केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष के सभी सवालों का जवाब देने को तैयार हो गए हैं। लेकिन उन्होंने इसके लिए शर्त रखी। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने उनकी शर्तों को ठुकरा दिया। संसद में अमित शाह के आने से पहले ही सदन स्थगित हो गया।
अमित शाह और राहुल गांधी। AI Photo
संसद में बुधवार का दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्ष पिछले तीन हफ्ते से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से जंतर मंतर पर छात्रों पर बर्बर लाठी चार्ज और पैलेट गन चलाने के मुद्दे पर बयान देने और माफी की मांग कर रहा है। रोज़ाना हंगामा होता था और संसद स्थगित हो जाती। अमित शाह ने आज बुधवार दोपहर को एक बयान में कहा कि अगर विपक्ष आज 2 बजे तक लिखकर दे तो वो सदन में 3 बजे से लेकर कल 3 बजे तक बैठेंगे। विपक्ष के सारे सवालों के जवाब देंगे। लेकिन नेता विपक्ष राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने राहुल से सहमति जताते हुए अमित शाह के ऑफर को खारिज कर दिया। राहुल ने कहा कि हमें अमित शाह के उपदेश नहीं सुनने हैं। भोजन अवकाश के बाद जब विपक्ष लौटा तो सरकार ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट संशोधन एक्ट 2026 (एफसीआरए) बिल को जेपीसी में भेजने का प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष ने इस पर हंगामा किया और मांग की कि इस बिल को वापस लिया जाए। लेकिन सरकार ने इसी हंगामे के बीच इसे जेपीसी को भेजने का प्रस्ताव बहुमत से पास करा लिया। हंगामे के दौरान स्पीकर ने लोकसभा कल तक के लिए स्थगित कर दी।
अमित शाह की स्पीकर को चिट्ठी
अमित शाह ने मीडिया को बाइट देने और हंगामे के बीच स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखा। पत्र में कहा गया है कि “आप जानते हैं कि संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कार्य सलाहकार समिति की बैठक के दौरान सरकार की ओर से NEET परीक्षा को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शनों पर संसद में चर्चा करने की सहमति दी है। मैं यह भी बताना चाहता हूं कि विपक्ष के अनुरोध से पहले भी संसद के मौजूदा सत्र में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा हुई थी; फिर भी, उस समय सदन में विपक्ष के किसी भी सदस्य ने NEET परीक्षा के संबंध में कोई राय नहीं रखी थी। फिर भी, सरकार इस मुद्दे पर दोबारा चर्चा करने के लिए तैयार है। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप विपक्ष से परामर्श करें और आपसी सहमति के आधार पर आज से शुरू होने वाले समय के लिए, चाहे वह दिनों के हिसाब से हो या घंटों के हिसाब से, जितना समय आप उचित समझें, आवंटित करें। मैं इस मुद्दे पर चर्चा में भाग लेने के लिए निर्धारित समय के दौरान सदन में उपस्थित रहने का इरादा रखता हूं और विपक्ष द्वारा उठाए गए सभी प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तैयार हूं...।”
सरकार-विपक्ष के बीच जबरदस्त राजनीतिक उठापटक
अमित शाह और किरण रिजिजू कह रहे हैं कि सरकार सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। लेकिन चर्चा करने से पहले दोनों शर्त बता देते हैं। रिजिजू ने सोमवार को शर्त बताई थी और अमित शाह ने बुधवार को शर्त बताई थी। राज्यसभा के सभापति यानी उपराष्ट्रपति राधाकृष्ण ने सदन में बयान दिया कि अमित शाह सदन में आकर सांसदों के सवालों का जवाब दें। लेकिन सरकार इसकी परवाह नहीं करती। अमित शाह फिर भी नहीं आते। लेकिन सरकार की ओर से एक बयान रोज़ाना जारी होता है कि विपक्ष चर्चा से भाग रहा है। लेकिन लोकसभा-राज्यसभा की लाइव कार्यवाही देखकर इसका पता लगाया जा सकता है। विपक्ष का कोई भी नेता जैसे ही बोलने के लिए खड़ा होता है, सत्तापक्ष के सांसद फौरन जोर-जोर से बोलना शुरू कर देते हैं। इस तरह संसद के पास अब सिर्फ कल गुरुवार का दिन बचा है। अगर कल भी अमित शाह जंतर मंतर, पैलेट गन और राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर बयान देने नहीं आते हैं तो यह पूरा मानसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़कर खत्म हो जाएगा।
अमित शाह का दोपहर को बयान
अमित शाह ने कहा कि सरकार आज (बुधवार) दोपहर 3 बजे से लेकर कल (गुरुवार) दोपहर 3 बजे तक लगातार चर्चा कराने के लिए तैयार है। गृह मंत्री ने कहा कि वे इस पूरी चर्चा के दौरान सदन में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेंगे और विपक्ष की हर बात को ध्यानपूर्वक सुनेंगे। शाह ने आश्वस्त किया कि विपक्ष द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों और सवालों का जवाब वे चर्चा के समापन पर देंगे।राहुल गांधी का दो टूक जवाब
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, "विपक्ष ने साफ कह दिया है कि हमें अमित शाह के उपदेश सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। जब मैं 'हम' कहता हूं, तो मेरा मतलब देश की युवा पीढ़ी से है। छात्रों पर गोली किसने चलाई? छात्रों को कील लगी लाठियों से पीटने का आदेश किसने दिया? क्या अमित शाह ने हमारे बच्चों पर गोली चलाने का आदेश दिया था? अगर उन्होंने ऐसा किया है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। पिछले 20 दिनों से अमित शाह गायब हैं। भारत के गृह मंत्री में साहस नहीं है; वे सदन में नहीं आ सकते।"
