भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने युवाओं से भारत के दर्दनाक इतिहास का "बदला" लेने का आह्वान किया। उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए नेपोलियन का उदाहरण दिया। डोभाल का इशारा किस तरफ है, इसका विश्लेषण जरूरी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने शनिवार को नई दिल्ली में विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद (Viksit Bharat Young Leaders Dialogue) के कार्यक्रम में युवाओं से देश के दर्दनाक इतिहास का "बदला" लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी पुरानी गुलामी, हमलों और अधीनता के इतिहास का बदला लेना चाहिए, लेकिन यह बदला सशक्त और महान भारत के पुनर्निर्माण के रूप में होना चाहिए।
कार्यक्रम में लगभग 3,000 युवकों को संबोधित करते हुए 81 वर्षीय डोभाल ने हिंदी में कहा, "आप भाग्यशाली हैं कि आप स्वतंत्र भारत में जन्मे हैं। मैं गुलाम भारत में पैदा हुआ था।" उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के महान योद्धाओं के बलिदानों का जिक्र किया। डोभाल ने कहा- "भगत सिंह को फांसी दी गई, सुभाष चंद्र बोस ने जीवनभर संघर्ष किया और महात्मा गांधी को सत्याग्रह करना पड़ा ताकि हमें आजादी मिल सके।"
डोभाल ने जोर देकर कहा कि दुनिया में चल रहे सभी संघर्ष और युद्ध इसलिए होते हैं क्योंकि कुछ देश दूसरों पर अपनी इच्छा थोपना चाहते हैं। "अगर आप शक्तिशाली हैं, तो आप स्वतंत्र रहेंगे। अगर आत्मविश्वास नहीं है, तो सारी ताकत और हथियार बेकार हैं।"
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ की, हालांकि उनका नाम नहीं लिया। डोभाल ने कहा "हमारे देश में आज ऐसा नेतृत्व है जो प्रेरणा स्रोत है। उनकी प्रतिबद्धता, समर्पण और कड़ी मेहनत हम सबके लिए आदर्श है।" उन्होंने नेपोलियन के प्रसिद्ध कोट का हवाला दिया: "मैं 1,000 भेड़ों के नेतृत्व में एक शेर से नहीं डरता, बल्कि एक भेड़ के नेतृत्व में 1,000 शेरों से डरता हूं।" यह बयान मोदी के मजबूत नेतृत्व की ओर इशारा करता है।
डोभाल ने कहा कि "हमने किसी अन्य सभ्यता पर हमला नहीं किया, उनके मंदिर नहीं तोड़े, लेकिन सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी के कारण इतिहास ने हमें सबक सिखाया। अनगिनत लोग मारे गए, मंदिर नष्ट हुए, गांव लूटे गए और हमारी सभ्यता कुचली गई, जबकि हम लाचार दर्शक बने रहे। इतिहास हमें चुनौती देता है। आज के युवाओं में वह आग है। 'बदला' शब्द अच्छा नहीं है, लेकिन यह बहुत शक्तिशाली है। हमें अपने मूल्यों पर आधारित महान भारत का पुनर्निर्माण करके देश का बदला लेना चाहिए।"
क्या कहना चाहते हैं डोभाल
डोभाल के इस बयान में बहुत संकेत छिपे हैं। हालांकि उन्होंने अपने बयान में यह साफ नहीं किया है कि उस कथित दर्दनाक इतिहास का बदला भारत के युवा किस तरह लें। उन्होंने बदला लेने का स्वरूप, उसके तरीके पर चर्चा नहीं की। अलबत्ता यह ज़रूर कहा कि भारत का फिर से निर्माण किया जाना चाहिए। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और एएमयू के छात्र नेता रहे अमीक जामई ने डोभाल के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
सपा प्रवक्ता अमीक जामई ने कहा- अजीत डोभाल का बयान शर्मनाक है आखिर हम उनका भार क्यों बर्दाश्त करें? हम उन्हें एक नाकाम NSA, जिसने आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डाला। अरब वर्ल्ड और दुनिया में नाकाम आउटरीच, पड़ोसी देश में पाकिस्तान के असर बढे़। इस रूप में हम उन्हें जानते हैं। पाकिस्तान के आतंकी मसूद अज़हर का समर्पण या संसद पर हमले से लेके 2014-2025 तक भारत माँ का सीना आतंक से छलनी होता रहा। पहलगाम के आतंकी आजतक पकडे़ नहीं गए। Ajit Doval ने प्रधानमंत्री कार्यालय को गुमराह करने के ज़िम्मेदारों मे एक रहे हैं। उनके राजनीतिक बयानों से लगता है की बतौर NSA फ़ौरन हटा देना चाहिए।
डोभाल के चर्चित बयान और एक्शन
दिल्ली ब्लास्ट के बाद अजीत डोभाल का एक वीडियो वायरल हुआ। उन्होंने 2014 में कहा था कि ISI ने भारत में इंटेलिजेंस के लिए मुसलमानों से ज़्यादा हिंदुओं को भर्ती किया है। लेकिन बाद में CNN से बातचीत में उन्होंने इसे डीपफ़ेक बताया यानी फर्जी करार दिया। लेकिन फैक्ट चेक करने वाली वेबसाइट ऑल्ट न्यूज ने जांच कर बताया कि अजीत डोभाल का वायरल वीडियो असली था। ऑल्ट न्यूज के मुताबिक डोभाल ने 2014 में सचमुच ये कहा था कि ISI ने भारत में इंटेलिजेंस काम के लिए मुसलमानों से ज़्यादा हिंदुओं को भर्ती किया है।
डोभाल के इस एक्शन को देखिए
मार्च 2020 में निजामुद्दीन मरकज़ में तबलीगी जमात का आयोजन हुआ। जिसके बाद सरकार और मीडिया ने इसे COVID-19 का बड़ा हॉटस्पॉट घोषित कर दिया। दिल्ली पुलिस की अनुरोध के बावजूद मौलाना साद ने इसे खाली करने से इनकार कर दिया। 28-29 मार्च की आधी रात करीब 2 बजे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल मरकज़ जा पहुंचे। डोभाल ने मौलाना साद से बात की और उन्हें समझाया। इसके बाद जमात ने मस्जिद साफ करने, लोगों का टेस्ट कराने और क्वारंटाइन में भेजने पर सहमति जताई। 31 मार्च को दिल्ली पुलिस ने मौलाना साद के खिलाफ महामारी रोग अधिनियम के तहत FIR दर्ज की। उसके बाद मौलाना मरकज़ से रहस्यमय ढंग से गायब हो गए। पूरे देश में मस्जिदों की जांच शुरू हो गई और मीडिया ने माहौल बनाया कि कोराना का जमात से कोई संबंध है, जमात वाले कोरोना फैला रहे हैं। लेकिन बाद में अदालत ने इन सारी अफवाहों को गलत बताया। पकड़े गए जमातियों को छोड़ने और एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया।