विपक्ष की रामलीला मैदान में 1 नवंबर की महारैली से पहले, बीजेपी के दिल्ली मार्च और उसके आयोजन की अनुमति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान रैली की अनुमति की स्थिति स्पष्ट की है।
रामलीला मैदान में 1 नवंबर की महारैली की तैयारियां जारी हैं
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन बुधवार, 28 अक्टूबर को दिल्ली के चांदनी चौक में "लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ" शीर्षक से पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। यह पदयात्रा मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के विरोध में विपक्ष के प्रदर्शनों के बीच भाजपा द्वारा जनसंपर्क अभियान को तेज करने के तहत निकाली जा रही है। हालांकि इसका आयोजन विपक्ष की रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली महारैली से पहले किया जा रहा है। विपक्ष सवाल कर रहा है कि क्या बीजेपी ने 28 अक्टूबर के मार्च की अनुमति पुलिस से ली है। इस बारे में तस्वीर साफ नहीं है।
बीजेपी का यह मार्च चुनाव आयोग की मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया (एसआईआर) को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच हो रहा है। कांग्रेस और अन्य इंडिया ब्लॉक दलों ने मतदाता सूची संशोधन में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग पर "वोट चोरी" को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। दूसरी तरफ बीजेपी भी 1 नवंबर से "लोकतंत्र बचाओ, अराजकता दूर करो" नारे के तहत एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू कर रही है।
दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने उन दावों को खारिज किया कि कांग्रेस की रैली की अनुमति रद्द कर दी गई है। पुलिस सूत्रों ने कहा कि रामलीला मैदान में रैली आयोजित करने की पहले दी गई अनुमति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कांग्रेस को रामलीला मैदान के इस्तेमाल के लिए 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक की अवधि का NOC जारी किया गया था। यह अनुमति मिलने के बाद पार्टी ने रैली की तैयारियां शुरू की थीं। दिल्ली पुलिस के मध्य जिले के पुलिस उपायुक्त (DCP) रोहित राजबीर सिंह के अनुसार, कांग्रेस ने पहले नगर निगम से मैदान की उपलब्धता का प्रमाणपत्र प्राप्त किया था। इसके बाद पुलिस से अनापत्ति प्रमाणपत्र मांगा गया। पुलिस ने सुरक्षा आवश्यकताओं का आकलन करने और आयोजकों के साथ चर्चा के बाद अनुमति जारी की थी। मैदान का स्वामित्व दिल्ली नगर निगम (MCD) के पास है और बुकिंग की प्रक्रिया उसी के माध्यम से पूरी होती है।कांग्रेस ने पुलिस पर लगाया था तैयारियां रोकने का आरोप
अनुमति वापस लेने की खबरों के बीच कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस ने पार्टी की प्रस्तावित रैली के लिए की जा रही तैयारियों में हस्तक्षेप किया और बुनियादी ढांचे से जुड़े काम को रोक दिया। वेणुगोपाल के मुताबिक, कांग्रेस को 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक रामलीला मैदान के इस्तेमाल की अनुमति मिली थी, लेकिन सप्ताहांत में पुलिसकर्मियों ने तैयारियों में बाधा डाली। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर की गई।कांग्रेस का कहना है कि वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं और वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जाने के खिलाफ आवाज उठा रही है। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया है। हालांकि, पुलिस सूत्रों ने अनुमति वापस लेने की बात से इनकार किया है। इस तरह फिलहाल विवाद का केंद्र रैली की अनुमति रद्द होने के बजाय तैयारियों में कथित हस्तक्षेप और आयोजन के संभावित प्रभाव को लेकर बना हुआ है।
बीजेपी समर्थक व्यापारी दे रहे हैं बिजनेस चौपट होने की दुहाई
‘द हिंदू बिजनेसलाइन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के व्यापारियों ने 1 नवंबर की रैली के संभावित आर्थिक प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि रामलीला मैदान के आसपास बड़ी संख्या में थोक और खुदरा बाजार स्थित हैं। रैली में भारी भीड़ जुटने पर इन बाजारों तक ग्राहकों, व्यापारियों और मालवाहक वाहनों की पहुंच बाधित हो सकती है। हालांकि विपक्ष का आऱोप है कि ये व्यापारी बीजेपी समर्थक हैं और बीजेपी को अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने के लिए वे लोग 1 नवंबर की रैली के लिए त्यौहार की आड़ ले रहे हैं। जबकि त्यौहार उसके कई दिन बाद है। व्यापारियों ने कांग्रेस नेतृत्व से रैली को दीपावली के बाद आयोजित करने की अपील की है। उनका तर्क है कि त्योहारों से पहले का समय कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान सोने-चांदी, आभूषण, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर, बर्तन और अन्य घरेलू सामान की खरीदारी बढ़ जाती है।
कांग्रेस की रैली का उद्देश्य क्या है?
कांग्रेस ने 1 नवंबर की रैली को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ अपने राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनाया है। पार्टी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है। कांग्रेस की घोषित रणनीति में 30 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सार्वजनिक महाभियोग जैसी कार्यवाही आयोजित करने की योजना और इसके बाद ‘दिल्ली चलो’ मार्च तथा रामलीला मैदान में जनसभा शामिल है। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण में अनियमितताओं के कारण वास्तविक मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। पार्टी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है।अशोक होटल में मॉक पार्लियामेंट पर भी स्थिति स्पष्ट
दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने अशोक होटल में प्रस्तावित मॉक पार्लियामेंट यानी प्रतीकात्मक संसद सत्र को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। पुलिस के अनुसार, यह आयोजन होटल के परिसर में होना है, जो निजी संपत्ति है। इसलिए इसके आयोजन का मामला होटल प्रबंधन पर निर्भर करेगा। इस बयान का अर्थ यह नहीं है कि मॉक पार्लियामेंट के आयोजन की अंतिम अनुमति मिल चुकी है। पुलिस ने केवल यह स्पष्ट किया है कि निजी परिसर में आयोजन के संबंध में होटल की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।फिलहाल दिल्ली पुलिस के मुताबिक, रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली की अनुमति बरकरार है। वहीं, व्यापारियों की मांग है कि आयोजन को दीपावली के बाद तक टाल दिया जाए, ताकि त्योहारी कारोबार और बाजारों तक ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित न हो। इस पूरे विवाद में दो महत्वपूर्ण सवाल हैं: पहला, कांग्रेस के लोकतांत्रिक विरोध और राजनीतिक प्रदर्शन के अधिकार को किस तरह सुनिश्चित किया जाए; दूसरा, बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान व्यापार, यातायात और आम नागरिकों की आवाजाही पर पड़ने वाले असर को कैसे कम किया जाए। 27 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर रैली स्थगित होने की पुष्टि नहीं है। दिल्ली पुलिस ने अनुमति वापस लेने से इनकार किया है, जबकि व्यापारियों की ओर से आयोजन को आगे बढ़ाने की मांग की गई है। रैली की तारीख में बदलाव होगा या नहीं, इस पर कांग्रेस के अंतिम फैसले की प्रतीक्षा है।