अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान के गबन और चोरी के आरोपों की जांच कर रही पुलिस और विशेष जांच टीम (SIT) ने मामले के कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच पूरी कर ली है। अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) गौरव ग्रोवर ने बताया कि कानून के मुताबिक यह जांच 90 दिनों के भीतर पूरी की जानी है और अगले महीने (सितंबर) के अंत तक अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर दी जाएगी।

जांच और SIT की भूमिका

एसएसपी गौरव ग्रोवर ने बताया कि एसआईटी (SIT) कोई अलग से समानांतर जांच नहीं कर रही है, बल्कि वह पुलिस जांच में एक उच्च स्तरीय जांच सलाहकार की भूमिका निभा रही है। इस चार सदस्यीय एसआईटी की अध्यक्षता लखनऊ के आईजीपी (IGP) किरण एस. कर रहे हैं, जिनके पास सीबीआई (CBI) में काम करने का 5 साल का अनुभव है। हालांकि इससे पहले सरकार और राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी यही संकेत दे रहे थे कि एसआईटी समानांतर जांच कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर 25 जुलाई को उत्तर प्रदेश सरकार ने इस SIT का गठन किया था। इसके बाद शीर्ष अदालत ने 27 जुलाई को राज्य सरकार से इस SIT में पांचवें सदस्य के रूप में एक फॉरेंसिक ऑडिटर (Forensic Auditor) को भी शामिल करने का निर्देश दिया था।

अब तक की कार्रवाई और गिरफ्तारियां

25 जून को अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में दर्ज FIR के तहत पुलिस अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस ने इन सभी आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की है: टिन्नू यादव (राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का करीबी)
सुभाष श्रीवास्तव (दान गिनती प्रभारी / Counting in-charge), रमाशंकर मिश्रा, मनीष यादव, करुणेश, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प और अविनाश शुक्ला।
मामले के विवेचना अधिकारी (Investigating Officer) व क्षेत्राधिकारी (CO) आशुतोष तिवारी ने बताया कि पूछताछ के दौरान सामने आए नए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर दस्तावेजीकरण का काम पूरा किया जा रहा है और जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। उधर, फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने कहा कि यदि एफआईआर में चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के नाम शामिल नहीं किए गए, तो बार एसोसिएशन जल्द ही उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएगी।
विपक्ष और यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इस घटना को लेकर सरकार की आलोचना की, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम मंदिर गबन प्रकरण से श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है।