अमित शाह ने वोट चोरी के आरोपों पर संसद का विशेष सत्र बुलाने की पेशकश की, लेकिन कहा कि राहुल गांधी इसके लिए तैयार नहीं होंगे। दिल्ली पुलिस ने कहा कि रैली की अनुमति दी जा चुकी है लेकिन कनॉट प्लेस से विपक्ष के मार्च की जानकारी नहीं है।
अमित शाह और राहुल गांधी। AI Photo
देश में कथित ‘वोट चोरी’ और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की पेशकश की है। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह संसद में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए कभी तैयार नहीं होंगे, बल्कि सड़कों पर हंगामा करेंगे।
दूसरी ओर, दिल्ली में 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली INDIA गठबंधन की ‘चलो दिल्ली’ रैली को दिल्ली पुलिस ने मंजूरी दे दी है। लेकिन रैली से पहले कनॉट प्लेस-मिंटो रोड जंक्शन से रामलीला मैदान तक प्रस्तावित मार्च को लेकर पुलिस ने कहा है कि उसे इसकी कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है और न ही इसके लिए अनुमति मांगी गई है।
ये दोनों घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आए हैं, जब विपक्ष आज मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन महाभियोग पेश करने जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के जरिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
अमित शाह ने लखनऊ में क्या कहा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को लखनऊ में उत्तर प्रदेश बीजेपी कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। अमित शाह ने कहा कि बीजेपी विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे वोट चोरी के आरोपों पर संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए तैयार है। उन्होंने राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को चुनौती दी कि वे अपने सभी आरोप संसद के भीतर रखें और उन पर चर्चा करें।मैं वोट चोरी पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार हूं। लेकिन राहुल बाबा कभी सहमत नहीं होंगे। वह संसद में इस मुद्दे पर चर्चा नहीं करेंगे, बल्कि सड़कों पर हंगामा करेंगे। -अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री, लखनऊ 30 अक्टूबर 2026
यूपी बीजेपी कार्यसमिति की बैठक में
शाह ने कहा: राहुल गांधी और अखिलेश यादव को चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर संसद में चर्चा करनी चाहिए।
शाह के मुताबिक, चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह संसद में चर्चा करने के बजाय सड़कों पर राजनीतिक ड्रामा करना चाहता है।
अमित शाह ने चुनावी नतीजों को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सत्ता हासिल की है, जबकि राहुल गांधी और अखिलेश यादव अपनी पार्टियों को अपने दम पर सत्ता में नहीं ला पाए हैं। शाह ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने आखिरी बार मुलायम सिंह यादव के जीवित रहते हुए चुनाव जीता था। उन्होंने राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने अपने दम पर कोई चुनाव नहीं जीता है।
गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष चुनाव हारने के बाद अंपायर को दोष देता है। उन्होंने कहा: “मैच हारने के बाद अब वे अंपायर को दोष दे रहे हैं और वोट चोरी का आरोप लगा रहे हैं।” अमित शाह का यह बयान विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले आया है। विपक्ष 30 अक्टूबर को उनके खिलाफ प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ और 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली करने की तैयारी कर रहा है।
दिल्ली में रामलीला मैदान की रैली को मंजूरी, लेकिन कनॉट प्लेस से मार्च पर सवाल
दिल्ली में INDIA गठबंधन की 1 नवंबर को होने वाली रैली को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान में रैली आयोजित करने की अनुमति दी है। लेकिन राहुल गांधी की ओर से घोषित कनॉट प्लेस-मिंटो रोड जंक्शन से रामलीला मैदान तक मार्च को लेकर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उसे इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि न तो नई दिल्ली जिला पुलिस और न ही मध्य दिल्ली जिला पुलिस को इस मार्च के बारे में सूचित किया गया है।दोनों जिलों के पुलिस उपायुक्तों ने भी इसकी पुष्टि की है। मध्य दिल्ली के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह और नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने कहा कि मार्च के संबंध में पुलिस से संपर्क नहीं किया गया है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि अगर विपक्षी नेता और प्रदर्शनकारी मार्च निकालते हैं, तो उन्हें रोका जाएगा या नहीं।
राहुल गांधी ने दोपहर 12 बजे मार्च शुरू करने का किया ऐलानः कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इंस्टाग्राम पर ‘आस्क मी’ सत्र के दौरान कहा था कि 1 नवंबर को दोपहर 12 बजे कनॉट प्लेस-मिंटो रोड जंक्शन से मार्च शुरू होगा। यह मार्च रामलीला मैदान में समाप्त होगा, जहां INDIA गठबंधन की रैली आयोजित की जाएगी। राहुल गांधी ने लोगों से इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील भी की थी।
हालांकि, दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस प्रस्तावित मार्च के लिए अनुमति नहीं मांगी गई है और संबंधित जिलों को इसकी जानकारी भी नहीं दी गई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि नवंबर में प्रस्तावित मार्च के बारे में पहले से कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती। पुलिस पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
रामलीला मैदान में रैली की अनुमति को लेकर कांग्रेस और दिल्ली पुलिस के बीच पहले भी विवाद सामने आ चुका है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस ने पार्टी नेताओं को रैली की तैयारियां करने से रोक दिया है, जबकि उनके पास आवश्यक अनुमति है। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया था कि 1 नवंबर की रैली की अनुमति वापस नहीं ली गई है।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था: “हमने कांग्रेस की रैली की अनुमति वापस नहीं ली है। रामलीला मैदान 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक आयोजकों के लिए बुक है। 17 अक्टूबर को दी गई अनुमति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।” कांग्रेस को रामलीला मैदान में 1 नवंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक रैली आयोजित करने की अनुमति दी गई है। हालांकि, यह अनुमति जमीन के मालिकाना हक वाले प्राधिकरण से पूर्व अनुमति लेने और पुलिस की शर्तों का पालन करने के अधीन है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन
INDIA गठबंधन की प्रस्तावित रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के आरोप हैं। विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के जरिए लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। 30 अक्टूबर को विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ की योजना बनाई थी। यह कार्यक्रम 1 नवंबर की रामलीला मैदान रैली से पहले आयोजित किया जाना था। विपक्ष का कहना है कि वह चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखेगा।क्या है पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व?
अमित शाह की ओर से संसद का विशेष सत्र बुलाने की पेशकश और दिल्ली में विपक्ष की रैली को लेकर पुलिस की स्थिति दोनों ही राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। एक तरफ केंद्र सरकार विपक्ष को संसद में आरोपों पर चर्चा की चुनौती दे रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष सड़कों पर प्रदर्शन के जरिए चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहा है। अमित शाह का यह कहना कि राहुल गांधी संसद में चर्चा के लिए तैयार नहीं होंगे, विपक्ष की रणनीति पर सीधा राजनीतिक हमला है। अब निगाहें 1 नवंबर की रैली पर हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि INDIA गठबंधन रामलीला मैदान में कितनी बड़ी भीड़ जुटा पाता है और कनॉट प्लेस से प्रस्तावित मार्च को लेकर पुलिस तथा विपक्ष के बीच क्या स्थिति बनती है।