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क्या लव जिहाद के दायरे में बीजेपी नेता भी आएँगे: भूपेश बघेल

बीजेपी सरकारों द्वारा 'लव जिहाद' पर क़ानून लाने के मक़सद और इसके समय को लेकर कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि क्या 'लव जिहाद' के दायरे में बीजेपी नेता भी आएँगे? 

भूपेश बघेल की यह प्रतिक्रिया तब आई है जब बीजेपी शासित कम से कम पाँच राज्यों में 'लव जिहाद' पर क़ानून लाने की बात की जा रही है। योगी सरकार ने तो इस पर अध्यादेश लाने की प्रक्रिया की शुरुआत भी कर दी है। बीजेपी शासित सरकारों द्वारा लव जिहाद का मामला उछाले जाने की विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्य सरकारें आलोचना कर रही हैं। 

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विपक्षी दलों की सरकारों द्वारा आपत्ति किए जाने के एक दिन बाद शनिवार को भूपेश बघेल ने संवाददाताओं से कहा, 'भाजपा नेताओं से मैं पूछना चाहूँगा कि जो भाजपा के नेता हैं उनके परिवार के लोगों ने अन्य धर्म के लोगों के साथ जो विवाह किए हैं वो लव जिहाद के दायरे में आता है कि नहीं आता है?'

बघेल ने बीजेपी नेताओं से यह सवाल पूछकर एक तरह से यह साबित करने का प्रयास किया है कि बीजेपी लव जिहाद का राग राजनीतिक लाभ के लिए अलाप रही है।

'द इंडियन एक्सप्रेस' से बातचीत में भी भूपेश बघेल ने कहा, 'लव जिहाद पश्चिम बंगाल चुनाव में वोट हासिल करने के स्पष्ट इरादे के साथ उठाया गया है और समाज का सांप्रदायिकरण करने का एक प्रयास है। वे मतदाताओं को धर्म के आधार पर विभाजित करना चाहते हैं और हिंदू मतदाताओं को आकर्षित करना चाहते हैं।' उन्होंने कहा कि शादी के संबंध में पहले से ही क़ानून हैं और बीजेपी का यह मुद्दा सिर्फ़ राजनीति से प्रेरित है। 

इससे पहले शुक्रवार को बीजेपी शासित इन राज्य सरकारों के 'लव जिहाद' की विपक्षी दलों द्वारा शासित कम से कम पाँच राज्य सरकारों ने आलोचना की है और उसकी निंदा की है।

इन राज्य सरकारों ने कहा है कि ऐसा क़ानून बनाना व्यक्तिगत आज़ादी में दखल होगा और यह देश में सांप्रदायिक विभाजन करने का प्रयास है। 

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को एक के बाद एक कई ट्वीट कर कहा, ‘लव जिहाद बीजेपी के द्वारा गढ़ा गया शब्द है जो देश को बाँटने और सांप्रदायिक सौहार्द्र को नष्ट करने के लिए बनाया गया है। शादी का मसला व्यक्तिगत आज़ादी का है, इसे रोकने के लिए क़ानून लाना पूरी तरह असंवैधानिक है और यह किसी भी अदालत में नहीं टिकेगा।’ गहलोत ने कहा कि प्यार में जिहाद के लिए कोई जगह नहीं है। 

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उन्होंने आगे कहा, ‘बीजेपी के नेता देश में ऐसा माहौल बना रहे हैं, जहाँ पर नौजवान लड़के-लड़कियों को किसी सरकार की दया पर निर्भर रहना होगा।’ गहलोत ने फिर कहा कि शादी एक व्यक्तिगत फ़ैसला है और वे (बीजेपी नेता) इस पर रोक लगाना चाहते हैं और यह किसी की व्यक्तिगत आज़ादी को छीनने जैसा है।

गहलोत ने कहा कि ऐसा लगता है कि यह सब देश के सांप्रदायिक सौहार्द्र को ख़त्म करने, सामाजिक संघर्ष को बढ़ावा देने और संवैधानिक नियमों का मखौल उड़ाने की एक चाल है। 

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव, केरल की सत्ताधारी वामपंथी सरकार, पश्चिम बंगाल की तृणमूल सरकार और पांजब कांग्रेस के प्रमुख सुनल जाखड़ ने भी बीजेपी की आलोचनी की है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश में तो अध्यादेश लाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है। योगी सरकार ने घोषणा की है कि इसने राज्य में अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए अध्यादेश लाने की प्रक्रिया शुरू की है। हालाँकि इस दिशा में काम पिछले एक साल से हो रहा है, लेकिन इसमें तेज़ी तब आई जब योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों कहा का 'लव जिहाद' पर क़ानून लाया जाएगा। क़रीब एक पखवाड़े पहले योगी आदित्यनाथ ने एक सभा में 'लव जिहाद' का ज़िक्र करते हुए कहा था कि जो कोई भी हमारी बहनों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करेगा उसकी 'राम नाम सत्य है' की यात्रा अब निकलने वाली है।
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उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग ने पिछले साल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस विषय पर एक रिपोर्ट सौंपी थी। इसके साथ ही 'उत्तर प्रदेश फ्रीडम ऑफ़ रिलीजन एक्ट, 2019' के एक मसौदे के साथ प्रस्ताव किया था कि 'विवाह के एकमात्र उद्देश्य के लिए किए गए धर्मांतरण को अमान्य क़रार दिया जाए। लेकिन पिछले एक साल से इसमें ज़्यादा प्रगति नहीं हो पाई थी। इसमें तेज़ी तब आई जब योगी आदित्यनाथ ने 'लव जिहाद' को लेकर बात छेड़ी। इस बीच हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार और मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने 'लव जिहाद' पर क़ानून लाने की बात कही।

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