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कांग्रेस ने हिमाचल के अपने विधायकों को चंडीगढ़ क्यों बुलाया?

हिमाचल प्रदेश में जीत के बाद कांग्रेस अपने जीतने वाले उम्मीदवारों को राज्य के बाहर ले जाएगी या नहीं? पहले ऐसी रिपोर्टें आई थीं कि कांग्रेस अपने उम्मीदवारों को तथाकथित खरीद-फरोख्त से बचाने के लिए राज्य से बाहर ले जाएगी। पहले एक रिपोर्ट में कहा गया था उन्हें गुजरात ले जाया जाएगा तो एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया था कि उन्हें छत्तीसगढ़ ले जाया जाएगा। लेकिन बाद में शीर्ष नेताओं ने इसका खंडन किया था। कांग्रेस ने अब कहा है कि वह उन्हें पड़ोस में ही रणनीतिक बैठक के लिए ले जा रही है।

हिमाचल के कांग्रेस प्रभारी तजिंदर सिंह बिट्टू ने पुष्टि की, 'हम अपने नेताओं को चंडीगढ़ ले जा रहे हैं और अपने दरवाजे और खिड़कियाँ बंद कर रहे हैं, क्योंकि भाजपा पहले भी कई बार ऐसा कर चुकी है।' बता दें कि कांग्रेस इस बार ऑपरेशन लोटस को लेकर सावधान है। वह एक बैठक के लिए पड़ोसी राज्य चंडीगढ़ में उन्हें जुटा रही है। 

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68 सीटों वाले इस राज्य में सरकार बनाने के लिए 35 विधायक चाहिए। कांग्रेस ने बहुमत हासिल कर लिया है। लेकिन कांग्रेस को अपने विधायकों में सेंध लगने का डर है। उसने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को शिमला भेजा है। बघेल चुनाव प्रचार के दौरान हिमाचल में पर्यवेक्षक बने थे। 

एक मीडिया रिपोर्ट में ख़बर आई थी कि कांग्रेस ने अपने विधायकों को सेंधमारी से बचाने के लिए उन्हें कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान में शिफ्ट करने की योजना बनाई है। 

हिमाचल में गुटबाजी से परेशान कांग्रेस को भाजपा के 'ऑपरेशन लोटस' से डर लगता है। 'ऑपरेशन लोटस' से मतलब है- सरकार बनाने के लिए ज़रूरी संख्या नहीं होने पर बीजेपी जब कथित तौर पर दूसरे दलों के कुछ नेताओं को अपने पाले में करती है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस को इस तरह के हालात का सामना करना पड़ा था। गोवा में भी पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस के अधिकांश विधायक दो बार बीजेपी में शामिल हुए हैं। कई और राज्यों में भी बीजेपी ने इस तरह से सरकार बनाई है।
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विधायकों में टूट की वजह से ही कांग्रेस कर्नाटक से लेकर मध्य प्रदेश तक अपनी सरकारें गंवा चुकी है और गोवा से लेकर गुजरात, उत्तराखंड सहित तमाम राज्यों में उसके विधायक टूटकर बीजेपी के पाले में जा चुके हैं।

द ट्रिब्यून के मुताबिक, कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को हिमाचल प्रदेश के नवनिर्वाचित विधायकों को राजस्थान शिफ्ट करने की जिम्मेदारी सौंपी है। सूत्रों के मुताबिक, प्रियंका गांधी इस पूरे ऑपरेशन पर नजर रखेंगी। हिमाचल प्रदेश के प्रभारी राजीव शुक्ला भी हालात पर नजर रख रहे हैं। 

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कौन होगा मुख्यमंत्री?

कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री का चयन करना है क्योंकि पार्टी में कई चेहरे मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में शामिल हैं। कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की बात करें तो सबसे पहला नाम मंडी से कांग्रेस की सांसद और प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह का आता है। प्रतिभा सिंह के अलावा मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू, नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री का भी नाम है। 

पूर्व कैबिनेट मंत्री और छह बार विधायक रहीं आशा कुमारी और 8 बार विधायक रह चुके कौल सिंह ठाकुर भी कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शामिल हैं लेकिन ये दोनों ही नेता इस बार चुनाव हार गए हैं। इसलिए माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद के लिए बड़ी लड़ाई प्रतिभा सिंह, सुखविंदर सिंह सुक्खू और मुकेश अग्निहोत्री के बीच में होगी।

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