनों से संजय कुमार झा पर यह आरोप लग रहा है कि वह नीतीश कुमार को अपने कब्जे में किए हुए हैं और उन्हें दरकिनार कर सारे फैसले ले रहे हैं। उन पर यहां तक आरोप लग रहा है कि नीतीश कुमार से कौन कब मिलेगा या नहीं मिलेगा, इसका फैसला भी वही कर रहे हैं और यह शिकायत करने वाले कुछ विधायक भी बताए जाते हैं।
शायद इसीलिए उन्हें अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर यह लिखना पड़ा, “पूरी पार्टी एक साथ नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में काम कर रही है। JDU में जब भी कोई महत्वपूर्ण फैसला होता है, लोकतांत्रिक तरीके से सबसे बात करके ही होता है और फाइनल निर्णय हमारे सर्वमान्य नेता नीतीश कुमार जी के इंडोर्समेंट के बाद ही होता है।” जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने भी यह बात दोहराई कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र है लेकिन दरअसल वह यह कहकर एक सवाल भी पैदा कर रहे हैं कि क्या वाकई पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र है?
नीरज कुमार व अनंत सिंह में घमासान
पार्टी में सब कुछ ठीक होने का दो वरिष्ठ नेता दावा कर रहे हैं लेकिन जदयू के ही मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार और विधायक अनंत सिंह के बीच जिस तरह का राजनीतिक युद्ध चल रहा है, उस पर उनकी खामोशी भी हैरत करने में डालने वाली है। ललन सिंह ने तो साफ तौर पर इस मामले में कुछ भी बोलने से इनकार करते हुए कहा कि यह सब उनसे ही पूछिए। इधर संजय झा ने यह उम्मीद जताई कि पार्टी मामले को देख रही है और जल्दी हल निकलेगा।
दरअसल, नीरज कुमार और अनंत सिंह दोनों भूमिहार समुदाय से आते हैं और दोनों के बीच मोकामा और टाल की राजनीति में पुरानी लड़ाई चली है आ रही है। अपने ताजा बयान में अनंत सिंह ने नीरज को मूर्ख बताते हुए चुनौती दी कि वह उनसे आकर बहस करें। अनंत सिंह यह भी आरोप लगा रहे हैं कि उनके घर में दरअसल नीरज कुमार ने ही एके-47 रखकर उन्हें गिरफ्तार करवाया था। वह यह आरोप भी लगा रहे हैं कि लोकसभा चुनाव में ललन सिंह को हरवाने की भी कोशिश नीरज कुमार ने की थी। इसके साथ वह यह भी दावा कर रहे हैं कि इस बार वह नीरज कुमार को हरा कर रहेंगे और इसके लिए वह 20 करोड़ रुपये की बाजी भी लगा सकते हैं। इससे यह भी समझा जा सकता है कि दरअसल नीरज और अनंत के झगड़े में ललन सिंह किस तरफ हैं। आरोप-प्रत्यारोप जारी
दूसरी तरफ नीरज कुमार ने अनंत सिंह पर यह आरोप लगाया कि वह मेंटली डिस्टर्ब हैं और फर्जी आदमी हैं। उन्होंने कहा कि पटना स्नातक सीट से उनका विरोध करने का मतलब है कि अनंत सिंह नीतीश, निशांत और पूरी पार्टी का विरोध कर रहे हैं। अनंत सिंह नीरज कुमार का नार्को टेस्ट करवाने की मांग भी कर रहे हैं तो नीरज उन्हें कोर्ट जाने की चुनौती दे रहे हैं। इस मामले में पार्टी के वरिष्ठ नेता श्याम रजक खुलकर नीरज कुमार के पक्ष में हैं और उनका कहना है कि नीरज कुमार के साथ एनडीए मजबूती से खड़ा है।
यह बात भी याद रखने की है कि हाल ही में जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के शासन वाले 21 राज्यों में 2029 से पहले समान आचार संहिता- यूसीसी लागू करने की बात की तो श्याम रजक ने स्पष्ट तौर पर इस प्रस्ताव का विरोध किया था। इसके अगले ही दिन जदयू कोटा के उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने इस विरोध से किनारा कर लिया और उन्होंने कहा कि पार्टी अंतिम फैसला यूसीसी के ड्राफ्ट को देखने के बाद ही करेगी और इस बारे में पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा अमित शाह से बात करेंगे। इस तरह कई ऐसे मुद्दे हैं जहां नीतीश कुमार से नजदीकी जताने वाले और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा के नजदीक माने जाने वाले जदयू के नेताओं में आपसी खींचतान का पता लगता है।