दिल्ली के सत्य निकेतन में ढही PG बिल्डिंग के मालिक को बड़े पैमाने पर चली खोजबीन के बाद हिरासत में ले लिया गया है। इस हादसे के 24 घंटे से ज़्यादा समय बाद राजस्थान के भिवाड़ी से हरिराम बंसल को पकड़ा गया। इधर, दिल्ली नगर निगम ने सोमवार को दक्षिण क्षेत्र के पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम इलाके सत्य निकेतन में रविवार को दशकों पुरानी पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई थी। इस हादसे में सात लोगों की जान चली गई और कई लोग घायल हो गए। मलबे के नीचे दर्जनों लोगों के दबे होने की आशंका के बीच रेस्क्यू टीमें तेज़ी से काम कर रही हैं। पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है। इसके अलावा मुख्यमंत्री कार्यालय ने मजिस्ट्रेट जाँच के आदेश दिए हैं। सत्य निकेतन क्षेत्र में सैकड़ों विश्वविद्यालय के छात्र भीड़-भाड़ वाले आवासों में रहते हैं।

निलंबित अधिकारियों में दक्षिण क्षेत्र के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह, कार्यकारी अभियंता (भवन) ललित कुमार गोयल, सहायक अभियंता (भवन) सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर (भवन) आशीष कुमार शामिल हैं। एमसीडी ने इन अधिकारियों को ‘तत्काल प्रभाव से’ निलंबित करते हुए कहा कि इमारत ढहने की घटना के बाद यह कार्रवाई की गई है। प्रशासनिक स्तर पर इस मामले की आगे जांच जारी है। 
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बिल्डिंग ढहने की यह घटना रविवार दोपहर दिल्ली के धौला कुआं इलाके में श्री वेंकटेश्वर कॉलेज के सामने सत्य निकेतन में छात्रों के लिए प्राइवेट हॉस्टल के तौर पर इस्तेमाल हो रही पांच मंज़िला इमारत में हुई। एम्स ने सोमवार सुबह बुलेटिन जारी कर कहा है कि सत्य निकेतन में इमारत गिरने से घायल हुए 10 लोगों को ट्रॉमा सेंटर लाया गया था। इन 10 मरीजों में से 5 को मृत अवस्था में लाया गया था, जबकि गंभीर हालत वाले एक मरीज की बाद में मौत हो गई। तीन मरीजों को भर्ती किया गया है और उनका इलाज चल रहा है। एक मरीज के अंग की सर्जरी की गई। एक मरीज को मामूली चोट आई थी और निगरानी के बाद उसे छुट्टी दे दी गई। खबर लिखे जाने तक बचाव दल मलबे को हटाकर जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहे थे।

दमकल विभाग को रविवार दोपहर क़रीब 1:35 बजे इस घटना की सूचना मिली। 12 दमकल गाड़ियां वहां पहुँचीं। स्लैब और गर्डर हटाने के लिए मौके पर एक एक्सकेवेटर लाया गया। साइट पर काम कर रही फायर टीमों की मदद के लिए डिजास्टर रिस्पॉन्स टीमों को भी तैनात किया गया। पुलिस और दमकल की टीमें मलबा हटाकर फँसे लोगों को निकालने में जुटी हुई हैं। सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित है। यहां कई कॉलेज के छात्र किराए के कमरों में रहते हैं। 

बचाव और राहत कार्य

सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों में उस जगह पर लोगों की भारी भीड़ देखी जा सकती है जहाँ इमारत ढही। स्थानीय लोग और फायर ब्रिगेड के कर्मचारी मलबे में बचे हुए लोगों को निकालने में लगे हुए हैं। ऑनलाइन शेयर किए गए एक वीडियो में, एक व्यक्ति कंक्रीट के स्लैब के नीचे फंसा हुआ दिखा, जबकि कई अन्य लोग उसे उठाने की कोशिश कर रहे थे। रिपोर्टों में प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से कहा जा रहा है कि 30-40 लोग फँसे हो सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर दुख जताया और कहा कि अधिकारी घटनास्थल पर काम कर रहे हैं और प्रभावित लोगों की मदद कर रहे हैं। पीएमओ ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना दुखद है। जिन लोगों ने अपनों को खोया है, उनके प्रति संवेदना। घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं। अधिकारी घटनास्थल पर काम कर रहे हैं और हादसे से प्रभावित लोगों की मदद कर रहे हैं।'
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने AIIMS ट्रॉमा सेंटर का दौरा किया और डॉक्टरों व स्वास्थ्य अधिकारियों से बात करके सत्य निकेतन में गिरी इमारत से बचाए गए लोगों की हालत के बारे में जानकारी ली। गुप्ता ने यह भी भरोसा दिलाया कि घटना पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और कहा, 'किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।'

राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट किया है, 'दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने की खबर बेहद दर्दनाक और चिंताजनक है। कई लोगों के मलबे में दबे होने की खबर है, जिनमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई छात्र भी शामिल हैं। मेरी अपील है कि NDRF, दिल्ली फायर सर्विस और सभी बचाव दल हर संभव प्रयास करके हर एक छात्र तक पहुँचें, घायलों को तुरंत सर्वोत्तम संभव इलाज मिले, ताकि किसी को भी बचाने में कोई कसर न छोड़ी जाए।'

उन्होंने कहा, 'छात्रों का जीवन पहले ही संघर्षों से भरा था - अब हालात जानलेवा हैं। कॉलेज या विश्वविद्यालय में अच्छे हॉस्टल न होने के कारण छात्र PG में एक छत के नीचे 40-40 की संख्या में, अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं। हर छात्र की जान कीमती है और उसकी रक्षा हर हाल में होनी चाहिए।'
सोशल मीडिया पर साझा की गई एएनआई की एक पोस्ट में एक चश्मदीद का कहना है, 'मेरी दुकान पास ही है। हम उसके अंदर बैठे थे तभी अचानक हमें एक आवाज़ सुनाई दी—जैसे भूकंप की गड़गड़ाहट हो। हम तुरंत बाहर भागे; यहाँ बहुत धुआँ और धूल थी। पूरी इमारत गिर चुकी थी। कुछ शव निकाले गए, और उन्होंने चार बच्चों को भी बचाया जो अभी भी सांस ले रहे थे। ...कम से कम 25-30 बच्चे हैं। यहाँ पास में ही लड़कों का PG और लड़कियों का PG था। 4-5 लोगों को बचाया गया है; 2-3 शव निकाले गए हैं, और और भी शव मिलने की संभावना है।'

सीएम रेखा गुप्ता ने क्या कहा?

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा है, "RK पुरम के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना से बहुत चिंता है। DDMA, NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, MCD, CATS और सिविल डिफेंस की टीमें युद्ध स्तर पर बचाव कार्य कर रही हैं। एहतियात के तौर पर बगल की इमारत को खाली करा लिया गया है। फँसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित परिवारों को तुरंत मदद पहुँचाने की हर संभव कोशिश की जा रही है। हालात पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है और सभी संबंधित एजेंसियाँ आपसी तालमेल के साथ काम कर रही हैं। हर नागरिक की सुरक्षा और भलाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।'
मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि 'हॉस्टल डेज़' नाम का हॉस्टल जिस इमारत में चल रहा था, वह गुड़गांव के रहने वाले हरि ओम की थी। उनके भाइयों - आनंद बंसल और आज़ाद बंसल - के पास इस इमारत के आस-पास अलग-अलग प्लॉट और इमारतें थीं। द इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि चल रहे रेनोवेशन के काम और बेसमेंट की खुदाई की वजह से इमारत की नींव कमज़ोर हो सकती है।

MCD ने पास की बिल्डिंग को सील किया

स्थानीय लोगों ने इसके लिए मरम्मत के काम और बेसमेंट में पानी जमा होने को ज़िम्मेदार ठहराया, जबकि MCD का कहना है कि जब तक मलबा नहीं हटाया जाता, तब तक यह पुष्टि नहीं की जा सकती कि मरम्मत का काम चल रहा था या नहीं।

अधिकारियों के मुताबिक, MCD ने गिरी हुई बिल्डिंग के बगल में मौजूद उस बिल्डिंग से किराएदारों को बाहर निकाल दिया है जिसमें लड़कियों का PG चल रहा था और उसे सील कर दिया है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार MCD के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि पांच मंज़िला बिल्डिंग, जिसमें लड़कों का हॉस्टल था, लगभग 30 साल पुरानी G+4 बिल्डिंग थी। इसे रीसेटलमेंट कॉलोनी में करीब 55 स्क्वायर यार्ड की जगह पर बनाया गया था, जबकि वहां सिर्फ़ G+1 यूनिट बनाने की ही मंज़ूरी थी। अधिकारी ने बताया कि गिरी हुई बिल्डिंग नियमों का उल्लंघन करके बनाई गई थी और वहां सिर्फ़ ग्राउंड फ़्लोर और पहली मंज़िल बनाने की ही इजाज़त थी।
घटना की खबर फैलते ही एनएसयूआई और एआईएसए जैसे छात्र संगठनों के कार्यकर्ता भी मदद के लिए मौके पर पहुंच रहे हैं। अभी तक हताहतों की सटीक संख्या की पुष्टि नहीं हुई है। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और आगे की जानकारी का इंतज़ार है।