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पलट गया नक़ाबपोश, बोला- चंगुल से छूटने के लिए झूठ बोला

किसान नेताओं ने शुक्रवार को जिस नक़ाबपोश को पकड़कर मीडिया के सामने पेश किया था, वह अपनी पहले कही हुई बातों से पलट गया है। रात को हुई प्रेस कॉन्फ्रेन्स में नक़ाबपोश ने कहा था, ‘हमारी टीम के 60 लोग किसान ट्रैक्टर परेड में आएंगे, वे सभी पुलिस की वर्दी में होंगे। हमें चार लोगों की फ़ोटो दी गई है, ये लोग स्टेज पर होंगे, इन्हें शूट करने की योजना है।’

लेकिन अब उसका कहना है कि उससे जैसा कहा गया था, वह वैसा ही बोल रहा था और उसने यह सब किसानों के चंगुल से छूटने के लिए किया। उसने ये भी कहा कि उसे दारू पिलाई गई और बुरी तरह मारा गया। 

नक़ाबपोश ने कहा था, ‘जिसने हमें सिखाया है, वो राई थाने में एक पुलिस अफ़सर है। हमारे साथ और भी लोग हैं, जो अभी पकड़े नहीं गए हैं और उनकी टीम में शामिल हर शख़्स को 10 हज़ार रुपये दिए गए थे। 

इस लड़के का नाम योगेश सिंह है और उसका कहना है कि वह प्रेस कॉन्फ्रेन्स में झूठ बोल रहा था। पिछले वाले वीडियो में योगेश ने मुंह ढका हुआ था जबकि इस वीडियो में उसका चेहरा साफ दिख रहा है। 

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‘उल्टा लटकाकर बेल्टों से मारा’

सोनीपत का रहने वाले योगेश कहता है, ‘19 जनवरी को शाम को मैं कुंडली के इलाक़े से जा रहा था। मैंने उनसे ये झूठ बोला कि कोई लड़की को छेड़ रहा है तो उनको ये लगा कि मैं लड़की को छेड़ रहा हूं। इसके बाद उन्होंने कैंप में ले जाकर मेरी पैंट उताकर मुझे मारा और फिर मुझे ट्रॉली में उल्टा लटकाकर बेल्टों से मारा।’ योगेश यहां पर आंदोलन कर रहे किसानों के बारे में बात कर रहा है। 

योगेश कहता है कि उससे कहा गया कि जो वे लोग कहेंगे, उसे वही करना और कहना होगा। योगेश के मुताबिक़, उन्होंने उसे खाना खिलाया, दारू पिलाई, फिर मारा और उसका वीडियो भी बनाया। 

योगेश ने कहा, ‘मेरे साथ चार और लड़के पकड़े गए थे। एक का नाम सागर था। सागर ने कहा था कि उसे बेवजह मार रहे हैं। अगले दिन जब मैं उठा तो उन्होंने मुझसे कहा कि हमने उसे मार दिया है। अब तुझे छूटना है या नहीं और जैसा हम कहेंगे वैसा करना है तुझे।’ 

योगेश कहता है, ‘मैंने उनसे कहा कि मुझे पुलिस के हवाले कर दो लेकिन उन्होंने कहा कि हम किसी के हवाले नहीं करेंगे और मार-काट के फेंक देंगे और किसी को पता भी नहीं लगेगा। उन्होंने जिस दूसरे लड़के को मारा, वो अधमरी हालत में है।’
उसने आगे कहा, ‘फिर वहां दो-चार लड़के हैं, उन्होंने मुझे दारू पिलाकर फिर मारा और मुझसे कहा कि जैसा हम तुझे बोलेंगे तुझे प्रेस के आगे वही बोलना है। फिर मैंने एक स्टोरी बनाई और जैसा उन्होंने बोला, फिर मैंने वैसा ही किया।’ उन्होंने मुझसे कहा कि अगर बोल देगा तो छोड़ देंगे।  
योगेश की मां ने कहा है कि उनका बेटा 20 जनवरी को घर से यह कहकर निकला था कि वह काम पर जा रहा है और उसने कहा था कि वह जल्दी घर आ जाएगा लेकिन बजाए इसके उनके पास पुलिस की कॉल आई और उन्होंने योगेश के बारे में बताया। योगेश का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। 

किसान आंदोलन पर देखिए वीडियो- 

किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने कहा था कि इस शख़्स को तब दबोचा गया जब उसने किसान आंदोलनकारियों को यह कहकर बदनाम करने की कोशिश की कि वे धरना स्थल के नज़दीक एक लड़की को छेड़ रहे थे। दल्लेवाल ने कहा कि जब हमने उसे पूछताछ की तो उसने स्वीकार किया कि वह सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना चाहता था। इसके बाद उसने सारी बातें उगल दीं। 

पुलिस ने आरोपों को बकवास बताया 

सोनीपत के राई पुलिस स्टेशन के एसएचओ विवेक मलिक ने ‘इंडिया टुडे’ से कहा कि उन्होंने इस शख़्स की सारी बातों को सुना है और जिस पुलिस अफ़सर का नाम उसने लिया है, ऐसा कोई अफ़सर राई पुलिस स्टेशन में नहीं है। उन्होंने कहा कि उसके द्वारा बताई गई यह कथित योजना बेमतलब है और पुलिस की किसान आंदोलन में कोई भूमिका नहीं है। 

‘परेड शांतिपूर्ण रहेगी’

दूसरी ओर, किसानों ने कहा है कि वे दिल्ली की बाहरी रिंग रोड पर ट्रैक्टर परेड निकालेंगे और गणतंत्र दिवस समारोह में किसी भी तरह की रुकावट पैदा नहीं करेंगे। किसान नेताओं ने कहा है कि उनकी परेड शांतिपूर्ण रहेगी। परेड के रूट को लेकर किसानों की पुलिस के साथ बातचीत जारी है। 

किसान संयुक्त मोर्चा की ओर से जारी की गई प्रेस रिलीज में कहा गया है कि परेड में शामिल ट्रैक्टर्स पर भारत का तिरंगा और किसानों की यूनियनों के झंडे लगे होंगे। किसी भी राजनीतिक दल के झंडे लगाने की अनुमति नहीं होगी। परेड में इस आंदोलन में शहीद हुए लोगों के परिवार के सदस्य, सेना में रह चुके अफ़सर और नामी खिलाड़ी भी शामिल होंगे। 

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परेड पर पुलिस फ़ैसला ले: कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट दिल्ली पुलिस से कह चुका है कि वह 26 जनवरी को होने वाली किसान ट्रैक्टर परेड को लेकर दायर अपनी याचिका को वापस ले ले। दिल्ली पुलिस ने याचिका में किसान ट्रैक्टर परेड पर रोक लगाने की मांग की थी। पुलिस का कहना था कि परेड होने से गणतंत्र दिवस समारोह के आयोजन में अड़चन आएगी और इससे दुनिया भर में देश की छवि ख़राब होगी। 

अदालत ने कहा है कि पुलिस को ही इस बारे में फ़ैसला करना होगा कि परेड की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं। अदालत ने कहा कि पुलिस के पास इस बारे में फ़ैसला लेने का पूरा अधिकार है और वह इस मामले में दख़ल नहीं दे सकती। 

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