इस संस्था ने यह भी कहा है कि 'इंटरनेशनल कॉनवीनेंट ऑन सिविल एंड पोलिटिकल राइट्स यह साफ़ कहता है कि यह सामान्य नियम नहीं होना चाहिए कि मुक़दमा शुरू होने के पहले ही किसी को जेल में डाल दिया जाए।'
सफ़ूरा के गर्भवती होने, ख़राब स्वास्थ्य और कोरोना फैलने की आशंका के मद्देनज़र मजिस्ट्रेट ने उन्हें ज़मानत दे दी। लेकिन उसके बाद पुलिस ने दिल्ली दंगों की साजिश रचने का आरोप लगा कर यूएपीए की धाराएं लगा दीं।