दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस तेजस कारिया ने एक जनहित याचिका की सुनवाई से खुद को बुधवार को अलग कर लिया। यह जनहित याचिका अरविंद केजरीवाल, अन्य आप नेताओं और पत्रकार रविश कुमार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई को लेकर है।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा मामले में केजरीवाल, रविश कुमार सहित 10 पर अवमानना का आरोप
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस तेजस कारिया ने बुधवार को एक जनहित याचिका (PIL) से खुद को अलग कर लिया। इस पीआईएल में आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पार्टी के कई नेताओं और पत्रकार रविश कुमार के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है।
यह याचिका शराब नीति मामले में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में हुई कार्यवाही के वीडियो रिकॉर्डिंग और ब्रॉडकास्ट से संबंधित है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि केजरीवाल और अन्य लोगों ने बिना अनुमति के अदालत की कार्यवाही रिकॉर्ड की और सोशल मीडिया पर वायरल की।
पूरा मामला क्या है?
यह मामला 13 अप्रैल 2026 को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में पेश हुआ था। जहां अरविंद केजरीवाल ने व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जस्टिस शर्मा की रिक्यूजल (मामले से अलग होने) की मांग की थी। उस सुनवाई के वीडियो क्लिप्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गए थे। याचिकाकर्ता वकील वैभव सिंह ने इन वीडियो रिकॉर्डिंग्स और उनके प्रसार पर आपत्ति जताते हुए अवमानना की कार्रवाई की मांग की है।
बुधवार की सुनवाई में क्या हुआ
यह मामला बुधवार को चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच के सामने आया। जस्टिस तेजस कारिया ने खुद को इस मामले से रिक्यूज कर लिया। बेंच ने कहा कि यह मामला अब कल (गुरुवार) को एक अलग बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जाएगा, जिसमें जस्टिस कारिया शामिल नहीं होंगे।
10 लोगों पर अदालत की अवमानना का आरोप लगाया गया
वकील वैभव सिंह ने अपनी PIL में इन लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है:अरविंद केजरीवाल, पत्रकार रविश कुमार, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, AAP नेता मनीष सिसोदिया, आप सांसद संजय सिंह, संजीव झा, पुरंदीप साहनी, जरनैल सिंह, मुकेश अहलावत और विनय मिश्रा। हालांकि इस मामले में अदालत ने दिल्ली पुलिस से कहा था कि वो इस वीडियो को हटवाए, जिसमें केजरीवाल जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से बहस करते नज़र आ रहे हैं। हालांकि इस याचिका में भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से इन वीडियो को हटाने के लिए निर्देश जारी करने की मांग भी की गई है।
याचिका में लगाए गए आरोप
याचिकाकर्ता ने कहा कि केजरीवाल ने अदालत में "तुच्छ, अपमानजनक और भ्रामक दलीलें" दीं, जिनका कोई आधार नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के कई नेता और अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने जानबूझकर अदालत की कार्यवाही का ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग किया और उसे X (पूर्व ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब तथा विभिन्न न्यूज चैनलों पर प्रसारित किया।
याचिका में कहा गया है: "यह रिकॉर्डिंग और प्रसारण एक गहरी साजिश की बू आती है, जिसका मकसद इस महान संस्था (न्यायपालिका) की छवि को धूमिल करना, आम जनता को गुमराह करना और यह दिखाना है कि न्यायपालिका कुछ राजनीतिक दलों या केंद्र सरकार के दबाव में काम कर रही है।"
हाईकोर्ट प्रशासन ने पहले क्या कदम उठाए थे
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर अनधिकृत रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पर प्रकाशन के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था। इसमें केजरीवाल की उस सुनवाई के वायरल वीडियो भी शामिल थे। न्यायालय के नियमों के अनुसार, बिना अनुमति के अदालत की कार्यवाही रिकॉर्ड करना और प्रसारित करना प्रतिबंधित है। यह मामला अब गुरुवार को एक नई बेंच के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।