सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में प्रदर्शनकारियों पर हो रहे पुलिस बल प्रयोग और लाठीचार्ज के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि देश में नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है और केवल किसी आंदोलन या प्रदर्शन की वजह से पुलिस द्वारा की जाने वाली बर्बरता (पुलिस एक्सेस) को जायज नहीं ठहराया जा सकता। अदालत में बिहार में एके 47 के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठा।
जंतर मंतर पर पुलिस बर्बरता के खिलाफ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच में दायर की गई है। इनमें मांग की गई है कि देश भर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को अनुमति देने और पुलिस बल प्रयोग पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रव्यापी (Pan-India) दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किए जाएं।

CJI सूर्यकांत की तीखी टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा- "शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार पूरी तरह से संवैधानिक रूप से गारंटीकृत है। इसे छीना नहीं जा सकता। केवल इसलिए कि कहीं कोई आंदोलन हो रहा है, पुलिस की बर्बरता या अत्यधिक बल प्रयोग को सही नहीं ठहराया जा सकता। केवल आंदोलन होने का मतलब यह नहीं है कि लाठीचार्ज ही किया जाए। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए आत्म-अनुशासित आचरण अनिवार्य है।"
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सुनवाई के दौरान जब एक वकील ने प्रदर्शनों के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों और सुरक्षाबलों की स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित किया, तो जस्टिस जयमाल्य बागची ने कहा:  "चाहे आम नागरिक हो या पुलिसकर्मी, हर व्यक्ति का जीवन महत्वपूर्ण है।"
CJI ने आगे कहा कि पूरे देश में एक समान प्रोटोकॉल (Uniform Protocol) की आवश्यकता है, जहां शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को पर्याप्त जगह मिले और असामाजिक तत्वों से निपटने के लिए उचित व्यवस्था हो।

सुप्रीम कोर्ट में बिहार पुलिस की बर्बरता का मुद्दा उठा

बिहार में AK-47 का इस्तेमाल: याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता फौजिया शकील ने कोर्ट को बताया कि बिहार बंद के दौरान सीवान में सुरक्षा बलों द्वारा AK-47 ऑटोमैटिक राइफल तक का इस्तेमाल किया गया। हालांकि वहां से ताज़ा जानकारी आई है कि बिहार सरकार ने उस पुलिस अधिकारी को निलंबित कर दिया है, जिसने प्रदर्शनकारियों पर एके 47 चलाई थी।

  • छात्रों पर हमले: वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने बिहार में छात्रों पर हुए पुलिसिया हमलों का मुद्दा उठाते हुए पूरे देश के लिए सख्त आदेश जारी करने की मांग की।

  • केंद्र सरकार का रुख: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वासन दिया कि सरकार इस मामले में निष्पक्ष रूप से अदालत की सहायता करेगी।

पुलिस बर्बरता का विवाद क्यों बढ़ रहा है विवाद?

यह याचिकाएं हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर और बिहार में नीट (NEET) पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग के बाद दाखिल की गई थीं:

  • नीट पेपर लीक विरोध: जून से 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नामक ऑनलाइन समूह के बैनर तले छात्र दिल्ली में लगातार प्रदर्शन कर रहे थे और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

  • सोनम वांगचुक का अनशन: पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी छात्रों के समर्थन में 26 दिनों के भूख हड़ताल पर बैठे, जिन्हें बाद में स्वास्थ्य बिगड़ने पर पुलिस द्वारा मेदांता अस्पताल ले जाया गया।

  • संसद चलो मार्च और लाठीचार्ज: 20 जुलाई को छात्रों ने 'संसद चलो' मार्च का आह्वान किया, जिसके दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। पुलिस पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के गंभीर आरोप लगे।

  • शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद जंतर-मंतर का धरना समाप्त हुआ।