आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। सांसद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी छोड़ दी है और वे आप के लगभग दो-तिहाई राज्यसभा सांसदों के साथ भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं। आप की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है।
आम आदमी पार्टी (AAP) को फिर जबरदस्त झटका लगा है। वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने जा रहे हैं। इस बड़े राजनीतिक उलटफेर के साथ AAP की राज्यसभा में मजबूती काफी कमजोर हो जाएगी। चड्ढा के साथ पार्टी के लगभग दो-तिहाई राज्यसभा सांसद (करीब सात सदस्य) भी BJP की ओर रुख कर रहे हैं। आप प्रमुख अरविन्द केजरीवाल ने अपनी फौरी प्रतिक्रिया में कहा कि बीजेपी ने पंजाबियों को धोखा दिया है।
बीजेपी में शामिल होने जा रहे सांसद अशोक मित्तल वो शख्स हैं, जिन्हें राघव चड्ढा की जगह राज्यसभा में डिप्टी लीडर केजरीवाल ने बताया था। अशोक मित्तल एक यूनिवर्सिटी के मालिक हैं। हाल ही में उन पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापा मारा था। आप ने शुक्रवार को इस घटनाक्रम पर यही कहा है। केजरीवाल के सहयोगी सांसद संजय सिंह ने इस घटनाक्रम पर कहा कि यह बीजेपी का ऑपरेशन लोटस है। जिस शख्स पर अभी ईडी के छापे पड़ रहे थे, अब वो बीजेपी में जा रहा है। इसका क्या आशय है।
इस घटनाक्रम का बीजेपी को फायदा कैसे
पहले राज्यसभा की स्थिति देखते हैं। 245 सीटों वाले संसद के उच्च सदन में NDA के पास 145 सदस्य हैं। इसमें अकेले BJP के सांसदों की संख्या 106 है। अगर राघव चड्ढा समेत AAP के 7 सांसद BJP में शामिल हो जाते हैं, तो टोटल नंबर 113 हो जाता है। वहीं, NDA के नंबर 152 हो जाएंगे। राघव चड्ढा के मुताबिक, AAP के और सांसद भी पाला बदल सकते हैं। इस लिहाज से BJP के नंबर 116 तक जा सकते हैं। जबकि NDA 155 तक जा सकती है। राज्यसभा में BJP को YSRCP का पहले से सपोर्ट हासिल है। ऐसे में राघव चड्ढा के इस कदम के बाद संसद के उच्च सदन में BJP की ताकत बढ़ेगी ही।
राज्यसभा में आप के पास बचे 3 सांसद कौन-कौन हैं
1. संजय सिंह
2. बलबीर सिंह सीचेवाल
3. एनडी गुप्ता
- जो लोग राघव चड्ढा के नेतृत्व में बीजेपी में जा रहे हैं वो चड्ढा सहित 7 लोग हैं
1. राघव चड्ढा
2. अशोक मित्तल
3. हरभजन सिंह (क्रिकेटर)
4. संदीप पाठक
5. स्वाति मालीवाल
6. विक्रमजीत सिंह साहनी
7. राजेन्द्र गुप्ता
इस बीच संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, राघव चड्ढा ने कहा, "हमने फैसला किया है कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य, भारत के संविधान के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए भाजपा में विलय करेंगे।" इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सभी सांसद बीजेपी कार्यालय चले गए। वहां वे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मिलने वाले हैं। ये सभी सांसद पंजाब से आते हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने अपनी पूर्व पार्टी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, “पुरानी AAP वो AAP नहीं रही।” उन्होंने AAP को “भ्रष्ट और समझौतापरस्त” बताया और कहा, “मैं गलत पार्टी में सही आदमी था।” चड्ढा ने आरोप लगाया कि AAP अपने स्थापना सिद्धांतों से भटक गई है।
राघव चड्ढा को सांसद संजय सिंह का जवाब
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “आज आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। पंजाब की जनता को इन सातों नामों को याद रखना चाहिए। वे इन लोगों को कभी माफ नहीं करेंगे जिन्होंने उनके साथ विश्वासघात किया है। पार्टी ने राघव चड्ढा को विधायक और सांसद बनाया, पंजाब की जनता ने उन्हें क्या-क्या नहीं दिया? उन्हें राज्यसभा भेजकर कितना प्यार दिखाया? और अब, वे भाजपा की गोद में चले गए हैं। पार्टी ने संदीप पाठक को पंजाब की जनता के प्यार और आशीर्वाद से राज्यसभा तक पहुंचने का मौका दिया और उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां सौंपीं। राजेंद्र गुप्ता, उनकी यात्रा देखिए और पार्टी उन्हें राज्यसभा तक कहां तक ले गई। विक्रम साहनी, अशोक मित्तल और स्वाति मालीवाल को आम आदमी पार्टी और पंजाब की जनता ने जमीनी स्तर से राज्यसभा तक पहुंचाया। यहां तक कि हरभजन सिंह को भी पंजाब की जनता के प्यार और आशीर्वाद से संसद तक पहुंचने का मौका मिला। लेकिन इन सात लोगों ने पंजाब की जनता को पीठ में छुरा घोंपा है। उन्होंने उनके साथ विश्वासघात किया है और पंजाब में सरकार बनने में बाधा डाली है। वह जनता की सेवा कर रहा था।
