हरियाणा में 36 बिरादरी की पंचायत का नजारा
36 बिरादरी का सामाजिक महत्वः चुनावी मौसम में, जब भी कोई उम्मीदवार किसी गांव में पहुंचता है, तो "36 बिरादरी" की ओर से प्रमुख ग्रामीणों द्वारा उसका स्वागत किया जाता है। इस श्रेणी की जातियों और समुदायों में ब्राह्मण, वैश्य, जाट, गुर्जर, राजपूत, पंजाबी (हिंदू), सुनार, सैनी, अहीर, सैनी, रोर, कुम्हार, मुस्लिम शामिल हैं। लगभग आधी अनुसूचित जातियाँ (एससी) भी इसमें शामिल हैं।
प्रोफेसर चहल के अनुसार, 36 बिरादरी की अवधारणा का व्यापक रूप से पंजाब (भारत और पाकिस्तान), हरियाणा और राजस्थान दोनों की संस्कृतियों में उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा- “सामाजिक रूप से, बिरादरी वैवाहिक संबंध बनाने, अंतर-जातीय विवादों को निपटाने और अन्य सामाजिक मुद्दों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह अपने लोगों को सामाजिक सुरक्षा और पहचान और सम्मान की भावना भी प्रदान करता है। इसलिए, लोगों में अपनी बिरादरी के साथ जुड़ाव और अपनेपन की गहरी भावना होती है।''