ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड यानी AIMPLB और जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने केंद्र सरकार के उस आदेश की निंदा की है, जिसमें सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों, कॉलेजों और अन्य जगहों पर राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सभी छह छंदों को गाना अनिवार्य कर दिया गया है। एआईएमपीएलबी ने वंदे मातरम के पूरे छंद को अनिवार्य करने को असंवैधानिक क़रार दिया है और कहा है कि यह अस्वीकार्य है। एक अन्य प्रमुख संगठन जमीयत ने भी इसे धर्म की स्वतंत्रता पर हमला बताया है।

एआईएमपीएलबी और जमीयत ने गृह मंत्रालय के उस आदेश पर प्रतिक्रिया दी है जिसमें इसने 28 जनवरी को एक आदेश जारी किया। इस आदेश में कहा गया है कि वंदे मातरम के सभी छह छंदों को गाना ज़रूरी होगा। जब राष्ट्रगान जन गण मन और राष्ट्रगीत वंदे मातरम दोनों साथ-साथ बजाए या गाए जाते हैं तो पहले वंदे मातरम गाया जाएगा।
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एआईएमपीएलबी ने गुरुवार को एक प्रेस बयान जारी किया है। इसमें एआईएमपीएलबी के महासचिव मौलाना मोहम्मद फजलुर रहीम मुजद्दिदी ने सरकार के इस फ़ैसले पर ग़ुस्सा जताया। उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला संविधान के ख़िलाफ़, धर्म की आज़ादी और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों के ख़िलाफ़ है। इसके साथ ही यह सुप्रीम कोर्ट के कई फ़ैसलों से भी टकराता है और मुस्लिमों की धार्मिक मान्यताओं के सीधे विरोध में है। इसलिए मुस्लिम समुदाय के लिए यह फ़ैसला बिल्कुल अस्वीकार्य है।

संविधान सभा में क्या चर्चा हुई थी?

मौलाना ने याद दिलाया कि रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह और संविधान सभा की चर्चाओं के बाद तय किया गया था कि वंदे मातरम के सिर्फ पहले दो छंद ही इस्तेमाल होंगे। एक धर्मनिरपेक्ष सरकार किसी एक धर्म की मान्यताओं या पूजा को दूसरे धर्म के लोगों पर जबरदस्ती नहीं थोप सकती।

उन्होंने कहा कि यह गीत बंगाल के संदर्भ में लिखा गया था और इसमें दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की पूजा का ज़िक्र है। पश्चिम बंगाल चुनावों से पहले यह फ़ैसला राजनीतिक कारणों से लिया गया हो सकता है, लेकिन मुस्लिम इसे स्वीकार नहीं कर सकते क्योंकि यह उनकी आस्था से टकराता है। इस्लाम में सिर्फ़ एक अल्लाह की इबादत होती है। किसी और को भगवान मानना या पूजना इस्लाम में मना है।

एआईएमपीएलबी महासचिव मौलाना मुजद्दिदी ने आगे कहा कि भारतीय अदालतों ने भी माना है कि गीत के बाक़ी छंद धर्मनिरपेक्ष मूल्यों से मेल नहीं खाते, इसलिए उनकी अनिवार्यता सीमित की गई है।

एआईएमपीएलबी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि यह आदेश तुरंत वापस लिया जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो बोर्ड कोर्ट में इसको चुनौती देगा।

यह एकेश्वरवाद वाली मान्यता के ख़िलाफ़: जमीयत

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके इस आदेश की निंदा की। उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला एकतरफा और जबरदस्ती वाला है। मुस्लिमों को कोई रोक-टोक नहीं है कि कोई वंदे मातरम गाए या बजाए, लेकिन गीत के कुछ छंद ऐसे हैं जो देश को देवी के रूप में दिखाते हैं। यह एकेश्वरवाद वाली धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है।
मौलाना अरशद मदनी ने कहा, 'मुस्लिम सिर्फ एक अल्लाह की इबादत करते हैं। उन्हें यह गीत गाने के लिए मजबूर करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 का साफ उल्लंघन है, जो धर्म की आजादी की गारंटी देता है। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में भी यह बात साफ है।'
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उन्होंने आगे कहा कि यह आदेश देशभक्ति नहीं दिखाता, बल्कि चुनावी राजनीति, सांप्रदायिक एजेंडा और लोगों का ध्यान असली मुद्दों से हटाने की कोशिश है। असली देशभक्ति नारे नहीं, बल्कि चरित्र और कुर्बानी से दिखती है। मुस्लिमों और जमीयत ने आज़ादी की लड़ाई में बड़ी भूमिका निभाई है। ऐसे फ़ैसले देश की शांति, एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करते हैं।

मौलाना मदनी ने इसे संविधान, धर्म की आज़ादी और लोकतंत्र पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि यह अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा अतिक्रमण है।

सरकार के आदेश में क्या कहा गया है?

सरकार के आदेश में कहा गया है कि राष्ट्रगीत वंदे मातरम के पूरे छह छंदों को गाना होगा, जिसको गाने में कुल 3 मिनट 10 सेकंड का समय लगता है। यह आदेश राष्ट्रपति के आने, तिरंगा फहराने, राज्यपालों के भाषण और अन्य सरकारी समारोहों पर लागू होगा। स्कूलों में काम की शुरुआत भी राष्ट्रगीत से होगी। दर्शकों को खड़े होकर ध्यान से सुनना होगा। पहले आमतौर पर सिर्फ पहले दो छंद गाए जाते थे, लेकिन अब पूरा गाना अनिवार्य कर दिया गया है।
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यह फैसला वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के मौके पर लिया गया है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने यह गीत लिखा था। पहले आमतौर पर सिर्फ पहले दो छंद ही गाए जाते थे, लेकिन अब पूरा गीत अनिवार्य है।

बहरहाल, यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। कुछ लोग इसे राष्ट्रभक्ति से जोड़ रहे हैं तो कुछ इसे धार्मिक भावनाओं पर हमला मान रहे हैं। केंद्र सरकार ने अभी तक इस आलोचना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।