दिल्ली जल बोर्ड यानी डीजेबी के कथित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर घोटाले में दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच यानी एसीबी ने आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी, शर्तों में हेरफेर और रिश्वतखोरी के ज़रिए एक निजी कंपनी को फायदा पहुँचाया गया।

गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों में दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय, पूर्व कॉन्ट्रैक्चुअल कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव, एएन एंटरप्राइजेज के मालिक नागेंद्र यादव, यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के मालिक राजा कुमार कुर्रा और सृजनहार के मालिक पंकज वर्मा शामिल हैं।
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यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के तहत संचालित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों यानी एसटीपी के आधुनिकीकरण और क्षमता बढ़ाने के लिए जारी किए गए टेंडरों से जुड़ा है। एसीबी के अनुसार, वर्ष 2024 में दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि टेंडर की शर्तें इस तरह तैयार की गईं कि एक विशेष तकनीकी कंपनी यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को फायदा मिल सके। जांच एजेंसी का कहना है कि तकनीकी मानकों और पात्रता की शर्तों में कथित रूप से बदलाव कर प्रतिस्पर्धा को सीमित किया गया।

किन परियोजनाओं पर उठे सवाल?

जांच के दायरे में दिल्ली के कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों के अपग्रेडेशन और क्षमता विस्तार के लिए जारी किए गए टेंडर शामिल हैं। इनमें पप्पन कलां, निलोठी, नजफगढ़, केशोपुर, कोरोनेशन पिलर, नरेला, रोहिणी और कोंडली स्थित एसटीपी परियोजनाएँ शामिल हैं। एसीबी का आरोप है कि प्रस्तावित पायलट स्टडी नहीं कराई गई और तकनीकी शर्तों में ऐसे बदलाव किए गए जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।

एंटी करप्शन ब्रांच का दावा है कि जांच के दौरान मिले इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से पता चला कि टेंडर जारी होने से पहले ही निजी कंपनियों, सरकारी अधिकारियों और कथित बिचौलियों के बीच दस्तावेजों, ड्राफ्ट और संशोधनों का आदान-प्रदान किया जा रहा था।

जांच एजेंसी के मुताबिक, टेंडर से जुड़े संशोधन और तकनीकी शर्तों पर पहले आपसी चर्चा हुई और बाद में उन्हें आधिकारिक दस्तावेजों में शामिल किया गया।

1.52 करोड़ रुपये की रिश्वत का आरोप

एसीबी का आरोप है कि इस मामले में पैसों का लेन-देन कमीशन और रिश्वत के रूप में हुआ। जांच एजेंसी के अनुसार, एएन एंटरप्राइजेज के माध्यम से बड़ी रकम विभिन्न खातों में भेजी गई। आरोप है कि उस समय दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ रहे उदित प्रकाश राय और उनके रिश्तेदारों के बैंक खातों में करीब 1.52 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। एसीबी का दावा है कि बाद में इस रकम का इस्तेमाल अचल संपत्ति खरीदने में किया गया।

कंपनियों-अधिकारियों में मिलीभगत?

जांच एजेंसी का कहना है कि उसके पास ऐसे डिजिटल साक्ष्य हैं, जिनसे निजी कंपनियों और सरकारी अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत का संकेत मिलता है। एसीबी के अनुसार, राजा कुमार कुर्रा, नागेंद्र यादव और अंकित श्रीवास्तव के बीच हुई बातचीत में टेंडर की शर्तों, संशोधनों और अन्य तकनीकी पहलुओं पर चर्चा के सबूत मिले हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन बदलावों का उद्देश्य एक खास कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाना था।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने भी वर्ष 2025 में सत्येंद्र जैन और अन्य लोगों के खिलाफ लगभग 17.7 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। ये टेंडर वर्ष 2022 में जारी किए गए थे, जब सत्येंद्र जैन दिल्ली सरकार में जल मंत्री थे।

एसीबी ने बताया कि छहों आरोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया है। अब एजेंसी कथित टेंडर हेरफेर, धन के पूरे लेन-देन और इस मामले में अन्य लोगों की संभावित भूमिका की भी जांच कर रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और अदालत में पेशी के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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2022 में गिरफ़्तार किए गए थे सत्येंद्र जैन

सत्येंद्र जैन को पहली बार 30 मई 2022 को प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया था। यह मामला सीबीआई की 2017 की एफआईआर पर आधारित था, जिसमें उन पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप था। आरोप था कि 2015 से 2017 के बीच उन्होंने शेल कंपनियों और हवाला के जरिए करीब 4.81 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की थी।

इस मामले में अभी तक अंतिम फैसला नहीं आया है। आरोप अभी तक साबित नहीं हुए हैं। मामला अभी भी लंबित है। ट्रायल पूरा नहीं हुआ है। 18 अक्टूबर 2024 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि वे काफी लंबे समय से जेल में हैं और ट्रायल में देरी हो रही है। जमानत के बाद वे तिहाड़ जेल से बाहर आ गए।