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अधीर रंजन : जी-23 ने अपना हिस्सा ले लिया, अब वे बीजेपी में जाना चाहते हैं

कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी लड़ाई अब खुल कर सामने आ गई है और ऐसा लगता है कि यह निर्णायक दौर में पहुँच गई है। पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने पार्टी के असंतुष्ट धड़े पर ज़ोरदार हमला करते हुए कहा कि इन लोगों ने पार्टी से फ़ायदा उठा लिया है और अब वे अपने नए आकाओं को खुश करने के लिए पार्टी की आलोचना  कर रहे हैं। चौधरी ने बीजेपी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन इशारों-इशारों में यह ज़रूर कह दिया कि ये लोग बीजेपी में शामिल होना चाहते हैं।

'एनडीटीवी' से बात करते हुए 'पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इन असंतुष्ट नेताओं ने पार्टी से फ़ायदा उठाया, अपने हिस्सा का जितना ले सकते थे, ले लिया। अब वे पार्टी की आलोचना इसलिए कर रहे हैं कि अपने नए बॉस को खुश कर सकें।' उन्होंने बीजेपी का नाम नहीं लिया। पर यह ज़रूर कहा कि 'इन नेताओं को सांप्रदायिकता की राजनीति करने वालों और नफ़रत फैलाने वालों की आलोचना करनी चाहिए थी, इसके बदले उन्होंने अपनी ही पार्टी की आलोचना की।'

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जी-23 पर क़रारा हमला

इसी तरह अधीर रंजन चौधरी ने नाम लिए बग़ैर ग़ुलाम नबी आज़ाद पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं को प्रधानमंत्री की तारीफ करने में अपना समय नष्ट करने के बजाय उनकी आलोचना करनी चाहिए।

उन्होंने कहा, "उन नेताओं ने सोचा होगा कि यदि वे पार्टी नेतृत्व की आलोचना करेंगे तो उन्हें अपने भविष्य के लिए कुछ अच्छा उपहार दिया जाएगा।"

अधीर रंजन चौधरी ने कहा, "उनका मतलब साफ है जितना हो सके, कांग्रेस को गाली दो, कांग्रेस की छवि को खराब करो। यही उनकी इच्छा है, दरअसल, उनकी नीयत में खोट है।"

पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा,

"उनका मक़सद है किसी को खुश करना है। उन्हें ज़िम्मेवारी दी गई है कि वे कांग्रेस का हुलिया बिगाड़ दें। कांग्रेस को गाली देने से उन्हें बख़्शीश मिलेगी।"


अधीर रंजन चौधरी, अध्यक्ष, पश्चिम बंगाल कांग्रेस

'शहीद होना चाहते हैं जी-23 के लोग'

उन्होंने एनडीटीवी से कहा, "हमारे ये नेता चाहते हैं कि कांग्रेस उन पर कार्रवाई करे ताकि वे ख़ुद को शहीद की तरह पेश करें। जब तक कांग्रेस इन्हें पार्टी से नहीं निकालती है, ये उसे गाली देते रहेगें।"

अधीर रंजन चौधरी ने जी-23 के नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा,

"मैं तो इनसे कहना चाहता हूँ कि दिल्ली में बैठ कर ज्ञान देने से बेहतर है कि मैदान में आओ, यहीं कैंप बनाओ। हमारी मदद करो। कांग्रेस ने आपको काफी कुछ दिया आपने कांग्रेस को क्या दिया, यह सोचो।"


अधीर रंजन चौधरी, अध्यक्ष, पश्चिम बंगाल कांग्रेस

आईएसएफ़ पर सफाई

अधीर रंजन चौधरी ने अब्बास सिद्दीक़ी की पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट के साथ चुनावी क़रार पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के ख़िलाफ़ चुनावी गठबंधन सीपीआईएम ने बनाया है, वही उसका नेतृत्व करती है। कांग्रेस ने जितनी सीटें सीपीआईएम से माँगी, उसे मिल गई, वह इस गठबंधन में शामिल हो गई। अब यदि सीपीआईएम अपने हिस्से से कुछ सीटें आईएसएफ़ को देना चाहती है तो कांग्रेस इसमें कुछ नहीं कर सकती, यह उन दो दलों का आपसी मामला है।

बता दें कि इसी मुद्दे पर जी-23 यानी असंतुष्ट धड़े के लोगों ने कांग्रेस नेतृत्व को घेरा है। आनंद शर्मा ने कहा था कि धर्मनिरपेक्षता के अधार पर पार्टी सेलेक्टिव नहीं हो सकती, यानी अपनी सुविधा से अलग-अलग जगह अलग-अलग रवैया नही चुन सकती। उन्होंने यह भी कहा था कि आईएसएफ़ के साथ कांग्रेस का गठबंधन पार्टी की मूल विचारधारा, गांधीवाद और नेहरूवादी धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है, जो कांग्रेस पार्टी की आत्मा है। इन मुद्दों को कांग्रेस कार्यसमिति में चर्चा होनी चाहिए थी।

किसी की शह पर अधीर कर रहे हैं हमले?

पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष ने आनंद शर्मा पर ज़ोरदार हमला बोलते हुए कहा कि वे एक बार फ़ोन कर उनसे बात कर लेते तो गलतफ़हमी दूर हो जाती, पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से ट्वीट कर दिया। पार्टी के मंच पर बात करने के बजाय उसे सार्वजनिक कर दिया।

सवाल यह उठता है कि अधीर रंजन चौधरी ने ग़ुलाम नबी आज़ाद और आनंद शर्मा जैसे क़द्दावर नेताओं पर इतना ज़ोरदार हमला कैसे किया? क्या उन्हें आला कमान की शह मिली हुई है? क्या वे केंद्रीय नेतृत्व के इशारे पर जी-23 पर हमलावर हैं और एक तरह से पार्टी की ओर से मोर्चा संभाले हुए हैं? इन सवालों का जवाब भी जल्द ही मिल जाएगा, पर यह तो साफ है कि कांग्रेस का अंदरूनी संकट मामूली नहीं है और पार्टी में आर-पार की लड़ाई चल रही है।

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