VHP ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि जाने-माने ग़ज़लकार और पत्रकार अज़ीज़ टंकारवी की कविता में भगवान राम और मीराबाई के बारे में आपत्तिजनक बातें कही गई हैं। इस रचना की लगभग 50 प्रतियां, जो पहले ही प्रकाशित हो चुकी थीं, वापस ले ली गई हैं।
गुजरात सरकार ने विश्व हिंदू परिषद की आपत्ति के बाद जाने-माने ग़ज़लकार और पत्रकार अज़ीज़ टंकारवी की कविता को अपनी वार्षिक साहित्यिक पत्रिका 'गुजरात दीपोत्सवी अंक' से हटा दिया है। VHP ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि कविता में भगवान राम और मीराबाई के बारे में आपत्तिजनक संदर्भ हैं और इससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं। ऑनलाइन संस्करण में तंकारवी की रचना की जगह अब कवि प्रकाश जलाल की 'जोइये' शीर्षक वाली कविता को शामिल कर लिया गया है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 21 अक्टूबर को इस वार्षिक साहित्यिक प्रकाशन का विमोचन किया था। लेकिन इसके दो दिन बाद 23 अक्टूबर को विश्व हिंदू परिषद यानी वीएचपी के गुजरात क्षेत्र के सचिव अश्विन पटेल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कविता को हटाने की मांग की। वीएचपी का आरोप था कि कविता में भगवान राम और 16वीं सदी की कृष्ण भक्त कवयित्री मीराबाई के बारे में आपत्तिजनक बातें कही गई हैं। संगठन ने दावा किया कि इससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने वितरण के लिए तैयार की गई कम से कम 50 प्रतियां वापस ले लीं। गुजरात VHP के प्रवक्ता हितेंद्रसिंह राजपूत ने पीटीआई से कहा कि टंकारवी की कविता को हटा दिया गया है। राजपूत ने कहा, 'हमें खुशी है कि राज्य सरकार ने हमारे अनुरोध पर तुरंत कार्रवाई की और दिवाली पत्रिका से उस विवादित कविता को हटा दिया।'
VHP ने पत्र में क्या मांग की?
वीएचपी के गुजरात क्षेत्र के सचिव अश्विन पटेल ने 23 अक्टूबर को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने अज़ीज़ टंकारवी की कविता को धार्मिक भावनाएँ आहत करने वाला बताया था। उनके मुताबिक संगठन को कुछ पाठकों की ओर से भी इस कविता के खिलाफ शिकायतें मिली थीं। पत्र में दावा किया गया कि कविता में भगवान राम और मीराबाई के संदर्भ आपत्तिजनक हैं।अश्विन पटेल ने मुख्यमंत्री से मांग की कि कविता को पत्रिका से हटाया जाए और इसे प्रकाशित करने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कवि के साथ-साथ उन लोगों पर भी कार्रवाई की मांग की जिन्होंने पत्रिका में कविता को शामिल करने की मंजूरी दी थी।
पत्रिका से अज़ीज़ टंकारवी की कविता 'प्रेम मां ना होय काईं एवी शरत' हटाई गई है। गुजराती शीर्षक का अर्थ है- प्रेम में कोई ऐसी शर्त नहीं हो सकती। यह कविता इस साल के 'गुजरात दीपोत्सवी अंक' के पृष्ठ संख्या 389 पर प्रकाशित की गई थी।
क्या है 'गुजरात दीपोत्सवी अंक'?
'गुजरात दीपोत्सवी अंक' गुजरात सरकार के सूचना एवं प्रसारण विभाग की ओर से दिवाली के अवसर पर प्रकाशित होने वाला वार्षिक साहित्यिक अंक है। यह 400 से अधिक पृष्ठों की पत्रिका है, जिसमें राज्य के अलग-अलग हिस्सों से लेखकों और साहित्यकारों की रचनाएं शामिल की जाती हैं। इसमें गुजराती भाषा की साहित्यिक सामग्री प्रकाशित होती है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 21 अक्टूबर को इस साल के अंक का विमोचन किया था। लेकिन वीएचपी की आपत्ति के बाद इसमें शामिल एक कविता को हटाने का फ़ैसला किया गया। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कविता को हटाने की मांग केवल उसकी सामग्री पर आपत्ति तक सीमित नहीं थी। वीएचपी ने कवि और कविता को मंजूरी देने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की थी।
अज़ीज़ टंकारवी कौन हैं?
अज़ीज़ टंकारवी गुजरात के जाने-माने ग़ज़लकार और पत्रकार हैं। वह भरूच से जुड़े लेखक हैं और गुजराती साहित्य में उनकी पहचान है। उनकी कविता को राज्य सरकार की वार्षिक साहित्यिक पत्रिका में जगह दी गई थी। लेकिन वीएचपी की आपत्ति के बाद इसे हटा दिया गया। द इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि इस विवाद पर टंकारवी की प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। इसलिए कविता हटाए जाने और उस पर लगाए गए आरोपों को लेकर उनका पक्ष उपलब्ध नहीं है।
इस घटनाक्रम में फिलहाल इतना साफ़ है कि वीएचपी ने कविता पर आपत्ति जताई, मुख्यमंत्री से इसे हटाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और इसके बाद सरकार ने कविता को पत्रिका से हटा दिया।