अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज के नेतृत्व में पांच सदस्यीय पंज प्यारे दल ने विधायकों से बेहद तीखे सवाल किए। विधायकों ने कहा कि अकाल तख्त का जो भी आदेश होगा, पूरी तरह पालन किया जाएगा।
सिखों की सर्वोच्च धार्मिक और नीति-निर्धारक पीठ, श्री अकाल तख्त साहिब ने सोमवार को पंजाब के सभी सिख विधायकों को एक सख्त निर्देश जारी किया है। पांच सिंह साहबान (सिख उच्च पुजारियों) की दो घंटे चली मैराथन सुनवाई के बाद, पंजाब सरकार द्वारा हाल ही में पारित किए गए 'जागत जोत श्री गुरु ग्रन्थ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026' की विवादित धाराओं को हटाने के लिए विधायकों को 30 दिन (एक महीने) का अल्टीमेटम दिया गया है।
यह आदेश अकाल तख्त पर बुलाई गई उस विशेष सुनवाई के दौरान आया, जहां सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP), कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (SAD) सहित सभी राजनीतिक दलों के सिख विधायक और मंत्री अपनी सफाई देने पहुंचे थे। इन सभी से इस बात का जवाब मांगा गया था कि अप्रैल महीने में इस कानून को पारित करने से पहले सिख समुदाय या धार्मिक संस्थाओं से परामर्श क्यों नहीं लिया गया।
सरकार का पक्ष और मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति
सुनवाई के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान उपस्थित नहीं थे। उन्होंने एक दिन पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब नहीं किया गया है। हालांकि, सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) की तरफ से कैबिनेट मंत्रियों और सिख विधायकों ने उपस्थित होकर अकाल तख्त के सामने सरकार का रुख और लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया। गौरतलब है कि पंजाब विधानसभा ने 13 अप्रैल 2026 (वैशाखी के दिन) को इस कानून को सर्वसम्मति से पारित किया था और बाद में राज्यपाल ने भी इसे अपनी मंजूरी दे दी थी। इस नए कानून (संशोधन अधिनियम 2026) के तहत, श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप की बेअदबी की आपराधिक साजिश रचने पर उम्रकैद की सजा और 20 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
जांच विफलताओं पर भी घिरी सरकार
अधिनियम के पाठ से परे जाते हुए, जत्थेदार ने पंजाब सरकार को राज्य की कुछ प्रमुख जांचों में प्रशासनिक विफलताओं के लिए भी कटघरे में खड़ा किया। सिंह साहबान ने पूछा कि:
बरगाड़ी बेअदबी कांड (2015): श्री गुरु ग्रंथ साहिब की चोरी और बेअदबी से जुड़े इस मामले में सरकार डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह का पुलिस रिमांड हासिल करने में क्यों विफल रही?
मौड़ ब्लास्ट केस (2017): चुनाव रैली के दौरान हुए इस लक्षित बम विस्फोट में पांच बच्चों सहित सात लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में डेरा प्रमुख के खिलाफ अब तक कोई निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?अकाल तख्त के आदेश पर सभी एकमत
अकाल तख्त के हॉल का दृश्य पंजाब की गहरी राजनीतिक दरार को साफ दर्शा रहा था। कांग्रेस के विधायक सत्तारूढ़ 'आप' विधायकों से दूरी बनाकर बैठे थे, जबकि शिरोमणि अकाली दल (SAD) की एकमात्र विधायक गनीव कौर मजीठिया भी अलग बैठी थीं। लेकिन जब चर्चा शुरू हुई, तो इस संवेदनशील धार्मिक मुद्दे पर पूरी तरह से राजनीतिक आम सहमति दिखाई दी।विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां, कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां, कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा, सुखपाल सिंह खैरा, परगट सिंह, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, राणा इंद्रप्रताप सिंह, शिअद की गनीव कौर मजीठिया और निर्दलीय विधायक मनप्रीत सिंह अयाली सहित सभी नेताओं ने अपने विचार रखे और जत्थेदार को लिखित स्पष्टीकरण सौंपे।
जत्थेदार गरगज ने इस कानून की शब्दावली पर सैद्धांतिक और प्रक्रियात्मक आपत्तियां विस्तार से समझाते हुए कहा कि बेअदबी से जुड़ा कोई भी कानून सिख पंथ (समुदाय) की भावनाओं के अनुरूप ही होना चाहिए। सत्र के अंत में जत्थेदार ने आदेश दिया कि इस कानून को तुरंत होल्ड (रोक) पर रखा जाए और 30 दिनों के भीतर इसमें संशोधन कर इस संकट को सुलझाया जाए।
सर्वोच्च धार्मिक सत्ता के आगे झुकते हुए, वहां मौजूद सभी विधायकों ने हाथ उठाकर अकाल तख्त के इस फैसले पर अपनी पूर्ण सहमति जताई, जिसके बाद हॉल "जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल" के पारंपरिक जयकारों से गूंज उठा।