SIT की शुरुआती जांच रिपोर्ट सोमवार को राम मंदिर ट्रस्ट की मीटिंग में पेश की गई थी। सामने आया कि राम मंदिर के कैश काउंटिंग रूम में कर्मचारी कपड़ों और जूतों के अंदर कैश छिपाते थे। यह सरासर 'सुपरवाइज़री फेलियर' (निगरानी में चूक) का मामला है।
अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि की गिनती के दौरान हुई गड़बड़ी और चोरी के मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। हिंदुस्तान टाइम्स (HT) के पास मौजूद इस रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर के दान-गिनती कक्ष (counting room) में "गंभीर पर्यवेक्षी विफलताओं" (supervisory failures) और सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन के कारण लगातार चोरी की घटनाएं हो रही थीं।
सोमवार को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में यह रिपोर्ट पेश की गई, जिसके बाद ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और छह आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की है। हालांकि चंपत राय और अनिल मिश्रा की जवाबदेही पर कोई बात नहीं हुई। अलबत्ता ट्रस्ट ने मीडिया के सामने इनकी तारीफ की।
सिर्फ दो महीने की 70 सीसीटीवी फुटेज ही मिली
- SIT को 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच के सीसीटीवी फुटेज मिले, जो खंगाले गए। इस दौरान करीब 70 ऐसी घटनाएं सामने आईं जिनमें पैसे गिनने वाले कर्मचारी नोटों के बंडल और खुले पैसे अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाते नजर आए।
- जांचकर्ताओं का मानना है कि गबन का यह मामला और भी बड़ा हो सकता है, क्योंकि सीमित स्टोरेज क्षमता होने के कारण 27 अप्रैल से पहले का सीसीटीवी फुटेज खुद-ब-खुद डिलीट (overwritten) हो चुका था। आरोपियों के बैंक खातों की जांच से पता चलता है कि वे इस तारीख से पहले भी ऐसी चोरियां कर रहे थे।
सीसीटीवी फुटेज, पैसों की बरामदगी और वित्तीय सबूतों के आधार पर छह आरोपियों की पहचान की गई है, जो फिलहाल जेल में हैं: अविनाश शुक्ला, मनीष कुमार यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडे और रामाशंकर मिश्रा। एसआईटी जांच के मुताबिक
अविनाश शुक्ला और मनीष यादव को बार-बार पैसे छिपाते देखा गया, जबकि अन्य चार आरोपी इस चोरी में उनकी मदद या सुविधा दे रहे थे।
SIT के गठन से पहले ही मंदिर ट्रस्ट ने गिनती प्रक्रिया से जुड़े लोगों के पास से करीब 2.79 करोड़ रुपये, विदेशी मुद्रा, आभूषण और अन्य कीमती सामान बरामद किए थे। इसके अलावा, 4 जून को गिनती कक्ष के पास बने एक वॉशरूम से भी 2.25 लाख रुपये लावारिस हालत में मिले थे।
- पैसे गिनने वाले इन कर्मचारियों की मासिक सैलरी लगभग 20,000 रुपये (कटौती के बाद करीब 15,000 रुपये) थी। इसके बावजूद इनके और इनके रिश्तेदारों के बैंक खातों में भारी मात्रा में नकद जमा, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और बड़े वित्तीय लेनदेन पाए गए।
सुरक्षा नियमों (SOP) की धज्जियां उड़ीं
एसबीआई (SBI) और ट्रस्ट द्वारा मिलकर बनाई गई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का इस रूम में बिल्कुल भी पालन नहीं किया जा रहा था। SIT ने निम्नलिखित गंभीर लापरवाही पाई:
- गिनती कक्ष में आने-जाने वालों की अनिवार्य तलाशी (frisking) नहीं ली जा रही थी।
- बिना जेब वाली (pocketless) यूनिफॉर्म पहनने के नियम को लागू नहीं किया गया।
- कर्मचारियों को अपना निजी सामान रूम के अंदर ले जाने की अनुमति थी।
- बायोमेट्रिक हाजिरी का सिस्टम बेअसर था और अलग-अलग दानपात्रों (hundis) के पैसों को बिना रिकॉर्ड रखे आपस में मिला दिया जाता था।
- फरवरी 2025 में नियमों में बदलाव कर अनिवार्य तलाशी को केवल "नियमित/रैंडम" चेकिंग में बदल दिया गया, और बाद में उसे भी बंद कर दिया गया।
- अनिल मिश्रा (ट्रस्ट प्रतिनिधि): एसओपी तैयार करने में शामिल रहने के बावजूद उन्होंने सुरक्षा उपायों को लागू नहीं कराया, जिसके चलते उन्हें "वरिष्ठ पर्यवेक्षी जिम्मेदारी" के तहत दोषी माना गया। अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
- सुभाष श्रीवास्तव (काउंटिंग रूम प्रभारी): उन पर घोर लापरवाही का आरोप है क्योंकि वे तलाशी सुनिश्चित करने और स्टाफ की निगरानी करने में पूरी तरह विफल रहे।
- रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू: बिना किसी आधिकारिक अनुमति के दान पेटी की चाबियां अपने पास रखते थे। उन्होंने ही अपने रिश्तेदार मनीष कुमार यादव को इस काम पर रखवाया था, जो चोरी में मुख्य आरोपी निकला।
- टिन्नू यादव ही चंपत राय का ड्राइवर था। टिन्नू ने ही मनीष यादव को कैश काउंटिंग रूम में रखवाया था। एसआईटी के मुताबिक मनीष यादव और अविनाश शुक्ला को ही सबसे ज्यादा कथित तौर पर चोरी करते पाया गया।
चांदी की ईंटों के गायब होने की अफवाहें गलत
सोशल मीडिया पर चल रही उन अफवाहों को SIT ने पूरी तरह खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि भक्तों द्वारा दान की गई चांदी की ईंटें और अन्य कीमती सामान गायब हो गए हैं। भौतिक सत्यापन (physical verification) के बाद पाया गया कि चांदी का सारा दान सुरक्षित और रिकॉर्ड में दर्ज है।
SIT ने सभी छह आरोपियों के खिलाफ चोरी, आपराधिक विश्वासघात (criminal breach of trust), और साजिश रचने की धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की है। साथ ही लापरवाही बरतने वाले पर्यवेक्षकों (supervisors) की भूमिका की भी जांच की जा रही है। राज्य सरकार ने SIT को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 15 जुलाई 2026 तक का समय दिया है, जिसमें सोने-चांदी के चढ़ावे के प्रबंधन और भविष्य के लिए संस्थागत सुधारों की रूपरेखा शामिल होगी।
ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई 2026 को होने वाली है। तब तक एसआईटी (SIT) अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट सौंप देगी। इस आगामी बैठक में ही सीईओ के चयन के लिए कमेटी की सिफारिशों, नए सुरक्षा उपायों और चंपत राय व अनिल मिश्रा के जाने से खाली हुए ट्रस्टियों के पदों को भरने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।