विपक्ष द्वारा अमित शाह पर "लापता", "फरार" या "भगोड़ा" होने के आरोप लगाने पर प्रतिक्रिया देते हुए शाह ने कहा कि मानसून सत्र शुरू होने के बाद से वे नियमित रूप से संसद में उपस्थित रहे हैं। उन्होंने कहा, "सत्र शुरू होने के बाद से मैं नियमित रूप से संसद आ रहा हूं; मैं अपने कक्ष में बैठता हूं, लेकिन चूंकि विपक्ष संसद के दोनों सदनों को सुचारू रूप से चलने नहीं दे रहा है, तो ऐसे में क्या किया जाए?" शाह ने संसद के कामकाज में बाधा डालने के लिए विपक्ष को दोषी ठहराते हुए कहा कि यदि कार्यवाही बार-बार बाधित होती रहे तो भवन में प्रवेश करने का कोई अर्थ नहीं रह जाता।
NEET विरोध प्रदर्शन पर हुई कार्रवाई पर चर्चा की मांग के जवाब में शाह ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार इस मुद्दे के सभी पहलुओं पर चर्चा करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले ही विपक्ष की इस मामले पर बहस के लिए समय देने की मांग मान ली थी और दोहराया कि वे संसद में सवालों के जवाब देने के लिए तैयार हैं।
शाह ने कहा- “लेकिन वे किसी भी चर्चा की अनुमति नहीं देना चाहते। अब जनता तय करे कि कौन भाग रहा है।” केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि सरकार के पास “कुछ भी छिपाने को नहीं है” और वह विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों के सभी पहलुओं पर चर्चा करने के लिए तैयार है। “मैं सदन में बैठूंगा, सबकी बात सुनूंगा और हर बात का जवाब दूंगा।” शाह ने यह भी कहा कि सरकार गुरुवार को दोपहर 3 बजे तक चर्चा बढ़ाने को तैयार है और अध्यक्ष की अनुमति से प्रश्नकाल स्थगित करने पर भी विचार कर सकती है।
अमित शाह का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब संसद का मानसून सत्र लगातार हंगामे और स्थगन की भेंट चढ़ रहा है। सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था और 13 अगस्त को समाप्त होना है। यानी अब सत्र का केवल अंतिम दिन बचा है। PRS के अनुसार इस सत्र में कुल 19 बैठकें निर्धारित हैं।
संसद में बुधवार 12 अगस्त को भी प्रदर्शन
विपक्ष पिछले कई सप्ताह से गृह मंत्री अमित शाह के सदन में आकर बयान देने की मांग कर रहा है। विपक्षी दलों का मुख्य मुद्दा NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई है। विपक्ष का आरोप है कि 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर पुलिस ने अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया। बुधवार को भी विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया और अमित शाह के सदन में आकर जवाब देने की मांग की।
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने संसद के मकर द्वार के सामने प्रदर्शन किया। उनके हाथों में पोस्टर और बैनर थे। सांसदों ने अमित शाह से सदन में आने और कथित पुलिस ज्यादती पर जवाब देने की मांग की। विपक्ष ने अयोध्या राम मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर भी सरकार को घेरा है। विपक्षी दलों का कहना है कि जब तक गृह मंत्री पुलिस कार्रवाई पर स्पष्ट जवाब नहीं देते, तब तक संसद में सामान्य कामकाज संभव नहीं है। कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि चर्चा में खास तौर पर इस सवाल का जवाब दिया जाए कि छात्रों पर कथित रूप से पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था।
तीन सप्ताह से संसद में गतिरोध
20 जुलाई से शुरू हुए मानसून सत्र में लगातार हंगामे के कारण लोकसभा में प्रश्नकाल तक नियमित रूप से नहीं चल पाया है। सरकार और विपक्ष के बीच टकराव के कारण कई विधेयक बिना पर्याप्त चर्चा के पारित हुए हैं। 5 अगस्त तक की रिपोर्ट के अनुसार लोकसभा में पांच विधेयक हंगामे के बीच बिना चर्चा के पारित हो चुके थे।सत्र के शुरुआती दौर में विपक्ष ने NEET पेपर लीक और अयोध्या राम मंदिर के चंदे से जुड़े आरोपों को मुद्दा बनाया। इसके बाद छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई का मुद्दा संसद के केंद्र में आ गया। विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों की मौजूदगी तथा उनके बयान की मांग करता रहा है।
वहीं सरकार का कहना रहा है कि विपक्ष के हंगामे के कारण महत्वपूर्ण विधायी और संसदीय कामकाज प्रभावित हो रहा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी विपक्षी सांसदों से सदन चलने देने की अपील करते हुए कहा था कि नारेबाजी और पोस्टर दिखाने से सदन की गरिमा प्रभावित होती है।
अमित शाह के प्रस्ताव पर विपक्ष का रुख अहम
अमित शाह का 24 घंटे का प्रस्ताव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विपक्ष लंबे समय से उन्हीं की मौजूदगी और जवाब की मांग कर रहा है। अब गृह मंत्री ने खुद बुधवार दोपहर 3 बजे से गुरुवार दोपहर 3 बजे तक चर्चा के लिए उपलब्ध रहने की बात कही है और आश्वासन दिया है कि वह सभी सवालों का जवाब देंगे।हालांकि बुधवार सुबह विपक्ष ने अपना विरोध जारी रखा और अमित शाह से सदन में आने तथा छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर जवाब देने की मांग दोहराई। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या गृह मंत्री का 24 घंटे का प्रस्ताव विपक्ष को संसद की कार्यवाही सामान्य रूप से चलने देने के लिए राजी कर पाता है या मानसून सत्र का आखिरी दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ता है।