लालकृष्ण आडवाणी और डाॅ. मुरलीमनोहर जोशी बीजेपी के अध्यक्ष रहे हैं और अटल बिहारी वाजपेयी के साथ इन्हें बीजेपी की त्रिमूर्ति समझा जाता रहा है। लेकिन पहले तो इन्हें ‘मार्गदर्शक मंडल’ में रखा गया था, अब मोदी ने दोनों को बाहर का मार्ग दिखा दिया है।
नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ही इन दोनों नेताओं, लालकृष्ण आडवाणी और मुरलीमनोहर जोशी जी को ‘मार्गदर्शक मंडल’ में रख दिया। मार्गदर्शक याने मार्ग देखनेवाला। दिखानेवाला नहीं। अब मोदी ने दोनों को बाहर का मार्ग दिखा दिया।
आडवाणी और जोशी जी ने हवा का रुख़ पिछले पाँच साल में क्यों नहीं पहचाना? उन्हें चाहिए था कि वे ख़ुद ही पार्टी के सारे पद छोड़ देते। लेकिन राजनीति है ही ऐसी बला! वह नाज़ुक मिजाज लोगों की खाल को भी गेंडे की तरह मोटी बना देती है।