इस महीने की शुरुआत में राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटा दिया गया था, जो पार्टी नेतृत्व के साथ उनके रिश्तों में टूट का स्पष्ट संकेत था। अब यह कदम AAP के संसदीय दल में बड़े स्तर पर फेरबदल का कारण बन गया है।
राघव चड्ढा AAP के युवा और प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं। उन्होंने दिल्ली और पंजाब के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी विदाई और ज्यादातर राज्यसभा सांसदों के जाने से पार्टी में गहरी दरारें उजागर हो गई हैं। यह AAP की संसदीय उपस्थिति को काफी कमजोर कर देगा।
इस घटनाक्रम से BJP को राज्यसभा में अपनी संख्या और प्रभाव बढ़ाने का बड़ा मौका मिला है। साथ ही यह विपक्ष की एक प्रमुख पार्टी को करारा झटका है। नेताओं के बीजेपी में औपचारिक शामिल होने की प्रक्रिया अगले कुछ दिनों में पूरी होने की उम्मीद है।
पंजाब के सीएम भगवंत मान का बयान
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सांसदों द्वारा भाजपा में विलय की घोषणा पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, "...भाजपा ने पंजाब के साथ विश्वासघात किया है...शरद पवार, शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस की पार्टियों में भी इसी तरह की मशीन का इस्तेमाल किया गया था...भाजपा का पंजाब में कोई आधार नहीं है...।"
आप पर इस घटनाक्रम का कितना असर होगा
AAP की कुल 10 राज्यसभा सीटों में से 7 बीजेपी में जा रही है। पार्टी की संसदीय उपस्थिति एक झटके में दो-तिहाई कम हो गई। इससे आप का ऊपरी सदन में आवाज उठाने का दायरा सीमित हो जाएगा। यह घटना चड्ढा को अप्रैल 2026 की शुरुआत में राज्यसभा डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने का नतीजा है। तब से पार्टी में पंजाब मुद्दों को संसद में नहीं उठाने, लोकप्रियता और नेतृत्व से दूरी जैसे आरोप-प्रत्यारोप चल रहे थे। चड्ढा आप के युवा और राष्ट्रीय चेहरे थे, जिन्होंने दिल्ली-पंजाब के अलावा पार्टी की छवि बनाई थी। आप के अपने सिद्धांतों से भटकने का आरोप पार्टी छोड़ने वाले लगा रहे हैं। पार्टी के संस्थापक केजरीवाल की छवि पर सीधा असर पड़ेगा। उनका “ईमानदार राजनीति” का नेरेटिव कमजोर हुआ है और आगे भी कमज़ोर ही होगा।
आप की पंजाब सरकार क्या खतरे में है
आप के 10 राज्यसभा सांसदों में 7 पंजाब कोटे के थे। चड्ढा, मित्तल, पाठक और हरभजन सिंह सभी पंजाब से जुड़े हैं। ये सांसद पंजाब विधानसभा के चुने हुए विधायकों द्वारा भेजे गए थे। लेकिन विधायकों ने पार्टी प्रमुख केजरीवाल के निर्देश पर इन्हें जिताकर राज्यसभा भेजा। इनमें से कोई भी सांसद अपने दम पर नहीं बना है। आप पंजाब के चंद विधायक इन सांसदों से प्रभावित हो सकते हैं लेकिन फिलहाल आप की पंजाब सरकार को कोई खतरा नहीं दिखाई दे रहा है।
अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई है कि पंजाब विधानसभा के AAP विधायकों में से किसी ने इस्तीफा दिया हो या BJP की ओर रुख किया हो। हालांकि 10-11 विधायकों के दिल्ली में होने की खबर है लेकिन उनके बीजेपी में जाने की खबर कोई पुष्ट नहीं कर रहा है। अलबत्ता, यह घटना पंजाब आप के नेताओं में असंतोष को बढ़ा सकती है, क्योंकि चड्ढा पंजाब के मुद्दों (किसान, पानी, बेरोजगारी) को संसद में नहीं उठाने के लिए जाने जाते हैं। चड्ढा ने चंद राष्ट्रीय मुद्दे उठाए लेकिन पंजाब के मुद्दे नहीं उठाए। बहरहाल, अगर 10-15 विधायक भी टूटे, तो सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन अभी यह केवल अटकल है, तथ्य नहीं।
यह केजरीवाल और आप के लिए बड़ा राष्ट्रीय झटका है। उसकी संसदीय ताकत, छवि और आंतरिक एकता पर। पंजाब सरकार पर प्रत्यक्ष खतरा अभी नहीं है, क्योंकि विधानसभा में उसका बहुमत बरकरार है। लेकिन राज्यसभा में आप की कमजोरी सामने आ गई है।