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वेबसाइट न्यूज़ क्लिक के दफ़्तर पर ईडी की छापेमारी

ईडी ने मंगलवार को न्यूज़ वेबसाइट न्यूज़ क्लिक के दफ़्तर पर छापा मारा है। दफ़्तर के अलावा न्यूज़ क्लिक के निदेशकों और शेयरधारकों के घरों पर भी छापा मारा गया है। वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी है। अभिसार न्यूज़ क्लिक के लिए दो शो करते हैं। 

न्यूज़ क्लिक वेबसाइट सरकार के कामकाज को लेकर सवाल उठाती है। माना जा रहा है कि इसी के चलते कंपनी के दफ़्तर पर छापेमारी की गई है। सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले पत्रकारों पर कार्रवाई को लेकर इन दिनों लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। 

हाल ही में सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन को कवर कर रहे पत्रकार मनदीप पूनिया को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया था। इसका भी सोशल मीडिया पर जोरदार विरोध हुआ था। इसके बाद दिल्ली की एक अदालत ने पूनिया को जमानत दे दी थी। 

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किसान आंदोलन से जुड़ी ख़बरों को लेकर वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई, मृणाल पाण्डेय, कांग्रेस सांसद शशि थरूर सहित पत्रकार परेश नाथ, अनंत नाथ और विनोद के जोस के ख़िलाफ़ दिल्ली, नोएडा में एफ़आईआर हो चुकी है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर सरकार की खासी आलोचना हो रही है। 

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए छह पत्रकारों और कांग्रेस सांसद शशि थरूर को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कहा है कि अगले आदेश तक इन लोगों को गिरफ़्तार नहीं किया जा सकता है। 

राजदीप को ऑफ़ एयर किया

एफ़आईआर में जिस ट्वीट का हवाला दिया गया था, उसे लेकर इंडिया टुडे ने अपने कंसल्टिंग एडिटर और वरिष्ठ एंकर राजदीप सरदेसाई को दो हफ़्तों के लिए 'ऑफ एयर' कर दिया था। 'ऑफ एयर' करने का मतलब है कि उन्हें इस समय के लिए एंकरिंग से हटा दिया गया है। इतना ही नहीं, उनका एक महीने का वेतन भी काट लिया गया। 

एडिटर्स गिल्ड ने निंदा की

एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया ने 26 जनवरी की रिपोर्टिंग पर पत्रकारों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने की ज़ोरदार शब्दों में निंदा की है। उसने इसे मीडिया को डराने-धमकाने और परेशान करने का तरीका क़रार दिया है।

गिल्ड ने कहा है कि राजद्रोह, सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने और लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत करने से जुड़ी 10 धाराएं लगाना अधिक चिंता की बात है।

एडिटर्स गिल्ड ने कहा है कि एफ़आईआर में यह बिल्कुल ग़लत कहा गया है कि ट्वीट ग़लत मंशा से किए गए थे और उसकी वजह से ही लाल किले को अपवित्र किया गया। संपादकों की इस शीर्ष संस्था का कहना है कि पत्रकारों को निशाने पर लेना उन मूल्यों को कुचलना है जिनकी बुनियाद पर हमारा गणतंत्र टिका हुआ है। इसका मक़सद मीडिया को चोट पहुँचाना और भारतीय लोकतंत्र के निष्पक्ष प्रहरी के रूप में काम करने से उसे रोकना है।

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