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हरियाणा में चुनावी नतीजे तय करेंगे विरासत की राजनीति की दिशा

उत्तरी भारत के पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश से पहले हरियाणा में छठे चरण में 12 मई को मतदान होने जा रहा है। यहाँ मुख्य रूप से कांग्रेस, बीजेपी, इनेलो, आप व जेजेपी के बीच मुक़ाबला है। लेकिन मौजूदा चुनाव हरियाणा के पाँच बड़े राजनैतिक परिवारों की दशा और दिशा तय करेंगे। इसी आधार पर अगले विधानसभा चुनावों के लिये राजनीति तय होगी।

प्रदेश में बीजेपी के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सत्ता में हैं, लेकिन लोकसभा चुनावों में प्रदेश के तीन लाल, ताऊ देवीलाल, बंसी लाल और भजन लाल के अलावा पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के परिवार की साख दाँव पर लगी हुई है।

इन पाँच परिवारों के सामने विरासत की सियासत बचाने की बड़ी चुनौती है। ताऊ देवीलाल का परिवार भले ही दो अलग-अलग पार्टियों के बैनर तले चुनाव मैदान में हो, लेकिन राजनीति उनसे ही विरासत में मिली है।

देवीलाल की चौथी पीढ़ी मैदान में

देवीलाल की चौथी पीढ़ी से इनेलो के चुनाव चिन्ह पर कुरुक्षेत्र के चुनावी रण में अभय सिंह चौटाला के बेटे अर्जुन चौटाला कूदे हैं। उनकी ही चौथी पीढ़ी के सांसद दुष्यंत चौटाला और उनके छोटे भाई दिग्विजय चौटाला जननायक जनता पार्टी के निशान पर चुनाव मैदान में हैं। कुरुक्षेत्र का चुनावी महाभारत अर्जुन चौटाला के लिए आसान नहीं है। यहाँ बीजेपी ने राज्यमंत्री नायब सैनी को जिताने के लिए पूरी ताक़त लगा दी है। अर्जुन के सामने ख़ुद को साबित करने के साथ ही इनेलो को ज़िंदा रखने की भी चुनौती है।

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वहीं, सांसद दुष्यंत चौटाला हिसार में बेहद कड़े मुक़ाबले में फँसे हुए हैं। यहाँ उनके सामने भजनलाल परिवार की तीसरी पीढ़ी से भव्य बिश्नोई और छोटू राम के नाती चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह हैं। यहाँ से तीनों राजनीतिक परिवारों में से एक ही के सिर ताज सजेगा, बाक़ी दो परिवारों की पारिवारिक सियासत को फ़िलहाल विराम लगेगा। तीनों ही परिवार जीत हासिल करने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं।

अगर ये पाँचों परिवार इस बार चुनावी रण में ढेर हुए तो दिल्ली की सियासत में इनके रुतबे पर असर पड़ना तय है। बेटे बृजेंद्र के लिए तो चौधरी बीरेंद्र सिंह ने अपना राजनीतिक करियर भी दाँव पर लगा दिया है। अग्निपरीक्षा तो नई नवेली जेजेपी के कर्णधारों दुष्यंत और दिग्विजय की भी है।

उधर, इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला की सोनीपत में राह बेहद मुश्किल नज़र आ रही है। यहाँ उनका मुक़ाबला पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और बीजेपी सांसद रमेश कौशिक से है। दिग्विजय पर यहाँ से ख़ुद को साबित करने का भारी दबाव है। जींद उप-चुनाव में पहले बीजेपी से मात खा चुके हैं। हालाँकि उनकी ओपनिंग अच्छी रही और उन्होंने कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला को तीसरे स्थान पर धकेल दिया था।

हुड्डा परिवार के सामने चुनौती

लोकसभा के चुनावी रण में कांग्रेस के बाप-बेटा ताल ठोकने वाले भूपेंद्र सिंह हुड्डा सोनीपत में व उनके सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा रोहतक में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा को राजनीति अपने पिता रणवीर हुड्डा से विरासत में मिली तो दीपेंद्र को पिता भूपेंद्र हुड्डा से। दोनों के सामने ही चुनौती विरासत की सियासत को बचाने की है। चूँकि, बीजेपी इन्हें हराने में कोई कोर-कसर छोड़ने वाली नहीं है। 2014 के चुनाव में तो दीपेंद्र हुड्डा ने विरासत की सियासत बचा ली थी।

