अरबपति गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी ने रिश्वतखोरी के मामले में निवेशकों को गुमराह करने के आरोप में अमेरिकी धोखाधड़ी मामले में एसईसी के कानूनी नोटिस को स्वीकार कर लिया है। उन्हें जवाब देने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है।
गौतम अडानी और उनका भतीजा सागर अडानी
भारत के बड़े उद्योगपतियों में गिने जाने वाले गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी ने अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) के मुकदमे में कानूनी नोटिस स्वीकार करने पर सहमति जताई है। एक कोर्ट फाइलिंग के अनुसार, दोनों अब 90 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल कर सकेंगे। यह मामला सिविल फ्रॉड के दायरे में आएगा।
ब्रुकलिन, न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में दाखिल इस संयुक्त आवेदन (स्टिपुलेशन) को कोर्ट की मंजूरी का इंतजार है। पीटीआई के मुताबिक फाइलिंग में SEC और गौतम तथा सागर अडानी के अमेरिकी वकीलों ने कहा कि वे रेगुलेटर के कानूनी दस्तावेज स्वीकार करने के लिए तैयार हैं, जिससे जज को सर्विस के तरीके पर फैसला करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
यह कदम पिछले एक साल से अधिक समय से लंबित चल रहे मामले को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण है, क्योंकि अडानी भारत में रहते हैं और पहले भेजे गए समन उन्हें तमाम बाधाओं के चलते तामील नहीं हो पा रहे थे। SEC ने नवंबर 2024 में मुकदमा दायर किया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि गौतम और सागर अडानी ने अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) के बारे में निवेशकों को गुमराह करने वाली गलत और भ्रामक जानकारी दी। इस मामले में भारी रिश्वत दी गई थी। भारत के विपक्षी दलों का आरोप है कि अडानी को समन इसलिए तामील नहीं हो पाए, क्योंकि भारत सरकार का रवैया इस मामले में ढीलाढाला रहा। कई बार विभिन्न स्तर पर अलग-अलग कारण बताकर समन को तामील होने से रोका गया।
ब्रुकलिन के फेडरल प्रॉसीक्यूटर्स ने अडानी और अन्य लोगों पर भारत में सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए 265 मिलियन डॉलर (उस समय लगभग 2,100 करोड़ रुपये) की रिश्वत देने का आपराधिक आरोप लगाया है। अडानी ग्रुप ने इन सभी आरोपों से बार-बार इनकार किया है और कहा है कि आरोप निराधार हैं।
AGEL ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि गौतम और सागर अडानी द्वारा नोटिस स्वीकार करना एक सामान्य प्रक्रियात्मक कदम है। कंपनी ने बताया, "30 जनवरी 2026 को डिफेंडेंट्स के वकील ने आवेदन दाखिल किया, जिसमें नोटिस स्वीकार करने की सहमति दी गई है, लेकिन ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क (EDNY) की क्षेत्राधिकार को स्वीकार नहीं किया गया है और सभी डिफेंस, जिसमें क्षेत्राधिकार से संबंधित भी शामिल हैं, सुरक्षित रखे गए हैं।"
AGEL ने आगे कहा कि डिफेंडेंट्स SEC की शिकायत को खारिज करने की मांग करेंगे या जवाबी दस्तावेज दाखिल करेंगे। कंपनी ने स्पष्ट किया कि वह इस कार्यवाही में पक्षकार नहीं है और उसके खिलाफ कोई आरोप नहीं हैं। गौतम और सागर अडानी, जो AGEL के बोर्ड में डायरेक्टर हैं, पर अमेरिकी फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेज एक्ट (FCPA) के तहत कोई आपराधिक आरोप नहीं लगाया गया है। यह पूरी कार्यवाही सिविल प्रकृति की है।
अडानी ग्रुप ने प्रतिष्ठित वॉल स्ट्रीट वकील रॉबर्ट ग्यूफ्रा जूनियर को अपना केस सौंपा है, जो सुलिवन एंड क्रॉमवेल फर्म के को-चेयर हैं। साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भी क्लाइंट रहे हैं। ग्यूफ्रा ने जज को सूचित किया कि अडानी की ओर से मुकदमा स्वीकार करने पर सहमति बन गई है।
SEC ने फरवरी 2025 में भारत के कानून मंत्रालय से हेग कन्वेंशन के तहत सहायता मांगी थी, लेकिन समन तामील नहीं हो पाया। 21 जनवरी 2026 को SEC ने अल्टरनेटिव सर्विस (ईमेल और अमेरिकी वकीलों के माध्यम से) से समन तामील की अनुमति मांगी, जिसके बाद 23 जनवरी को अडानी के वकीलों ने सहमति दे दी।
AGEL ने कहा कि उसका कारोबार सभी क्षेत्रों में सामान्य रूप से चल रहा है, परियोजनाएं योजनानुसार आगे बढ़ रही हैं और कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत है। अडानी ग्रुप ने कहा कि वह सभी क्षेत्रों में उच्चतम शासन, पारदर्शिता और नियामक अनुपालन के मानकों का पालन करता है तथा कानून का सम्मान करने वाली संस्था है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला नवंबर 2024 में शुरू हुआ था, जब अमेरिका के सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड कमिशन यानी एसईसी ने गौतम अडानी और सागर अडानी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अडानी ग्रीन एनर्जी कंपनी के ज़रिए भारतीय अधिकारियों को करोड़ों रुपये की रिश्वत दी या देने का वादा किया। यह सब सोलर पावर प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए किया गया। कंपनी ने 2021 में 750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड जारी किए थे, जिसमें अमेरिकी निवेशकों से क़रीब 175 मिलियन डॉलर जुटाए गए। एसईसी का कहना है कि बॉन्ड बेचते समय कंपनी ने अपनी भ्रष्टाचार-रोधी नीतियों के बारे में गलत और भ्रामक जानकारी दी। इसके साथ ही अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने आपराधिक केस भी दर्ज किया था, जिसमें सिक्योरिटीज फ्रॉड, वायर फ्रॉड जैसे गंभीर आरोप हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी पर अमेरिकी न्याय विभाग में अटॉर्नी ने नवंबर 2024 में 250 मिलियन डॉलर (लगभग 2,100 करोड़ रुपये) के रिश्वत घोटाले का आरोप लगाया था। इसमें अडानी और उनके सहयोगियों पर भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देकर सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के ठेके हासिल करने का इल्जाम है। इसमें अमेरिकी निवेशकों को भी धोखा दिया गया। इस मामले ने भारत के सबसे प्रभावशाली उद्योगपति को गहरा झटका दिया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाते हैं।
नवंबर 2024 में, अमेरिका के न्याय विभाग (Department of Justice, DOJ) तथा प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) ने अडानी और अन्य सहयोगियों पर आरोप लगाए कि उन्होंने लगभग $265 मिलियन की रिश्वत (“bribery scheme”) दी थी। ताकि भारत में सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट्स और सरकारी ऊर्जा आपूर्ति के ठेकों को हासिल किया जा सके। आरोप यह भी है कि अडानी समूह ने अमेरिकी निवेशकों को इस मामले की जानकारी छुपाई थी — अर्थात्, कंपनी ने यह दावा किया कि सब कुछ वैधानिक है, जबकि आंतरिक तौर पर रिश्वत और धोखाधड़ी की गतिविधियाँ चल रही थीं।
हालांकि ये सब अभी आरोप हैं। कोई मामला साबित नहीं हुआ है। साबित होने पर सज़ा सुनाई जाएगी।