दिल्ली शराब नीति मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई के ख़िलाफ़ जो आलोचनात्मक टिप्पणी की थी उस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। हालाँकि, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य को आरोपों से मुक्त करने वाले फ़ैसले पर हाई कोर्ट ने रोक नहीं लगाई है। लेकिन इसने सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने इस मामले में ईडी केस को ट्रायल कोर्ट से टालने को भी कहा है।
दिल्ली हाई कोर्ट का यह फ़ैसला सीबीआई की अपील पर आया है। दरअसल, 27 फरवरी 2026 को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को इस मामले में सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था। उस कोर्ट ने सीबीआई की जांच को बहुत सख्त शब्दों में आलोचना की थी और सीबीआई पर आरोप लगाया था कि उन्होंने ठोस सबूत नहीं दिए और जांच में गड़बड़ी की।

सीबीआई ने हाई कोर्ट से क्या कहा?

निचली अदालत के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की। सोमवार यानी 9 मार्च को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीबीआई की तरफ़ से पेश होकर कहा कि ट्रायल कोर्ट का फ़ैसला ग़लत है। उन्होंने इसे उटपटाँग बताया और कहा कि इससे आपराधिक कानून को पलट दिया गया है। मेहता ने कहा कि यह हाल के समय का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार का मामला है। सीबीआई के पास केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य के ख़िलाफ़ साज़िश और रिश्वत के ठोस सबूत हैं। सरकारी गवाह और अन्य गवाहों के बयान भी सीबीआई के पक्ष में हैं। उन्होंने मांग की कि मामले को जल्दी निपटाया जाए और ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले पर रोक लगाई जाए।
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हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सीबीआई की याचिका पर सुनवाई की। हाई कोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य के बरी होने वाले आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। यानी अभी वे बरी ही रहेंगे। कोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया और बाकी 21 लोगों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च 2026 को होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि जुड़े हुए मनी लॉन्ड्रिंग केस में ट्रायल कोर्ट की सुनवाई को टाल दिया जाए, जब तक हाई कोर्ट फ़ैसला नहीं सुना देता।

लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की उन आलोचनात्मक टिप्पणियों पर रोक लगा दी, जो सीबीआई और जाँच अधिकारी के ख़िलाफ़ थीं। कोर्ट ने कहा कि ये टिप्पणियां 'पूर्वग्रही' हैं और इन पर अभी अमल नहीं होगा।

सीबीआई के ख़िलाफ़ क्या थीं टिप्पणियाँ?

निचली अदालत ने सीबीआई की जाँच को 'बेहद परेशान करने वाला' बताया था। जज ने कहा था कि जाँच अधिकारी ने तथ्यों को पूरी तरह नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा कि जो खुद आरोपी बन सकता था सिर्फ उसकी ही गवाही की सुनी-सुनाई बातों पर आधारित बयानों के आधार पर सरकारी अधिकारियों को फँसाया। इन अधिकारियों ने अपनी रोजमर्रा की ड्यूटी भी नहीं निभाई और सीबीआई ने बिना किसी ठोस सबूत के उन्हें अपराधी बना दिया।

'ठोस सबूत नहीं'

कोर्ट ने यह भी कहा था कि जाँच में कोई ठोस सबूत नहीं मिला, फिर भी आरोप लगाए गए। जज ने जाँच अधिकारी की रणनीति को 'जानबूझकर की गई चालाकी' क़रार दिया। कोर्ट ने कहा, 'जाँच अधिकारी ने आरोपों को जानबूझकर 'लचीला' रखा, ताकि अगर अदालत में मामला कमजोर पड़े तो उसी गवाह को फँसा सकें जिसके बयान पर पूरा केस टिका था। इससे साफ़ होता है कि अधिकारी को पता था कि उनके आरोप कमजोर हैं और अदालत की जाँच में टिक नहीं पाएंगे।'
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कोर्ट की ये भी टिप्पणियाँ

  • जज ने चार्जशीट की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें कई झूठे दावे हैं, जो किसी गवाह या सबूत से मैच नहीं करते। चार्जशीट में आंतरिक विरोधाभास हैं, जो पूरे साजिश के सिद्धांत को ही खारिज कर देते हैं।
  • कोर्ट ने कहा कि सीबीआई ने प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनाया। खासकर मनीष सिसोदिया के खिलाफ कोई सबूत नहीं था, न ही कोई रिकवरी हुई।
  • अरविंद केजरीवाल को बिना किसी मजबूत सबूत के फंसाया गया, जो कानून के नियमों के खिलाफ है, खासकर जब वह एक संवैधानिक पद पर थे।
  • एक और आरोपी कुलदीप सिंह के बारे में कोर्ट ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि उन्हें पहला आरोपी बनाया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई सबूत ही नहीं था।
  • कोर्ट ने सीबीआई की 12 परसेंट होलसेल मार्जिन थ्योरी को 'साफ़ तौर पर गलत, आर्थिक रूप से इलिटरेट' कहा। इसने कहा कि यह क़ानूनी रूप से नहीं टिकने वाला' नहीं है।
  • अदालत ने सीबीआई की जांच को लापरवाही से भरा बताया और कहा कि बिना बुनियादी सबूतों के किसी को साजिश में फंसाना गलत है।
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दिल्ली शराब नीति क्या थी?

दिल्ली शराब नीति 2021 में दिल्ली सरकार ने बनाई थी। इसका मकसद राजस्व बढ़ाना और शराब व्यापार में सुधार लाना था। इस नीति के तहत शराब व्यापार को पूरी तरह निजी हाथों में सौंप दिया गया। लेकिन बाद में इसमें अनियमितताओं के आरोप लगे। दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने सीबीआई जांच के आदेश दिए। ईडी और सीबीआई ने दावा किया कि इस नीति से निजी कंपनियों को ग़लत फायदा पहुंचाया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुक़सान हुआ और भ्रष्टाचार हुआ।

सिसोदिया की गिरफ़्तारी

मनीष सिसोदिया को सबसे पहले 26 फ़रवरी 2023 को सीबीआई ने गिरफ्तार किया, फिर 9 मार्च 2023 को ईडी ने। सीबीआई की एफ़आईआर में कहा गया कि सिसोदिया और अन्य ने 2021-22 की शराब नीति में सिफारिशें कीं और फ़ैसले लिए, बिना सक्षम अधिकारी की मंजूरी के, ताकि लाइसेंसधारकों को अनुचित फायदा मिले। एजेंसी ने दावा किया कि सिसोदिया ने जाँच में सहयोग नहीं किया और गोलमोल जवाब दिए।

केजरीवाल की गिरफ़्तारी

अरविंद केजरीवाल को 26 जून 2024 को सीबीआई ने गिरफ्तार किया, जब वह ईडी की कस्टडी में थे। केजरीवाल कुल दो बार जेल में रहे। उन्हें 13 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई मामले में जमानत दी, जबकि ईडी मामले में पहले अंतरिम जमानत मिली थी।
बहरहाल, अब मामला हाई कोर्ट में है और आगे की सुनवाई में और फैसले आएंगे। यह केस राजनीतिक रूप से काफी चर्चा में रहा है।