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दिल्ली एमसीडी चुनाव तारीख की घोषणा टली तो आप ने लगाए बड़े आरोप

दिल्ली में राज्य चुनाव आयोग ने बुधवार को नगरपालिका चुनावों की तारीख़ों की घोषणा को स्थगित कर दिया है। आम आदमी पार्टी ने चुनाव की तारीख़ों की घोषणा को टालने पर बड़े आरोप लगाए हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग बीजेपी के दबाव में आ गया है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि यह 'केंद्र के इशारे पर' किया जा रहा है।

इसको लेकर मनीष सिसोदिया ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस की और बीजेपी पर कई आरोप लगाए। मनीष सिसोदिया ने कहा है कि हार के डर से बीजेपी ने चुनाव आयोग के ज़रिये चुनाव टाल दिए।

मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने केंद्र की बीजेपी सरकार के आगे घुटने टेक दिए हैं। उन्होंने कहा, 'यह देश के लोकतंत्र में एक दुर्भाग्यपूर्ण दिन है और यह हमारे देश की आज़ादी के इतिहास में पहली बार हो रहा है। निष्पक्ष और समय पर चुनाव कराना चुनाव आयोग की ज़िम्मेदारी है, लेकिन उसने बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के इशारे पर एमसीडी चुनावों की तारीखें तय करने से इनकार किया है। आज चुनाव आयोग ने एमसीडी चुनावों की तारीख़ों की घोषणा करने के लिए मीडिया के सभी सदस्यों को शाम 5 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए बुलाया था। लेकिन इससे पहले केंद्र सरकार ने उस पर दबाव बनाया और वे पीछे हट गए और खुद को रोक लिया। यह लोकतंत्र के लिए बहुत ख़तरनाक है।'

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मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि केंद्र शहर के तीनों नगर निगमों को एकजुट करने पर काम कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार इस घोषणा को समायोजित करने के लिए एमसीडी चुनावों की घोषणा को आगे बढ़ाया गया है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को ट्वीट किया कि दिल्ली में नगर निगम के चुनाव स्थगित कर दिए गए हैं क्योंकि बीजेपी ने हार स्वीकार कर ली है और वह भाग रही है। उन्होंने कहा है कि आप के सर्वे में अभी 272 में से 250 सीट आ रही थी, लेकिन अब 260 से ज़्यादा आएँगी।

इस बीच दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता हरीश खुराना ने कहा कि बीजेपी चुनाव से कभी नहीं डरती। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, 'हम हमेशा चुनाव के लिए तैयार हैं; आज हो, कल हो, जब भी होगा, हम जीतेंगे। अब यह चुनाव आयोग को तय करना है कि इसे कब कराना है। लेकिन यह भी सच है कि आज तीनों निगमों की दुर्दशा का कारण अरविंद केजरीवाल का एमसीडी के प्रति सौतेला व्यवहार है, जो फंड नहीं दे रहे हैं।'
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