अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और उसकी जांच को लेकर पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं दिल्ली पुलिस के पूर्व विशेष आयुक्त यशोवर्धन आज़ाद ने गंभीर सवाल उठाए हैं। वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि यह मामला केवल चोरी का नहीं, बल्कि संगठित वित्तीय धोखाधड़ी का हो सकता है। इसलिए इसकी जांच सिर्फ स्थानीय पुलिस के भरोसे नहीं छोड़ी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि करोड़ों रुपये के चढ़ावे और कीमती आभूषणों के गायब होने के आरोप हैं, तो इसकी जांच विशेषज्ञ एजेंसियों और फॉरेंसिक ऑडिट के जरिए होनी चाहिए।

'चोरी नहीं, फाइनेंशियल फ्रॉड की तरह देखें'

यशोवर्धन आज़ाद ने कहा कि आमतौर पर चोरी के मामलों में पुलिस जांच करती है, लेकिन जब मामला बड़े पैमाने पर धन, ट्रस्ट और वित्तीय लेन-देन से जुड़ा हो, तो इसकी प्रकृति अलग हो जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में यह पता लगाना जरूरी होता है कि धन या आभूषण कब जमा हुए? उनका रिकॉर्ड कैसे रखा गया? किसके पास उनकी जिम्मेदारी थी? किस स्तर पर गड़बड़ी हुई? क्या रिकॉर्ड और वास्तविक संपत्ति में अंतर है? उनके अनुसार इन सवालों के जवाब केवल सामान्य पुलिस जांच से नहीं मिल सकते।
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फॉरेंसिक ऑडिट और विशेषज्ञ टीम की मांग

पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए फॉरेंसिक ऑडिट, डिजिटल रिकॉर्ड की जांच और वित्तीय विशेषज्ञों की मदद ज़रूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि जाँच टीम में ऐसे अधिकारी शामिल होने चाहिए जिन्हें आर्थिक अपराध, अकाउंटिंग और डिजिटल साक्ष्यों की समझ हो। उनका कहना था कि यदि केवल एफआईआर दर्ज कर कुछ लोगों से पूछताछ कर दी जाए, तो इससे पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आएगी।

'स्वतंत्र जांच सबसे जरूरी'

यशोवर्धन आज़ाद ने कहा कि किसी भी धार्मिक ट्रस्ट या सार्वजनिक संस्था से जुड़े आर्थिक मामलों में सबसे महत्वपूर्ण बात स्वतंत्र जांच होती है। उन्होंने कहा कि जांच ऐसी एजेंसी या टीम करे, जिस पर किसी भी पक्ष का प्रभाव न हो, ताकि लोगों का भरोसा बना रहे।

'ट्रस्ट की जवाबदेही भी ज़रूरी'

उन्होंने कहा कि देश के बड़े धार्मिक संस्थानों में करोड़ों रुपये का दान आता है। इसलिए ट्रस्टों पर पारदर्शिता और जवाबदेही की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई आरोप लगता है तो उसका जवाब केवल बयान देकर नहीं बल्कि दस्तावेजों और जांच के जरिए दिया जाना चाहिए।

'सवाल केवल धन का नहीं, भरोसे का है'

आशुतोष के सवालों का जवाब देते हुए यशोवर्धन आज़ाद ने कहा कि यह विवाद केवल पैसे या आभूषणों तक सीमित नहीं है। इससे करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो लोगों के मन में संदेह बना रहेगा।

क्या कहा आशुतोष ने?

कार्यक्रम के दौरान आशुतोष ने सवाल उठाया कि यदि करोड़ों रुपये के चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप सामने आते हैं तो क्या केवल स्थानीय पुलिस की जांच पर्याप्त है? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इस तरह के मामलों में वित्तीय विशेषज्ञों और स्वतंत्र जांच एजेंसी की ज़रूरत नहीं होती। इन सवालों के जवाब में यशोवर्धन आज़ाद ने कहा कि बड़े आर्थिक मामलों की जाँच का तरीक़ा सामान्य आपराधिक मामलों से अलग होना चाहिए और इसमें आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक, ऑडिट तथा विशेषज्ञ जांच आवश्यक है।

अभी क्या स्थिति है?

राम मंदिर चढ़ावे और आभूषणों को लेकर लगाए गए आरोपों पर अलग-अलग पक्षों की ओर से दावे किए जा रहे हैं। मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है। हालाँकि संबंधित आरोपों की आधिकारिक जाँच और निष्कर्ष का इंतजार है। ऐसे में पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आज़ाद का कहना है कि जांच जितनी अधिक स्वतंत्र, वैज्ञानिक और पारदर्शी होगी, उतना ही जनता का भरोसा मजबूत होगा।