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दो कंपनियों से पूरे देश को कोरोना टीका देना संभव नहीं: केजरीवाल 

देश में कोरोना टीके की कमी के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र को कोरोना टीका की नीति में बदलाव करने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि सिर्फ़ दो कंपनियों से पूरे देश को टीका लगाना संभव नहीं है और वैक्सीन के फ़ॉर्मूला को दूसरी कंपनियों के साथ साझा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा है कि भारत में दूसरी कंपनियों को वैक्सीन बनाने की इजाज़त देकर युद्ध स्तर पर इसका उत्पादन किया जाना चाहिए। 

वैसे, मुख्यमंत्री केजरीवाल का यह सुझाव केंद्र सरकार मानती है या नहीं, यह तो घोषणा के बाद ही पता चलेगा, लेकिन सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पैरवी करती रही है कि कोरोना वैक्सीन पर कंपनियों का पेटेंट यानी एकाधिकार ख़त्म हो। 

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भारत के साथ ही दक्षिण अफ्रीका ने पिछले साल अक्टूबर में ही इसकी मांग की थी। हालाँकि तब अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, जापान, स्विट्ज़रलैंड जैसे देश इसका विरोध कर रहे थे। पाकिस्तान, मंगोलिया, केन्या, बोलिविया और वेनेजुएला- जैसे देशों ने इस मांग का समर्थन किया था। लेकिन अब अमेरिका के बाइडन प्रशासन ने ट्रंप की नीति को उलट दिया है। ब्रिटेन और फ्रांस- जैसे राष्ट्रों ने भी भारत के समर्थन की इच्छा जाहिर की है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह पहल इसलिए की गई कि दुनिया के कई ग़रीब मुल्क हैं जो टीकाकरण की क़ीमतें नहीं सह सकते या ग़रीब लोग इसका भार नहीं उठा सकते। इसलिए अमीर देशों और अमीर कंपनियों से अपेक्षा की गई कि कोरोना जैसी महामारी से इंसानों को बचाने के लिए वे दरियादिली दिखाएँगे। 

अब अरविंद केजरीवाल ऐसी ही दरियादिली दिखाने की अपील केंद्र सरकार से कर रहे हैं। हालाँकि वह जो कारण बता रहे हैं वह अलग है। अरविंद केजरीवाल का कहना है कि भारत में जो कंपनियाँ टीके बना रही हैं उससे देश में दो साल में सभी को टीके लग पाएँगे। 

देश में फ़िलहाल दो कंपनियाँ- सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया और भारत बायोटेक टीके बना रही हैं। इसके अलावा रूस की स्पुतनिक वी वैक्सीन को आपात मंजूरी दी गई है, लेकिन इसके टीके अभी देश में लगने शुरू नहीं हुए हैं।

कोरोना पर रोज़ाना की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'केवल दो कंपनियाँ ही टीके का उत्पादन कर रही हैं। वे हर महीने केवल छह से सात करोड़ का उत्पादन करती हैं। इस तरह, सभी को टीकाकरण करने में दो साल लगेंगे... तब तक कई लहरें आ चुकी होंगी। टीके का उत्पादन  बढ़ाना एक राष्ट्रीय योजना तैयार करना महत्वपूर्ण है।'

उन्होंने ट्वीट कर कहा कि वैक्सीन की कमी कैसे दूर करें। 

केजरीवाल ने इन सुझावों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा है कि यदि अधिक फर्मों को टीके बनाने की अनुमति दी गई तो आपूर्ति बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि 'केंद्र के पास इस कठिन समय में ऐसा करने की शक्ति है। हर भारतीय को अगले कुछ महीनों में टीका लगाया जाना चाहिए और हम हर भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।'

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मुख्यमंत्री ने कहा, 'हम हर दिन 1.25 लाख खुराक का प्रबंध कर रहे हैं। हम हर दिन तीन लाख से अधिक टीकाकरण शुरू करेंगे। हमारा लक्ष्य तीन महीने के भीतर सभी निवासियों का टीकाकरण करना है, लेकिन हम कमी का सामना कर रहे हैं।'

अरविंद केजरीवाल की यह अपील तब सामने आई है जब आज सुबह ही स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि शहर में केवल एक दिन के लिए कोवैक्सीन की खुराक और चार के लिए कोविशील्ड की खुराक ही बची है।

देश भर में टीके की आपूर्ति एक प्रमुख मुद्दा है और 1 मई के बाद तो चिंता और बढ़ गई है जब 18 से अधिक उम्र के लोगों को टीकाकरण में शामिल किया गया है। 

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