बिहार का नया सीएम कौन होगा, यह सवाल सोमवार को तब फिर से उछला जब नीतीश कुमार ने राज्य के विधान परिषद सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव जीता था, इसलिए संविधान के नियम के मुताबिक़ 30 मार्च तक एक पद छोड़ना जरूरी हो गया था। नीतीश ने राज्यसभा चुनाव लड़ने से पहले ही घोषणा कर दी थी कि वह मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाना चाहते हैं। तो सवाल है कि अब राज्य का अगला सीएम कौन होगा? अभी तक इसको लेकर साफ़-साफ़ कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन इस पर कुछ संकेत ज़रूर मिल रहे हैं।
सीएम कौन हो सकते हैं, यह जानने से पहले यह जान लें कि बिहार में क्या राजनीति चल रही है और सोमवार को घटनाक्रम क्या चला। नीतीश कुमार के क़रीबी और जदयू नेता संजय गांधी ने सोमवार को नीतीश का इस्तीफा पत्र विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा। अब नीतीश कुमार जल्द ही राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेंगे, जो अप्रैल की शुरुआत में हो सकता है। तो क्या उनको अब राज्यसभा की सदस्यता लेते ही कोई निश्चित समय में सीएम पद छोड़ने की मजबूरी है?

संवैधानिक रूप से कब तक रह सकते हैं सीएम?

चूँकि नीतीश कुमार ने राज्य के विधान परिषद से इस्तीफ़ा दे दिया है तो अब भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार कोई व्यक्ति बिना विधायक बने अधिकतम 6 महीने तक ही मुख्यमंत्री रह सकता है। उसके बाद उसे राज्य की विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना ज़रूरी है। इसका मतलब है कि यदि कोई व्यक्ति सिर्फ़ सांसद है और राज्य की विधानसभा या परिषद का सदस्य नहीं है तो वह केवल 6 महीने तक ही मुख्यमंत्री रह सकता है। ऐसी स्थिति में नीतीश कुमार चाहें तो सीएम बने रह सकते हैं, लेकिन अधिकतम 6 महीने तक ही। बहरहाल, नीतीश ने सीएम पद छोड़ने की बात कह दी है तो माना जा रहा है कि वह अब जल्द ही सीएम पद छोड़ सकते हैं।

20 साल का दौर ख़त्म?

नीतीश कुमार पिछले 20 साल से बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं। 2005 से अब तक उन्होंने 10 बार मुख्यमंत्री पद संभाला है। उन्होंने 1980 के दशक में विधायक के रूप में राजनीति शुरू की और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे। अब वे संसद में जाएंगे, लेकिन बिहार की राजनीति पर उनका प्रभाव बरकरार रहने की संभावना है।

इस्तीफे के बाद सवाल यह उठ रहा है कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद भी छोड़ देते हैं तो बिहार का नया मुख्यमंत्री कौन बनेगा? सम्राट चौधरी? नित्यानंद राय? या फिर कोई और?

सम्राट चौधरी सबसे आगे

एनडीए के अंदर चर्चा में सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। वे फ़िलहाल बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं और बीजेपी के बड़े नेता हैं। सम्राट चौधरी कुशवाहा समुदाय से आते हैं और उन्होंने पिछले कुछ सालों में पार्टी में मज़बूत संगठन खड़ा किया है। बिहार में बीजेपी के लिए कुशवाहा समुदाय का वोट बैंक काफ़ी अहम है और बीजेपी की नज़र इस पर हो सकती है।

सम्राट चौधरी

नीतीश कुमार ने हाल ही में सहरसा के एक कार्यक्रम में सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखकर लोगों से कहा था कि वे इनका साथ दें। नीतीश ने कहा था, 'मैंने इन्हें लोगों के लिए और बहुत सारे काम करने को कहा है।' इस बयान को सम्राट चौधरी को समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

नित्यानंद राय

नित्यानंद राय का नाम भी चर्चा में है। वह केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हैं। वे यादव समुदाय से हैं। उनका मुख्यमंत्री बनना यादव वोटरों तक बीजेपी की पहुँच बढ़ा सकता है जो पारंपरिक रूप से लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के साथ जुड़े रहे हैं।

अन्य नाम भी चर्चा में

बीजेपी जातीय समीकरण और चुनावी रणनीति को ध्यान में रखकर अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रही है।
  • दिलीप जायसवाल: बिहार सरकार में मंत्री। सीमांचल क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ है और वे संगठनात्मक काम में विश्वसनीय माने जाते हैं।
  • संजीव चौरसिया: पटना से पांच बार विधायक हैं। बीजेपी में गहरी जड़ें रखते हैं।
इसके अलावा, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी ने भी अपने विधायकों की बैठक बुलाई है, जो गठबंधन के अंदर चर्चाओं को और बढ़ा रही है।

नीतीश का बेटा निशांत कुमार

जदयू के कुछ नेताओं ने नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम भी आगे किया है। हाल ही में निशांत सक्रिय राजनीति में आए हैं। कुछ पोस्टरों में भी उनका नाम मुख्यमंत्री पद के लिए दिखाया गया, लेकिन एनडीए में फ़ैसला बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व पर ज्यादा निर्भर माना जा रहा है।
संविधान के अनुसार राज्यसभा चुनाव जीतने के 14 दिन के अंदर एक विधायी पद छोड़ना पड़ता है। नीतीश कुमार अभी तक मुख्यमंत्री बने हुए हैं, लेकिन वे अगले कुछ दिनों या मध्य अप्रैल तक मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं। क़ानूनी रूप से वह छह महीने तक बिना विधायक बने मुख्यमंत्री रह सकते हैं, लेकिन बदलाव की तैयारी चल रही है।
अभी अंतिम फ़ैसला बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के हाथ में है। बिहार की जनता और राजनीतिक गलियारों में इस बदलाव को लेकर काफी उत्सुकता है। क्या बिहार को पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री मिलेगा? आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा। यह बिहार की राजनीति में एक युग का अंत और नए युग की शुरुआत जैसा लग रहा है।