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'अग्निपथ'- युवाओं के सपने को 4 साल में बांधकर न रखें: केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने 'अग्निपथ' योजना को लेकर युवाओं की नाराज़गी को सही ठहराया है। हालाँकि, उन्होंने बीजेपी या मोदी सरकार का नाम लेकर उन पर कोई टिप्पणी नहीं की है। उन्होंने यह ज़रूर कहा है कि 'सेना हमारे देश की शान है, हमारे युवा अपना पूरा जीवन देश को देना चाहते हैं, उनके सपनों को 4 साल में बांधकर मत रखिए'। 

अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा है, 'केंद्र सरकार से अपील- युवाओं को 4 साल नहीं, पूरी ज़िंदगी देश सेवा करने का मौक़ा दिया जाए। पिछले दो साल सेना में भर्तियाँ न होने की वजह से जो अधिक उम्र के हो गए हैं, उन्हें भी मौक़ा दिया जाए।' 

केजरीवाल का यह बयान तब आया है जब देश के कई हिस्सों में 'अग्निपथ' योजना की घोषणा को लेकर बवाल मचा है। बिहार में तो हिंसात्मक प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। कई जगहों पर ट्रेनों में आग लगा दी गई। सड़कों पर वाहनों में तोड़फोड़ की गई है। बिहार के जहानाबाद में छात्रों ने सड़क को जाम कर दिया और बक्सर में भी छात्र रेलवे ट्रैक पर उतर आए। 

मुंगेर, सहरसा, आरा और नवादा में भी छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया है। छात्रों ने कई जगहों पर टायरों को भी जलाया है। बुधवार को भी अग्निपथ योजना के विरोध में मुजफ्फरपुर, बेगूसराय में छात्र सड़क पर उतरे थे। 

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ऐसे विरोध प्रदर्शनों के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 'अग्निपथ' योजना की तीखी आलोचना की है। उन्होंने इस योजना में युवाओं के लिए भविष्य नहीं होने की बात कहते हुए कहा कि इसमें न तो कोई रैंक और और न ही कोई पेंशन है। 

राहुल ने कहा, "देश के बेरोज़गार युवाओं की आवाज़ सुनिए, इन्हें 'अग्निपथ' पर चला कर इनके संयम की 'अग्निपरीक्षा' मत लीजिए, प्रधानमंत्री जी।"

बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने भी कई सवाल उठाए हैं। इन सवालों को लेकर वरुण गांधी ने राजनाथ सिंह को ख़त लिखा है। उन्होंने उस ख़त में कहा है कि 'अग्निपथ' योजना को लेकर देश के युवाओं में कई सवाल हैं।

बीजेपी सांसद ने दो पन्नों के ख़त को साझा करते हुए ट्वीट में लिखा है कि युवाओं को असमंजस की स्थिति से बाहर निकालने के लिए सरकार तुरंत योजना से जुड़े नीतिगत तथ्यों को सामने रख कर अपना पक्ष साफ़ करे।

उन्होंने लिखा है, 'सेना में 15 साल की नौकरी के बाद रिटायर हुए नियमित सैनिकों को कॉरपोरेट सेक्टर नियुक्त करने में ज़्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाते। ऐसे में 4 साल की अल्पावधि के उपरांत इन अग्निवीरों का क्या होगा? चार साल सेना में सेवा देने के दौरान इन युवकों की पढ़ाई बाधित होगी। साथ ही अन्य समकक्ष छात्रों की तुलना में ज़्यादा उम्रदराज होने के कारण अन्य संस्थानों में शिक्षा ग्रहण करने और नौकरी पाने में मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है।'

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उन्होंने सुरक्षा के मुद्दे को उठाते हुए कहा है, 'स्पेशल ऑपरेशन के समय सशस्त्र बलों में स्पेशलिस्ट काडर वाले सैनिकों की ज़रूरत होती है, ऐसे में महज 6 महीने की बेसिक ट्रेनिंग प्राप्त इन सैनिकों के कारण वर्षों पुरानी रेजिमेंटल संरचना बाधित हो सकती है।' उन्होंने कहा है कि इस योजना से प्रशिक्षण लागत की बर्बादी भी होगी, क्योंकि 4 साल के बाद सेना इन प्रशिक्षित जवानों में केवल 25 फ़ीसदी का उपयोग ही करेगी। वरुण गांधी ने कम सैलरी का मुद्दा भी उठाया है। 
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