दिल्ली में अप्रैल 2028 से पेट्रोल वाले दोपहिया वाहनों का नया रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। डीजल, पेट्रोल और सीएनसी वाले ऑटो रिक्शा का नया रजिस्ट्रेशन तो जनवरी 2027 से ही नहीं हो पाएगा। यानी ऐसे वाहनों की बिक्री इन तारीख़ों से पूरी तरह बंद हो जाएगी। इन वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन ही चलेंगे। क्योंकि 2027 से ऑटोरिक्शा और 2028 से दोपहिया वाहनों में सिर्फ़ ईवी यानी इलेक्ट्रिक वेहिकल का ही नया रजिस्ट्रेशन होगा। इसका मतलब ये नहीं है कि डीजल-पेट्रोल और सीएनजी वाले पुराने रजिस्ट्रेशन वाले वाहन बंद हो जाएंगे, वे भी रजिस्ट्रेशन एक्सपायर होने तक चलते रहेंगे।

दरअसल, दिल्ली कैबिनेट ने दिल्ली ईवी पॉलिसी 2026 को मंज़ूरी दे दी है, जो 1 जुलाई 2026 से लागू होगी। राजधानी को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में यह बड़ा क़दम उठाया गया है। नई नीति के तहत नए पेट्रोल दोपहिया वाहनों का पंजीकरण पूरी तरह बंद कर करने के साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने क़रीब 7000 करोड़ रुपये का बड़ा बजट भी तय किया है। यह नई नीति 31 मार्च 2030 तक लागू रहेगी और इसका मक़सद दिल्ली में पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना है।
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नई ईवी नीति के अनुसार 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का ही नया रजिस्ट्रेशन होगा। यानी इस तारीख़ के बाद कोई भी नये पेट्रोल स्कूटर या मोटरसाइकिल को पंजीकृत नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि दिल्ली में सबसे अधिक संख्या दोपहिया वाहनों की है, इसलिए इन्हें इलेक्ट्रिक बनाने से प्रदूषण में बड़ी कमी आएगी।

2027 से ऑटो रिक्शा पर भी नियम

ऑटो और छोटे कमर्शियल वाहन भी इलेक्ट्रिक होंगे। नई नीति के तहत 1 जनवरी 2027 से एल-5 श्रेणी के सभी नए ऑटो-रिक्शा तथा छोटे कमर्शियल मालवाहक वाहनों (N-1 कैटेगरी) के लिए पेट्रोल, डीजल और सीएनजी रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया जाएगा। ये यात्री और मालवाहक दोनों के नियम लागू होंगे। इन श्रेणियों में केवल इलेक्ट्रिक वाहनों को ही अनुमति मिलेगी।

ईवी पर रोड टैक्स, रजिस्ट्रेशन फीस पूरी तरह माफ

दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को बड़ी राहत देते हुए 100 प्रतिशत रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क माफ करने का फ़ैसला किया है। हालाँकि यह छूट 30 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक क़ीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों पर ही लागू होगी। इससे अधिक क़ीमत वाली लग्जरी ईवी पर सामान्य टैक्स देना होगा।

खरीद पर मिलेगी सीधी सब्सिडी

सरकार इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों के बैंक खाते में सीधे डीबीटी के ज़रिए सब्सिडी भेजेगी। नई नीति के तहत इतनी सब्सिडी मिलेगी-
  • इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन पर 30000 रुपये तक
  • इलेक्ट्रिक तीनपहिया वाहन पर 50000 रुपये तक
  • 3.5 टन तक के इलेक्ट्रिक कमर्शियल ट्रक (N-1) पर 1 लाख रुपये तक

पुराने वाहन स्क्रैप करने की योजना

पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने के लिए सरकार ने 1500 करोड़ रुपये का अलग प्रावधान किया है। यदि कोई व्यक्ति अपना पुराना पेट्रोल या डीजल वाहन स्क्रैप कराकर इलेक्ट्रिक वाहन खरीदता है तो उसे अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा-
  • चारपहिया वाहन स्क्रैप करने पर 1 लाख रुपये
  • दोपहिया वाहन पर 10000 रुपये
  • तीनपहिया वाहन पर 25000 रुपये
  • छोटे कमर्शियल ट्रक पर 50000 रुपये

भारी इलेक्ट्रिक ट्रकों को मिलेगा विशेष लाभ

दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए सरकार ने भारी मालवाहक इलेक्ट्रिक ट्रकों को भी बढ़ावा देने का फ़ैसला किया है। नई नीति के अनुसार पहले खरीदे गए 3.5 से 12 टन वाले 1000 इलेक्ट्रिक N-2 ट्रकों को 10 वर्षों तक दिल्ली के 'नो-एंट्री' प्रतिबंध से छूट मिलेगी। इससे माल ढुलाई करने वाले कारोबारियों को बड़ा फ़ायदा होगा।

स्कूल बस और वैन भी होंगे इलेक्ट्रिक

सरकार ने स्कूल परिवहन को भी धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक बनाने का लक्ष्य रखा है। नई नीति के अनुसार पहले दो वर्षों में स्कूलों के 10 प्रतिशत वाहन, तीसरे वर्ष तक 20 प्रतिशत वाहन और मार्च 2030 तक 30 प्रतिशत स्कूल वाहन इलेक्ट्रिक होने चाहिए।

पूरे शहर में बनेंगे 30 हजार चार्जिंग प्वाइंट

इलेक्ट्रिक वाहन उपयोग करने वालों की सबसे बड़ी चिंता चार्जिंग की असुविधा की होती है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने पूरे दिल्ली में 30000 से अधिक सार्वजनिक चार्जिंग प्वाइंट बनाने का लक्ष्य रखा है।

सरकार का कहना है कि चार्जिंग नेटवर्क मज़बूत होने से लोगों का इलेक्ट्रिक वाहनों पर भरोसा बढ़ेगा और रेंज की समस्या भी काफी हद तक ख़त्म हो जाएगी।

प्रदूषण कम करने, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने पर जोर

दिल्ली सरकार का कहना है कि नई EV नीति का मक़सद केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ाना नहीं, बल्कि राजधानी में वायु प्रदूषण को कम करना, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाना और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन व्यवस्था विकसित करना है।

सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग से दिल्ली की हवा बेहतर होगी और लोगों को सस्ता तथा पर्यावरण-अनुकूल परिवहन विकल्प मिलेगा।