विपक्ष शासित झारखंड में छात्र आंदोलन में हंगामे के बीच दिल्ली के जंतर मंतर प्रोटेस्ट पर संसद में अमित शाह के जवाब देने की केंद्र सरकार ने घोषणा की। लेकिन केंद्र ने शर्त रख दी कि गृह मंत्री का बयान रोकने के लिए कोई बाधा नहीं डाली जानी चाहिए।
अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में तीनों विवादित बिल पेश किए
जंतर मंतर प्रोटेस्ट पर पुलिस कार्रवाई को लेकर अमित शाह संसद में बयान तो देंगे, लेकिन इसके लिए सरकार ने एक र्शत भी रख दी है। सरकार का कहना है कि जब गृहमंत्री अमित शाह लोकसभा में बोलें तो विपक्ष उनको रोके-टोके नहीं और उनको अपनी बात रखने दे। संसद में अमित शाह के बयान की घोषणा तक की गई है जब विपक्षी दल शासित झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान सोमवार को हंगामा हुआ, विधानसभा की ओर जाने का प्रयास करते प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया और आँसू गैस के गोले छोड़े गए। तो क्या जंतर मंतर प्रोटेस्ट पर पुलिस कार्रवाई बनाम झारखंड प्रोटेस्ट पर पुलिस कार्रवाई संसद में होने वाली है।
संसद में अमित शाह के बयान की मांग को लेकर संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध के बीच केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर सदन में जवाब देने के लिए तैयार हैं। हालाँकि, सरकार ने इसके साथ एक शर्त भी रखी है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि गृह मंत्री के बयान और उसके बाद होने वाली चर्चा के दौरान विपक्ष को किसी तरह का व्यवधान नहीं डालना चाहिए।
लोकसभा में सोमवार को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्र आंदोलन और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर पूरी और विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। रिजिजू ने कहा कि सरकार की पेशकश स्पष्ट है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि चर्चा के दौरान सदन में किसी तरह का व्यवधान न पैदा किया जाए और गृह मंत्री के जवाब को रोकने या उसका ध्यान भटकाने की कोशिश न की जाए। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री के बयान के दौरान सभी सांसदों को उनकी बात सुननी चाहिए और इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए।
रिजिजू के बयान के बाद पीठासीन अधिकारी और बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने भी विपक्षी सांसदों से सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की।
विपक्ष लंबे समय से कर रहा है चर्चा की मांग
20 जुलाई के संसद मार्च के बाद से ही विपक्ष लगातार इस मुद्दे को संसद में उठाने की मांग कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि पेपर लीक और छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ सुरक्षा बलों ने ज़रूरत से ज़्यादा कार्रवाई की।विपक्ष की मांग रही है कि गृह मंत्री अमित शाह खुद संसद में आकर इस मामले पर बयान दें और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई की जिम्मेदारी तय की जाए। केंद्र की ओर से अब गृह मंत्री के बयान के लिए तैयार होने की घोषणा को इसी लंबे गतिरोध को खत्म करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
सरकार की शर्त से फिर बढ़ सकता है विवाद
हालाँकि, सरकार के प्रस्ताव में एक अहम शर्त है। रिजिजू ने साफ कहा कि जब गृह मंत्री इस मुद्दे पर बयान देंगे और चर्चा होगी, तब विपक्ष को सदन में किसी तरह का व्यवधान नहीं डालना चाहिए। सरकार का कहना है कि चर्चा पूरी और विस्तृत होनी चाहिए, लेकिन गृह मंत्री का बयान बाधित नहीं होना चाहिए। ऐसे में अब सवाल यह है कि विपक्ष सरकार की इस शर्त को स्वीकार करता है या नहीं। पिछले कई दिनों से संसद की कार्यवाही लगातार बाधित रही है और विपक्ष गृह मंत्री के बयान की मांग पर अड़ा हुआ है।
मानसून सत्र ख़त्म होने में अब केवल चार दिन बचे हैं। ऐसे में सरकार और विपक्ष के सामने संसद के कामकाज को सामान्य करने की चुनौती है। गतिरोध के कारण कई महत्वपूर्ण विधेयकों का भविष्य भी अनिश्चित बना हुआ है। इनमें महिला आरक्षण, परिसीमन और विदेशी अंशदान विनियमन कानून यानी FCRA से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। सोमवार को इनमें से कोई भी विधेयक लोकसभा की कार्यसूची में शामिल नहीं था।
महिला आरक्षण, परिसीमन बिल भी अटके
सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ाने के लिए विपक्षी दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। बताया गया है कि सरकार ने डीएमके समेत कुछ विपक्षी दलों से भी इस संबंध में बातचीत की है।
संविधान संशोधन विधेयक के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव है। यह प्रस्ताव परिसीमन की प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ है। इससे पहले अप्रैल में सरकार ज़रूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सकी थी और विधेयक संसद से पारित नहीं हो पाया था।
FCRA बिल भी अहम
संसद में लंबित दूसरे अहम विधेयकों में FCRA संशोधन विधेयक भी शामिल है। यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था और अब इस पर चर्चा होनी है। संसद में जारी राजनीतिक टकराव के बीच इन विधेयकों पर आगे की कार्रवाई को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
विपक्ष का कहना है कि 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों के साथ कथित तौर पर बल प्रयोग किया गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि अपने भविष्य को लेकर सरकार से सवाल पूछ रहे छात्रों पर पेलेट गन और आंसू गैस के गोले इस्तेमाल किए गए। राहुल गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि इस घटना को 20 दिन से अधिक समय बीतने के बावजूद गृह मंत्री संसद में जवाब देने क्यों नहीं आए। उन्होंने मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग भी की और कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई की जवाबदेही तय होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी संसद में जारी गतिरोध को गृह मंत्री के बयान से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्रीय गृह मंत्री इस मुद्दे पर बयान नहीं देते, तब तक संसद में गतिरोध जारी रहने की संभावना है। इस तरह कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने गृह मंत्री के संसद में आने को अपनी प्रमुख मांग बना रखा है।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
अब केंद्र सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ़ उसे गृह मंत्री अमित शाह के बयान के जरिए विपक्ष की लंबे समय से चली आ रही मांग पर जवाब देना है, वहीं दूसरी ओर संसद में अहम विधेयकों को पारित कराने के लिए पर्याप्त समय और सदन का सुचारू संचालन भी सुनिश्चित करना है। दूसरी तरफ़ विपक्ष के सामने यह सवाल है कि क्या वह सरकार की उस शर्त को स्वीकार करेगा, जिसमें गृह मंत्री के बयान के दौरान किसी तरह का व्यवधान नहीं डालने की बात कही गई है।मानसून सत्र के ख़त्म होने में सिर्फ चार दिन बचे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अमित शाह वास्तव में सदन में कब बयान देते हैं और क्या उनके बयान के बाद संसद का गतिरोध खत्म होता है। फिलहाल, सरकार ने चर्चा का रास्ता खोल दिया है, लेकिन बयान के दौरान विपक्ष के व्यवहार की शर्त ने राजनीतिक टकराव का एक नया मुद्दा भी खड़ा कर दिया है।