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फ़िल्म समीक्षा: ‘खाली पीली’ की कमज़ोर कहानी कर सकती है निराश

फ़िल्म-  'खाली पीली'

निर्देशक- मक़बूल ख़ान

स्टार कास्ट- ईशान खट्टर, अन्नया पांडे, जयदीप अहलावत, सतीश कौशिक, अनूप सोनी

स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म- ज़ी प्लेक्स

रेटिंग- 2/5

ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म ज़ी प्लेक्स पर फ़िल्म ‘खाली पीली’ रिलीज़ हुई है और इसका निर्देशन डायरेक्टर मक़बूल ख़ान ने किया है। लीड रोल की बात करें तो ईशान खट्टर, अनन्या पांडे और जयदीप अहलावत लीड रोल में हैं। इसकी कहानी आज से 20 साल पुरानी फ़िल्मों की कहानी की तरह है, जिसमें हीरो है, हीरोइन है और एक विलेन। इसकी कहानी सीमा अग्रवाल और यश मकवाना ने लिखी है। तो आइये जानते हैं, इसकी क्या है कहानी-

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मुंबई की सड़कों पर काली पीली रंग की टैक्सी चलाने वाला विजय चौहान उर्फ ब्लैकी (ईशान खट्टर) काफ़ी तेज़ तर्रार है और हर बात पर पैसों की माँग करता है। तो वहीं दूसरी तरफ़ दुल्हन बनी पूजा (अनन्या पांडे) जेवर और पैसों से भरा बैग लेकर फरार हो जाती है और उसके पीछे गुंडे लगे हैं। पूजा को सामने से आती हुई काली पीली टैक्सी दिखाई देती है और वहीं से ब्लैकी और पूजा वापस मिलते हैं। ‘वापस मिलते हैं से’ मतलब है कि पूजा और ब्लैकी बचपन में अच्छे दोस्त थे लेकिन युसूफ़ चिकना (जयदीप अहलावत) की वजह से दोनों को अलग होना पड़ा। ये दोनों एक-दूसरे को नहीं पहचानते और यहाँ से शुरू होती है चूहे-बिल्ली की रेस यानी जान बचाकर भागते हीरो-हीरोइन और उनके पीछे गुंडे और पुलिस पड़े हैं। बचपन में पूजा और ब्लैकी क्यों बिछड़े? पूजा और ब्लैकी के पीछे इतने गुंडे क्यों पड़े हुए हैं? क्या दोनों बच जायेंगे या युसूफ़ चिकना पकड़ लेगा? यह सब जानने के लिए आपको 2 घंटे ख़र्च करने पड़ेंगे। फ़िल्म ‘खाली पीली’ ज़ी प्लेक्स पर मिलेगी और इसे देखने के लिए 300 रुपये भी ख़र्च करने पड़ेंगे।

निर्देशन

निर्देशक मक़बूल ख़ान ने पुराने दौर की एक फ़िल्म बनाई है, जिसकी साधारण सी कहानी में एक हीरो-हीरोइन और विलेन है। जिसमें शुरू में ही पता चल जाता है कि क्लाइमेक्स क्या होने वाला है। फ़िल्म में कुछ नयापन नहीं है और यही वजह है कि इसकी कहानी बेहद कमज़ोर हो गई। इसके अलावा फ़िल्म के गाने और बैकग्राउंड म्यूजिक भी कुछ ख़ास कमाल नहीं दिखा पाये।

khali pili film review - Satya Hindi

एक्टिंग

एक्टर ईशान खट्टर की यह तीसरी फ़िल्म है और इससे पहले बियॉन्ड द क्लाउड और धड़क में उन्होंने ठीक ठाक काम किया था। ईशान खट्टर और अच्छा कर सकते हैं वो काफ़ी मेहनती हैं और अपने किरदार को जीने की भरपूर कोशिश करते हैं। ‘खाली पीली’ में उनके किरदार के पास कुछ ख़ास करने को नहीं था लेकिन उन्होंने अच्छा काम किया है। अनन्या पांडे ने अपने किरदार को ठीक ठाक निभाया है। जयदीप अहलावत किसी भी फ़िल्म या सीरीज़ में दमदार एक्टिंग करते हैं और इस फ़िल्म में विलेन के रोल में एक्टर ने बेहतरीन अभिनय किया है। अनपू सोनी का रोल फ़िल्म में काफी छोटा है लेकिन उन्होंने अच्छा काम किया और इसके अलावा पुलिस के रोल में सतीश कौशिक ने भी अच्छा अभिनय किया है।

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अगर आप पुरानी और साधारण कहानी वाली फ़िल्मों को देखना चाहते है या पसंद करते हैं, जिसमें थोड़ा-सा रोमांस, इमोशन और एक्शन हो तो फ़िल्म ‘खाली पीली’ के लिए 2 घंटे ख़र्च कर सकते हैं। फ़िल्म में ईशान खट्टर और जयदीप अहलावत की एक्टिंग अच्छी है लेकिन इसकी कमज़ोर कहानी सब पर पानी फेर देती है। अगर आपके पास इस हफ्ते देखने के लिए कुछ नहीं है तो फ़िल्म ‘खाली पीली’ को देख सकते हैं।

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दीपाली श्रीवास्तव
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