BJP dimagi naxals video: BJP के ‘दिमागी नक्सल’ वीडियो पर विवाद हो गया है। वीडियो में एक फिल्म के गोलीबारी वाले दृश्य को दिखाते हुए फुल फोर्स से ऐसे आंदोलनकारी युवकों को खत्म करने आह्वान किया गया है। वहीं बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी का बयान भी चर्चा में है।
बीजेपी का दिमागी नक्सल वीडियो
देश की राजनीति में युवाओं, छात्रों और सरकार की आलोचना करने वालों को लेकर राजनीतिक भाषा एक बार फिर तीखी होती दिखाई दे रही है। एक तरफ कर्नाटक BJP के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से ‘दिमागी नक्सल’ कहे जा रहे लोगों के खिलाफ फिल्मी हिंसा वाला वीडियो साझा किया गया, तो दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जादवपुर यूनिवर्सिटी (JU) के छात्रों को लेकर बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया।
दोनों घटनाओं में एक समान बात नजर आती है- राजनीतिक असहमति रखने वाले युवाओं और छात्रों को केवल विरोधी विचार रखने वाले नागरिकों के रूप में देखने के बजाय उन्हें ‘दिमागी नक्सल’, ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ या राष्ट्रविरोधी ताकतों के रूप में पेश करना। इससे विश्वविद्यालय परिसरों में असहमति, छात्र राजनीति और लोकतांत्रिक विरोध की जगह को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
BJP Karnataka का ‘KGF’ वीडियो और ‘दिमागी नक्सल’ विवाद
कर्नाटक BJP के आधिकारिक X हैंडल से 28 अगस्त को एक वीडियो साझा किया गया। इसमें फिल्म ‘KGF: Chapter 2’ के चर्चित किरदार रॉकी का बंदूक से गोलियां चलाने वाला दृश्य इस्तेमाल किया गया था। वीडियो के साथ लिखा गया- “No slowing down - taking on ‘Dimagi Naxals’ with full force!”यानी पार्टी ने ‘दिमागी नक्सल’ कहे जा रहे अपने राजनीतिक विरोधियों से पूरी ताकत के साथ मुकाबला करने का संदेश दिया। लेकिन वीडियो में गोलीबारी का दृश्य होने के कारण सोशल मीडिया पर इसे राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ हिंसा की धमकी के संकेत के रूप में देखा गया।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण के बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर पहले ही राजनीतिक बहस तेज हो चुकी है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि इस तरह के लेबल का इस्तेमाल सरकार के आलोचकों, बुद्धिजीवियों और असहमति की आवाजों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। दूसरी ओर BJP का तर्क रहा है कि यह टिप्पणी माओवादी विचारधारा और हिंसा का समर्थन करने वालों के संदर्भ में थी।
कांग्रेस का हमला
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस मुद्दे पर तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा- बीजेपी ने एक बिल्कुल नई सोशल मीडिया टीम बनाई है क्योंकि पुरानी टीम की भद्दी भाषा और घटिया हथकंडे काफी नहीं थे। अब वे खुलेआम युवाओं को हिंसा की धमकी देने लगे हैं। उनका असली चेहरा अब सामने आ रहा है।
CJP नेता का पलटवार
BJP Karnataka के वीडियो पर Cockroach Janta Party (CJP) से जुड़े युवा नेता और प्रवक्ता सौरव दास ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने वीडियो को quote-tweet करते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल देश के युवाओं को गोली मारने की धमकी देने वाली भाषा इस्तेमाल कर रहा है। दास ने इसे “pure evil” बताते हुए कहा कि BJP जैसे सत्तारूढ़ दल को इस तरह की राजनीतिक भाषा से बचना चाहिए। ABP Live की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने लिखा कि पार्टी ने “देश के युवाओं को खुले तौर पर गोली मारने की धमकी” दी है और ऐसा लगता है कि पार्टी अपना रास्ता खो चुकी है।जादवपुर यूनिवर्सिटी पर सीएम शुभेंदु अधिकारी का हमला
इसी बीच पश्चिम बंगाल में BJP के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जादवपुर यूनिवर्सिटी के छात्रों को लेकर और ज्यादा आक्रामक बयान दिए। शुक्रवार को JU के बाहर आयोजित एक कार्यक्रम में अधिकारी ने छात्रों को ‘बदतमीज’ बताते हुए कहा—“It’s either them or us; only one shall remain.” यानी, “या तो वे रहेंगे या हम रहेंगे; केवल एक ही रहेगा।”यह बयान ऐसे समय आया जब जादवपुर यूनिवर्सिटी में ABVP और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच तनाव और हिंसक झड़पों को लेकर विवाद चल रहा है। Telegraph की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने ABVP से कहा कि उसने दिल्ली के JNU और हैदराबाद के Osmania University को “सबक सिखाया” है और अब जादवपुर यूनिवर्सिटी की बारी है। उन्होंने कहा कि जादवपुर को भी “सबक सिखाया जाएगा” और परिसर में राष्ट्रवाद की कथित लहर को रोकना संभव नहीं होगा।
‘कौन हैं वे? अंतिम हिसाब-किताब करीब है’
