भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ मोहन लाल बडोली।
भाजपा की इस रणनीति से यह साफ हो गया कि पार्टी हरियाणा मेंओबीसी, एसटी, ब्राह्मण और अन्य गैर जाट जातियों को अपने पाले में लाकर चुनाव लड़ेगी। हरियाणा में पहली बार अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय की 20 जातियों को लाया जा रहा है और उन्हें आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। अभी तक हरियाणा एसटी वर्ग में जातियों की पहचान नहीं की गई थी। यह पूरी तरह से रणनीतिक पैंतरा है। बडोली की नियुक्ति इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भाजपा हरियाणा में तीसरी बार सरकार बनाने के लिए गैर-जाट और शहरी वोटों के तालमेल पर उम्मीद लगाए बैठी है।
जाट फैक्टरः भाजपा सूत्रों का कहना है कि चूंकि हरियाणा में करीब 25 फीसदी वोट शेयर रखने वाले जाट हाल के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के कद्दावर नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा के आसपास एकजुट हुए हैं, इसलिए राज्य भाजपा प्रमुख के रूप में एक जाट नेता की नियुक्ति संभव नहीं थी। सूत्रों ने कहा, "हरियाणा में 30% से अधिक मतदाता ब्राह्मण (लगभग 12%) के साथ मिलकर ओबीसी, विधानसभा चुनाव में एक मजबूत संतुलन बनाएंगे। जाट वोट कांग्रेस, जेजेपी और आईएनएलडी के बीच विभाजित हो जाएंगे। ऐसे में भाजपा के लिए स्थितियां बेहतर रहेंगी।"