इसी तरह, बंसी लाल परिवार से उनकी पोती श्रुति चौधरी मैदान में हैं। श्रुति 2009 में सांसद रह चुकी हैं, जबकि 2014 में हार गई थीं। अब 2019 में उन्हें फिर ख़ुद को साबित करना होगा। भिवानी-महेंद्रगढ़ बंसीलाल परिवार का गढ़ रहा है।

223 प्रत्याशियों में मुक़ाबला

हरियाणा में लोकसभा चुनाव में अब 223 प्रत्याशी मैदान में हैं। जिनमें 211 पुरुष और 12 महिला प्रत्याशी हैं। अंबाला लोकसभा क्षेत्र से 18, कुरुक्षेत्र से 24, सोनीपत से 29, भिवानी- महेंद्रगढ़ से 21, गुरुग्राम से 24, सिरसा से 20, हिसार से 26, करनाल से 16 और फ़रीदाबाद से 27 उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे। इस लोकसभा चुनाव में सोनीपत लोकसभा क्षेत्र से सबसे अधिक 29 तथा करनाल से सबसे कम 16 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। फ़िलहाल बीजेपी की स्थिति दूसरे दलों से बेहतर है।

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बीजेपी

बीजेपी ने सोनीपत से रमेश चंद्र कौशिक, अंबाला से रतनलाल कटारिया, फ़रीदाबाद से कृष्ण पाल, गुरुग्राम-रेवाड़ी से इंद्रजीत सिंह, रोहतक से डॉ. अरविंद शर्मा, हिसार से बृजेंद्र सिंह, कुरुक्षेत्र से नायब सिंह सैनी, करनाल से संजय भाटिया, सिरसा से सुनीता दुग्गल और  भिवानी-महेंद्रगढ़ से धर्मवीर सिंह को मैदान में उतारा है।

कांग्रेस

जबकि कांग्रेस की ओर से अंबाला से कुमारी सैलजा, सिरसा से अशोक तंवर, हिसार से भव्य बिश्नोई,  कुरुक्षेत्र से निर्मल सिंह,  सोनीपत से भूपेंद्र सिंह हुड्डा, गुरुग्राम से अजय सिंह, रोहतक से दीपेंद्र हुड्डा, फ़रीदाबाद से अवतार सिंह भड़ाना, भिवानी-महेंद्रगढ़ से श्रुति चौधरी, करनाल से कुलदीप शर्मा चुनाव लड़ रहे हैं।

इनेलो

इनेलो की ओर से अंबाला से रामपाल वाल्मीकि, कुरुक्षेत्र से अर्जुन चौटाला, सिरसा से चरणजीत सिंह रोड़ी, हिसार से सुरेश कौथ, करनाल से धर्मवीर सिंह, सोनीपत से सुरेंद्र चिकारा, रोहतक से धर्मवीर फ़ौजी, भिवानी-महेंद्रगढ़ से बलवान सिंह फ़ौजी, गुरुग्राम से वीरेंद्र राणा, फ़रीदाबाद से महेंद्र सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। 

जेजेपी और आप  

वहीं जेजेपी का आम आदमी पार्टी से गठबंधन है। हिसार से दुष्यंत चौटाला (जेजेपी),  कुरुक्षेत्र से जयभगवान (जेजेपी), अंबाला से पृथ्वी राज (आप), सिरसा से निर्मल सिंह (जेजेपी), करनाल से कृष्ण कुमार अग्रवाल (आप),  सोनीपत से राज सिंह दहिया (जेजेपी), रोहतक से प्रदीप देशवाल (जेजेपी), भिवानी-महेंद्रगढ़ से स्वाति यादव (जेजेपी), ग्रुरुग्राम से महमूद ख़ान (जेजेपी) और फ़रीदाबाद से नवीन जयहिंद (आप) मैदान में हैं।

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विजयेन्दर शर्मा
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