गुजरात में समान नागरिक संहिता यानी UCC विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता को कानून बनाने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। गुजरात सरकार के जारी गजट के अनुसार राष्ट्रपति ने 17 सितंबर को इस कानून को मंजूरी दी थी। हालाँकि, क़ानून को मंजूरी मिलने के बावजूद इसके प्रावधान तत्काल लागू नहीं होंगे। राज्य सरकार राजपत्र में अलग अधिसूचना जारी करके इसके लागू होने की तारीख़ तय करेगी। गुजरात विधानसभा ने मार्च में इस विधेयक को पारित किया था।

गुजरात का यह क़ानून राज्य के सभी निवासियों के लिए शादी, तलाक, विरासत और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान क़ानूनी व्यवस्था बनाने का प्रावधान करता है। इसके तहत सभी शादियों का 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने पर 10 हज़ार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। एक से अधिक शादी करने पर भी रोक लगाई गई है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में घोषणा की थी कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सभी एनडीए शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
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लागू करने की तारीख सरकार तय करेगी

गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च 2026 को सात घंटे से अधिक चली बहस के बाद समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया था। इस कानून का मसौदा सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया था।

गुजरात सरकार ने 2022 में ही राज्य में समान नागरिक संहिता की जरूरत और उसे लागू करने की संभावना पर विचार करने के लिए समिति बनाने की मंजूरी दी थी। बाद में जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की गई। समिति को 45 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने के लिए कहा गया था। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून को संवैधानिक प्रक्रिया का अंतिम अनुमोदन मिल गया है। इसके लागू होने की तारीख राज्य सरकार की अधिसूचना से तय होगी।

गुजरात समान नागरिक संहिता का दायरा शादी, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप और उनसे जुड़े अन्य मामलों तक फैला है। इसके प्रावधान धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान कानूनी व्यवस्था बनाने का प्रयास करते हैं।

गुजरात में UCC के तहत क्या-क्या बदलेगा?

  • गुजरात में सभी शादियों का रजिस्ट्रेशन 60 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य होगा। यह नियम धर्म की परवाह किए बिना लागू होगा।
  • यदि कोई व्यक्ति निर्धारित समय में शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं कराता है, तो उस पर 10 हज़ार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
  • कानून में एक से अधिक विवाह यानी बहुविवाह पर रोक लगाई गई है। इसका अर्थ है कि किसी व्यक्ति को एक समय में एक से अधिक वैवाहिक संबंध रखने की अनुमति नहीं होगी।
  • UCC के तहत बेटों और बेटियों को संपत्ति और विरासत में समान अधिकार देने का प्रावधान है। यह व्यवस्था सभी धर्मों के लोगों पर लागू होगी।
  • गुजरात के नए कानून में लिव-इन रिलेशनशिप को भी शामिल किया गया है। इसके तहत लिव-इन संबंधों का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा।
  • कानून में ऐसे संबंधों को समाप्त करने के लिए भी प्रक्रिया निर्धारित की गई है। यानी लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी एक कानूनी ढांचा तैयार किया गया है।

किन लोगों को कानून से छूट मिलेगी?

गुजरात UCC के प्रावधान पूरे राज्य में लागू होंगे, लेकिन कुछ समुदायों को इससे छूट दी गई है। अनुसूचित जनजातियों और उन समूहों को कानून के दायरे से बाहर रखा गया है, जिनके पारंपरिक अधिकारों को संविधान के तहत संरक्षण प्राप्त है। यह छूट इसलिए अहम है क्योंकि जनजातीय समुदायों की अपनी सामाजिक और पारंपरिक व्यवस्थाएं हैं। कानून में उनके संवैधानिक संरक्षण को ध्यान में रखा गया है। यह कानून गुजरात के उन निवासियों पर भी लागू होगा, जो राज्य की सीमा से बाहर रहते हैं।

आजादी के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य उत्तराखंड बना था। उत्तराखंड ने 2024 में UCC कानून पारित किया और जनवरी 2025 में इसे लागू कर दिया। उत्तराखंड का कानून भी धर्म की परवाह किए बिना राज्य के निवासियों पर लागू होता है। इसमें बहुविवाह और बाल विवाह पर रोक तथा अनुसूचित जनजातियों को छूट देने जैसे प्रावधान हैं।

अब गुजरात दूसरा राज्य बन गया है जिसने समान नागरिक संहिता को कानून का रूप दिया है। गुजरात में कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन इसके प्रभावी होने के लिए राज्य सरकार की अधिसूचना का इंतजार है।

अमित शाह की घोषणा क्या?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू कर दी जाएगी। शाह की इस घोषणा से साफ़ है कि यूसीसी बीजेपी और एनडीए के राजनीतिक एजेंडे में प्रमुख स्थान रखता है।

बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के अपने घोषणा-पत्र में भी समान नागरिक संहिता लागू करने का वादा किया था। पार्टी लंबे समय से इसे अपने प्रमुख मुद्दों में शामिल करती रही है। यूसीसी का उद्देश्य शादी, तलाक, विरासत और दूसरे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान क़ानूनी व्यवस्था तैयार करना है।


उत्तराखंड के बाद गुजरात में कानून को मंजूरी मिलने के साथ बीजेपी शासित अन्य राज्यों में भी UCC को लेकर चर्चा और प्रक्रिया जारी है। असम और मध्य प्रदेश में इस दिशा में काम आगे बढ़ाया गया है। वहीं महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में समिति गठित करने या मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े कदम उठाए गए हैं।
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UCC पर बहस का दायरा अब और बढ़ेगा

समान नागरिक संहिता का मुद्दा लंबे समय से देश की राजनीतिक और संवैधानिक बहस का हिस्सा रहा है। इसके समर्थक इसे व्यक्तिगत क़ानूनों में समानता और एकरूपता की दिशा में क़दम बताते हैं, जबकि इसके विभिन्न प्रावधानों को लेकर सामाजिक परंपराओं, धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े सवाल भी उठते रहे हैं।

गुजरात में राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह बहस अब कानून के वास्तविक क्रियान्वयन से भी जुड़ गई है। राज्य सरकार की अधिसूचना के बाद यह साफ़ होगा कि रजिस्ट्रेशन, विवाह, तलाक, विरासत और लिव-इन संबंधों से जुड़े प्रावधान जमीन पर किस तरह लागू किए जाते हैं। गुजरात का कानून तब आया है जब केंद्र सरकार और बीजेपी ने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सभी एनडीए शासित राज्यों में UCC लागू करने का लक्ष्य सामने रखा है।