loader

न्यूज़ 24 के ओपिनियन पोल में 'आप' को 48-53 सीटें मिलने का दावा

दिल्ली चुनाव में हाल के घटनाक्रमों और साम्प्रदायिक तौर पर ध्रुवीकरण करने की कोशिश के बावजूद मतदाताओं पर ज़्यादा असर पड़ता नहीं दिख रहा है। चुनाव प्रचार ख़त्म होने से एक दिन पहले न्यूज़ 24 और ISOMES के ओपिनियन पोल में आम आदमी पार्टी यानी आप की बड़ी जीत होने का दावा किया गया है। बीजेपी और कांग्रेस की हालत ख़राब बताई गई है। ताज़ा सर्वे से तो लगता है कि नेताओं के भड़काऊ बयान, शाहीन बाग़ के नाम पर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण और चुनावी आक्रामकता के बावजूद चुनावी नतीजे प्रभावित नहीं होंगे। 

बता दें कि दिल्ली में प्रचार 6 फ़रवरी को ख़त्म हो जायेगा। 8 फ़रवरी को मतदान होगा और 11 फ़रवरी को नतीजे आयेंगे। लेकिन इससे पहले आए सर्वे संभावित नतीजों की तरफ़ इशारा करते हैं।

ताज़ा ख़बरें

न्यूज़ 24 और ISOMES के ताज़ा ओपिनियन पोल के मुताबिक़ आप को 48-53 सीटें, बीजेपी को 15-20, कांग्रेस को 0-2 सीटें मिल सकती हैं। हर सर्वे में कांग्रेस की हालत ख़राब आ रही है। वैसे, बीजेपी की स्थिति भी ठीक नहीं है, लेकिन कांग्रेस की अपेक्षा बेहतर है। दो दिन पहले ही आए टाइम्स नाउ-इपसास के सर्वे में भी कहा गया था कि ‘आप’ इस बार दिल्ली में 54-60 सीटें जीत सकती हैं जबकि बीजेपी को 10 से 14 सीटें मिलने का अनुमान है। कांग्रेस बड़ी मेहनत के बाद भी 0 से 2 सीटों पर ही क़ब्ज़ा जमा सकती है। इस लिहाज से दोनों ओपिनियन पोल में ज़्यादा फर्क पड़ता नहीं दिख रहा है।

दिल्ली से और ख़बरें
इन ओपिनियन पोल के बाद सवाल उठता है कि क्या दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करिश्मा काम नहीं कर रहा है? क्या इतने तिकड़म के बावजूद बीजेपी दिल्ली में एक बार फिर बुरी हार की तरफ़ बढ़ रही है? क्या आम आदमी पार्टी 2015 के विधानसभा चुनाव जैसा प्रदर्शन दोहरा पायेगी? और क्या नागरिकता क़ानून भी दिल्ली में बीजेपी को नहीं बचा पायेगा? 

न्यूज़ 24 के ताज़ा ओपिनियन पोल में शाहीन बाग़ वाले घटनाक्रम से पहले का मूड भी दिखाया गया है। सर्वे के अनुसार, 20-24 जनवरी तक कराए गए सर्वे के अनुसार, 39 फ़ीसदी लोगों ने बिजली-पानी को मुद्दा माना जबकि राष्ट्रवाद को 32 फ़ीसदी और भ्रष्टाचर को 29 फ़ीसदी लोगों ने मुद्दा माना है। 

केजरीवाल सरकार के काम को लेकर भी एक सर्वे किया गया है। इस सर्वे में सवाल पूछा गया है कि केजरीवाल सरकार के काम को कैसा मानते हैं? इसके जवाब में 53 फ़ीसदी लोगों ने केजरीवाल के काम को 'अच्छा' बताया, 32 फ़ीसदी लोगों ने 'औसत' और 15 फ़ीसदी लोगों ने 'ख़राब' बताया। 

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
क़मर वहीद नक़वी
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

दिल्ली से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें