बंगाल चुनाव में दूसरे चरण के लिए पीएम मोदी ने गंगा के नाम पर वोट मांगना शुरू कर दिया है। आज 24 अप्रैल 2026 को कोलकाता में प्रधानमंत्री मोदी ने हुगली में नौकाविहार करते हुए माँ गंगा को श्रद्धांजलि अर्पित की, मल्लाहों और सुबह सैर करने वालों से मुलाकात की। उन्होंने एक्स पर लिखा: “हर बंगाली के हृदय में गंगा का बहुत विशेष स्थान है। यह कहा जा सकता है कि गंगा बंगाल की आत्मा से होकर बहती है। गंगा का पावन जल पूरी सभ्यता की शाश्वत चेतना को आगे बढ़ाता है।
मोदी ने लिखा- कोलकाता में आज सुबह मैंने हुगली नदी के किनारे कुछ समय बिताया। माँ गंगा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर। मैंने सुबह के वॉकरों (घूमने वालों) और नाविकों से भी मुलाकात की। नाविकों का अथक परिश्रम वास्तव में सराहनीय है। हुगली के किनारे खड़े होकर मैंने पश्चिम बंगाल के विकास और हमारे महान बंगाली समाज की समृद्धि के लिए काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।”
मोदी कल से बंगाल में चुनावी रैलियों में व्यस्त हैं। कल उनका रोड शो भी हुआ था। बंगाल चुनाव में 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान था। जिन जिलों में मतदान हो रहा था, उसके बगल के जिले में मोदी और अमित शाह रैलियां कर रहे थे। दोनों नेता आज शुक्रवार को भी बंगाल में हैं। एक मां गंगा के नाम पर वोट मांग रहा है और दूसरा टीएमसी के कार्यकर्ताओं को डराकर चुनाव प्रचार कर रहा है।
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मां गंगा नाम को भुनाने की शुरुआत 24 अप्रैल 2014 से हुई

24 अप्रैल 2014 में वाराणसी लोकसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल करते हुए मोदी ने स्पष्ट कहा था: “मुझे लगता है ना किसी ने भेजा है, ना मैं खुद आया हूँ। माँ गंगा ने मुझे बुलाया है।” उन्होंने वाराणसी को अपनी “माँ” बताया और गंगा की सेवा को अपना भाग्य माना। ठीक उसी तारीख पर 2026 में मोदी गंगा को फिर याद कर रहे हैं।  (सोर्स: द हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया, 24 अप्रैल 2014)।
2014 में बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा था, क्योंकि वाराणसी गंगा तट पर स्थित हिंदू आस्था का प्रमुख केंद्र है। उसी वर्ष उन्होंने ‘नमामि गंगे’ परियोजना शुरू करने की घोषणा की, जिसे उन्होंने “माँ गंगा की सेवा” से जोड़ा। 2014 के बाद से मोदी ने गंगा को विकास, संस्कृति और आध्यात्मिकता का प्रतीक बनाया। हालांकि गंगा कितनी साफ हुई, यह आज भी बहस का विषय है। गंगा में नहाने वाले, उसके किनारे रहने वाले बेहतर जानते हैं कि गंगा नदी किस हालत में है।

चुनावों में 'मां गंगा' का उल्लेख: कितनी बार?

सटीक संख्या उपलब्ध नहीं है। क्योंकि मोदी अपनी कई रैलियों, भाषणों और पोस्ट्स में गंगा का जिक्र करते रहे हैं। लेकिन प्रमुख तथ्य इस प्रकार हैं: 
  • 2014 लोकसभा: वाराणसी नामांकन के दौरान “माँ गंगा ने बुलाया” का सीधा उल्लेख। चुनाव प्रचार में गंगा सफाई को प्रमुख मुद्दा बनाया।
  • 2019 लोकसभा: वाराणसी नामांकन के समय फिर गंगा का जिक्र। ‘नमामि गंगे’ को उपलब्धि बताया।
  • 2024 लोकसभा: 14 मई 2024 को नामांकन से पहले दशाश्वमेध घाट पर गंगा स्नान, आरती की। मीडिया हेडलाइंस थीं—“Maa Ganga has adopted me”। बाद में भाषणों में मोदी ने दोहराया कि “माँ गंगा ने मुझे गोद लिया है”।
  • बंगाल चुनाव 2021 और 2026: 2021 में BJP ने गंगा नदी और इसकी संस्कृति को हिंदुत्व को जोड़ा। 2026 में हुगली पर नाव यात्रा और ट्वीट स्पष्ट रूप से चुनावी संदर्भ में है। मोदी ने बंगाल रैलियों में गंगा को “बंगाल की आत्मा” बताया है।
  • अन्य चुनावी संदर्भ: प्रयागराज कुंभ, देव दीपावली (काशी), उत्तराखंड (मुखवा-गंगोत्री) जैसे मौकों पर गंगा का उल्लेख। एक्स पोस्ट्स से पता चलता है कि 2024-2026 के बीच उन्होंने माँ गंगा का जिक्र दर्जनों बार किया। कुंभ स्नान, दीपावली, गंगा आरती आदि में भी गंगा का जिक्र आया।

नमामि गंगे परियोजना का संदर्भ

2014 में शुरू हुई यह परियोजना 22,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की है। मोदी इसे “माँ गंगा की सेवा” कहते हैं, न कि सिर्फ सफाई। सरकार इसे सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और आर्थिक एजेंडा मानती है। विपक्ष (जैसे कांग्रेस) आरोप लगाता है कि फंड का बड़ा हिस्सा खर्च नहीं हुआ और वादा पूरा नहीं हुआ। कुल मिलाकर गंगा नदी की स्थिति आज भी अच्छी नहीं है।

धर्म, संस्कृति या वोट की राजनीति? 

  • तथ्य: मोदी 2014 से हर प्रमुख चुनाव (लोकसभा 2014, 2019, 2024; बंगाल 2021, 2026) में गंगा का जिक्र कर रहे हैं। हुगली (बंगाल की गंगा) को “बंगाल की आत्मा” बताना बंगाली भावनाओं को छूने की कोशिश है। गंगा हिंदू धर्म में पवित्र है, लेकिन पूरे भारत (खासकर गंगा बेसिन UP, बिहार, बंगाल) की सांस्कृतिक पहचान भी है।
  • BJP का नजरिया: बीजेपी गंगा को हिन्दू सनातन सभ्यता का प्रतीक मानती है। ‘नमामि गंगे’ को विरासत और विकास दोनों से जोड़ती है। मोदी इसे व्यक्तिगत लगाव (वाराणसी) और राष्ट्रीय कर्तव्य बताते हैं। हालांकि मोदी मूल रूप से गुजरात के रहने वाले हैं।
  • विपक्ष का आरोप: विपक्ष कहता रहा है कि हर चुनाव में “धर्म और धार्मिक स्थलों” का इस्तेमाल मोदी और बीजेपी के लिए सामान्य बात है। आलोचक इसे “पोलराइजेशन” और “वोट बैंक पॉलिटिक्स” कहते हैं।
  • वास्तविकता: गंगा भारत की साझा विरासत है। कई प्रधानमंत्री (जवाहरलाल नेहरू से लेकर डॉ मनमोहन सिंह) गंगा का जिक्र करते आए हैं, लेकिन उन लोगों ने कभी गंगा का इस्तेमाल चुनावों में नहीं किया। लेकिन मोदी ने इसे व्यक्तिगत और चुनावी ब्रांडिंग में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया है। हुगली पर नाव यात्रा चुनावी रणनीति का ही हिस्सा है। क्योंकि बंगाल में BJP हिंदुत्व को विकास के साथ जोड़ रही है। गंगा कितनी मैली या साफ है, इस पर बात कम हो रही है।
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बहरहाल, प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 से अब तक ‘माँ गंगा’ को दर्जनों बार याद किया है। चुनावी रैलियों, नामांकन, कुंभ, त्योहारों और अब 2026 बंगाल चुनाव में। यह सिर्फ “वोट के नाम पर” नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक पहचान (वाराणसी + हिंदुत्व + विकास) का अभिन्न अंग बन गया है। 2014 में शुरू हुआ यह आह्वान 2026 में भी जारी है। बंगाल चुनाव में यह देखना होगा कि “माँ गंगा” का संदेश कितना प्रभावी साबित होता है। गंगा साफ हो या न हो।