साउथ दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास शनिवार रात को एक बड़ा हादसा हो गया। यहाँ वेस्टर्न मार्ग, सैदुलाजाब इलाके में स्थित एक पांच मंजिला व्यावसायिक इमारत पूरी तरह ढह गई। मलबे में कई लोगों, विशेषकर कोचिंग संस्थान के छात्रों के फंसे होने की गंभीर आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई और कंक्रीट व मलबे के एक विशाल ढेर में तब्दील हो गई। 

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने देर रात एक्स पर लिखा- साकेत मेट्रो स्टेशन के पास इमारत गिरने की घटना से हम बेहद चिंतित हैं। एनडीआरएफ, दिल्ली अग्निशमन सेवा, दिल्ली पुलिस, डीडीएमए, एमसीडी, सीएटीएस और नागरिक सुरक्षा की टीमें युद्धस्तर पर बचाव अभियान चला रही हैं। फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। 

हादसे की खास बातें

घटना का समय और स्थान: दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) को शनिवार शाम को इमारत गिरने की सूचना मिली। यह हादसा साकेत मेट्रो स्टेशन के पास वेस्टर्न मार्ग (सैदुलाजाब) पर हुआ।
कोचिंग और निर्माण कार्य: पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस व्यावसायिक इमारत के ग्राउंड फ्लोर (भूतल) पर एक कोचिंग संस्थान चल रहा था, जबकि ऊपरी मंजिलों पर निर्माण कार्य जारी था। यही वजह है कि मलबे में फंसे लोगों में छात्रों के होने की सबसे अधिक आशंका है।
बचाव कार्य: सूचना मिलते ही दमकल विभाग की 7 गाड़ियां (fire tenders) और पुलिस टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। स्थानीय निवासियों की मदद से मलबे के नीचे फंसे 3 से 4 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। उन्हें मामूली चोटें आई हैं और इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के बयान

मलबे के पास मौजूद स्थानीय निवासियों ने घटना की भयावहता और परिस्थितियों के बारे में विस्तार से बताया। एक शख्स ने कहा- "यह पूरी तरह से ग्लास-फैसाड (कांच के मुखौटे वाली) कमर्शियल बिल्डिंग थी। सटीक रूप से कहना मुश्किल है कि हादसे के वक्त अंदर कितने लोग थे। आमतौर पर इस इमारत में 300 से 400 लोग मौजूद रहते हैं, लेकिन उम्मीद है कि शनिवार की शाम होने की वजह से हादसे के समय अंदर कम लोग रहे होंगे।"
एक अन्य शख्स ने इमारत के निर्माण पर सवाल उठाते हुए कहा: "यह एक ऐसी व्यावसायिक इमारत थी जहाँ छात्र पढ़ाई के लिए आते थे और लोग काम करते थे। अगर यह हादसा ऑफिस के कामकाजी घंटों (day shift) के दौरान हुआ होता, तो मरने वालों का आंकड़ा बेहद खौफनाक हो सकता था। इस वक्त भी आशंका है कि 3-4 लोग नाइट शिफ्ट या किसी काम से अंदर रहे होंगे, जो घायल हो सकते हैं। इस इमारत का निर्माण कार्य बेहद खराब गुणवत्ता का था।"

तंग गलियों के बीच बचाव कार्य में चुनौतियां

हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया। चूंकि यह एक घनी आबादी वाला इलाका है और यहाँ की गलियां काफी संकरी (तंग) हैं, इसलिए राहत और बचाव वाहनों को मौके तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। आसपास के लोग अपने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट और टॉर्च लेकर तुरंत मदद के लिए दौड़े। स्थानीय लोग खुद मलबे को हटाकर रास्ता बनाने और दमकलकर्मियों की मदद करने में जुटे दिखे।

नुकसान का आकलन

शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, इस विशाल इमारत के गिरने से ठीक बगल में स्थित एक छोटी इमारत, जिसमें एक 'मेस' (खाना खाने की जगह) संचालित हो रही थी, उसे भी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, मेस में मौजूद लोगों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। गनीमत यह रही कि आसपास की अन्य बड़ी इमारतों को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुँचा है।
फिलहाल, मलबे के नीचे निश्चित रूप से कितने लोग दबे हुए हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि प्रशासन द्वारा नहीं की गई है। युद्ध स्तर पर खोज और बचाव अभियान (Search and Rescue Operation) जारी है।