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वास्तविकता और थ्रिलर का मिश्रण है ‘एके वर्सेज़ एके’?

फ़िल्म- एके वर्सेज़ एके

निर्देशक- विक्रमादित्य मोटवानी

स्टार कास्ट- अनिल कपूर, अनुराग कश्यप, सोनम कपूर

स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म- नेटफ्लिक्स

रेटिंग- 3.5/5

आपने पहले ऐसी शायद ही कोई फ़िल्म देखी होगी, जिसमें सबकुछ वास्तविक बताया गया हो और उसमें अभिनेता का नाम भी बदला न गया हो। ऐसी ही फ़िल्म ओटीटी प्लैटफॉर्म नेटफ़्लिक्स पर रिलीज़ हुई है,  नाम है 'एके वर्सेज़ एके'। इसमें अनिल कपूर और अनुराग कश्यप मुख्य भूमिका में हैं। फ़िल्म का निर्देशन विक्रमादित्य मोटवानी ने किया है और इसकी कहानी अविनाश संपत ने लिखी है।

नया प्रयोग

सिनेमा के बदलते भविष्य में कई बदलाव हो रहे हैं और उसी में से एक बदलाव के साथ आई फ़िल्म 'एके वर्सेज एक' है। इसमें निर्देशक ने ऐसी थ्रिलर बनाई है मानो वह सच हो।  जानते हैं, कि फ़िल्म 'एक वर्सेज़ एक' की कहानी क्या है।

फ़िल्म की कहानी में भी अनुराग कश्यप निर्देशक हैं और उनकी फ़िल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' का जिक्र किया जाता है। दूसरी तरफ बड़े अभिनेता अनिल कपूर हैं, जो 40 साल से स्टार हैं। अनिल अनुराग से उन्हें कास्ट करके फ़िल्म बनाने के लिए कहते हैं, लेकिन अनुराग इस पर उन्हें अभिनेत्रियों के बूढ़े बाप का किरदार निभाने की सलाह देते हैं।

अनिल-अनुराग में तनातनी

एक फ़िल्मी मंच पर अनिल-अनुराग के बीच तनातनी हो जाती है और गुस्से में अनुराग अनिल के मुंह पर पानी फेंक देते हैं। इसके बाद फ़िल्म इंडस्ट्री अनुराग से मुँह मोड़ लेती है, यहाँ तक कि नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी भी अनुराग का फ़ोन काट देते हैं।

ऐसे में अनुराग अनिल कपूर को एक फ़िल्म की कहानी सुनाने के लिए पहुँचते हैं। इस कहानी के अनुसार, निर्देशक ने अभिनेता की बेटी सोनम कपूर का अपहरण कर लिया है और सिर्फ 10 घंटे में अनिल कपूर को अपनी बेटी को बचाना है।

इस कहानी में अनिल कपूर को चोट लगना, दर्द होना, ख़ून बहना, रोना सबकुछ असली होगा। अनिल कपूर बेटी सोनम कपूर को खोजने के लिए जुट जाते हैं और रियलिस्टिक तरीके से बनाई गई फ़िल्म की कहानी में यहाँ पर आता है ट्विस्ट।

क्या वाकई में फ़िल्म के अंदर कोई फ़िल्म चल रही है या यह हक़ीक़त है? क्या अनिल कपूर सोनम कपूर को बचा पायेंगे? निर्देशक अनुराग कश्यप ये सब क्यों कर रहे हैं? 

इन सभी सवालों के जवाब आपको फ़िल्म 'एके वर्सेज एके' में मिलेंगे। फ़िल्म देखने के लिए आपको नेटफ्लिक्स का दरवाजा खटखटाना है और इसकी अवधि डेढ़ घंटे की है।

निर्देशन

सिनेमा जगत में नए प्रयोग करने के लिए हिम्मत चाहिये और निर्देशक विक्रमादित्य मोटवाने ने वह जोखिम उठाया है। निर्देशक ने सच लगने वाली कहानी में थ्रिलर जोड़ दिया और कहानी को ऐसे पेश किया कि दर्शक यह सोचने पर मजबूर हो जाए कि क्या वाकई में ये सब हो रहा है या कोई फ़िल्म ही चल रही है। इसके लिए विक्रमादित्य की खूब प्रशंसा होनी चाहिये, क्योंकि उन्होंने कहानी के साथ पूरी तरह से न्याय किया है और उसे सही ढंग से पर्दे पर पेश किया है।

अभिनय

अनुराग कश्यप एक अच्छे निर्देशक होने के साथ ही अच्छे अभिनेता भी हैं, उन्होंने इस फ़िल्म में यह साबित कर दिया है। इस फ़िल्म में भी अनुराग ने अपने किरदार को शानदार तरीके से निभाया है।

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अनिल कपूर ने इस सच सी लगने वाली कहानी में एकदम वास्तविक लगने वाला अभिनय किया है। अनिल कब अभिनय कर रहे हैं और कब सामान्य तरीके से अपने किरदार को निभा रहे हैं, पता ही नहीं चल पाता है।

फ़िल्म में सोनम कपूर और हर्षवर्धन कपूर का भी छोटा सा रोल है और दोनों ने अच्छा अभिनय किया है। फ़िल्म में बोनी कपूर का कैमियो रोल भी है। 

फ़िल्म 'एके वर्सेज़ एके' एक नई तरह की फ़िल्म है, जिसमें आप इस सोच में पड़ जायेंगे कि आखिर फ़िल्म के अंदर फ़िल्म चल रही है या सबकुछ सही में हो रहा है।

अनुराग-अनिल की जोड़ी भी आपको खूब पसंद आयेगी और इसके साथ ही फ़िल्म में एक्शन-ड्रामा भी आपको देखने को मिलेगा।

लेकिन इस बात का ख़ास ध्यान रखें कि फ़िल्म 'एके वर्सेज एके' में गाली-गलौच का प्रयोग भी किया गया है। फ़िल्म के संवाद अच्छे हैं। अगर क्लाइमैक्स में निर्देशक कहानी को विस्तार से न बताते तो यह और दिलचस्प हो सकती थी। आप इस नए प्रयोग को एक बार देख सकते हैं।

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दीपाली श्रीवास्तव
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