अधिकारी ने अपने भाषण में कहा कि “अंतिम हिसाब-किताब” का समय करीब है और छात्रों तथा उनके बीच अब कोई तीसरा रास्ता नहीं है। उन्होंने JU में कथित ‘आजादी’ के नारों पर सवाल उठाते हुए छात्रों से पूछा कि वे किस आजादी की मांग कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने छात्रों पर गांजा और हेरोइन का इस्तेमाल करने जैसे आरोप लगाए और उन्हें ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ कहकर संबोधित किया। अधिकारी ने यह भी कहा कि वह विश्वविद्यालय परिसर में ड्रोन का इस्तेमाल करवाएंगे ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन छात्र ड्रग्स ला रहा है या उनका इस्तेमाल कर रहा है।ABVP को JNU और Osmania University वाला ‘सबक’ दोहराने का संदेश
शुभेंदु अधिकारी का सबसे विवादित हिस्सा वह था जिसमें उन्होंने ABVP के कार्यकर्ताओं से जादवपुर यूनिवर्सिटी को वही “सबक” सिखाने को कहा, जो उनके अनुसार JNU और Osmania University में सिखाया गया था। उन्होंने कहा कि JNU और Osmania University के बाद अब Jadavpur University बाकी है और इसे भी “ठीक कर दिया जाएगा।” Telegraph के मुताबिक, अधिकारी ने इसे राष्ट्रवाद की ऐसी “आंधी” बताया जिसे रोका नहीं जा सकता।
यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि JNU और अन्य विश्वविद्यालयों में ABVP तथा वामपंथी छात्र संगठनों के बीच वर्षों से वैचारिक और राजनीतिक संघर्ष होता रहा है। ऐसे में एक मुख्यमंत्री द्वारा एक छात्र संगठन से दूसरे विश्वविद्यालय के छात्रों को “सबक सिखाने” की अपील को लेकर विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और छात्र राजनीति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
शिक्षकों को भी चेतावनी
सुवेंदु अधिकारी ने केवल छात्रों को ही निशाना नहीं बनाया। उन्होंने जादवपुर यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को भी चेतावनी देते हुए कहा कि उच्च शिक्षा विभाग उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहा है और वह खुद भी उन्हें देख रहे हैं। उन्होंने Jadavpur University Teachers’ Association के नेताओं को लेकर कहा कि वह देखेंगे कि वे कब तक छात्रों की रक्षा कर सकते हैं। इस बयान के बाद विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षक समुदाय पर राजनीतिक दबाव और अकादमिक स्वतंत्रता को लेकर भी बहस तेज होने की संभावना है।आजादी के नारों से लेकर फिलिस्तीन तक
अधिकारी ने JU परिसर में लिखे गए “Free Free Palestine” जैसे नारों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि छात्रों को इसके बजाय पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK की आजादी की बात लिखनी चाहिए। उन्होंने परिसर में माओवादी नेता किशनजी के समर्थन में लिखे गए “Red Salute to Kishanji” पर भी हमला किया। अधिकारी ने किशनजी पर संविधान जलाने और चुनावों के बहिष्कार का आह्वान करने का आरोप लगाया और सवाल किया कि सरकार ऐसे व्यक्ति को ‘रेड सलाम’ कैसे स्वीकार कर सकती है।
विश्वविद्यालयों में असहमति बनाम ‘राष्ट्रवाद’ की लड़ाई
इन दोनों घटनाओं को एक साथ देखने पर सवाल केवल BJP के एक सोशल मीडिया पोस्ट या सुवेंदु अधिकारी के एक भाषण का नहीं रह जाता। बड़ा सवाल यह है कि भारत के विश्वविद्यालयों में सरकार और सत्तारूढ़ दल की आलोचना करने वाले छात्रों के लिए लोकतांत्रिक जगह कितनी बची है?‘दिमागी नक्सल’, ‘अर्बन नक्सल’, ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ और ‘राष्ट्रविरोधी’ जैसे शब्द राजनीतिक बहस में तेजी से इस्तेमाल हो रहे हैं। सरकार या BJP के समर्थक इसे राष्ट्र-विरोधी विचारधारा के खिलाफ लड़ाई बताते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि ऐसे लेबल असहमति को अपराध या देशद्रोह के समान दिखाने का माध्यम बन रहे हैं। BJP Karnataka का KGF गोलीबारी वाला वीडियो और जादवपुर में सुवेंदु अधिकारी का ‘या तो वे या हम’ वाला बयान इसी व्यापक राजनीतिक भाषा की ओर इशारा करता है।
सवाल युवाओं से नहीं, लोकतंत्र से है
किसी भी लोकतंत्र में छात्र आंदोलन, विरोध प्रदर्शन और सरकार की आलोचना असहमति के वैध माध्यम हो सकते हैं। अगर किसी छात्र संगठन पर हिंसा, नशीले पदार्थों या माओवादी विचारधारा से जुड़ाव जैसे गंभीर आरोप हैं तो उनकी जांच कानून और संस्थागत प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए। लेकिन राजनीतिक विरोधियों के लिए गोलीबारी वाले फिल्मी दृश्य इस्तेमाल करना या छात्रों को यह कहना कि “या तो वे रहेंगे या हम”, लोकतांत्रिक बहस को और ज्यादा टकराव की ओर ले जाता है।इस पूरे विवाद में असली सवाल यही है- क्या सत्ता का जवाब असहमति को समझाना और उसका राजनीतिक जवाब देना होना चाहिए, या विरोध करने वाले युवाओं को ‘दिमागी नक्सल’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ बताकर उन्हें डराने की भाषा अपनाई जाएगी? जादवपुर यूनिवर्सिटी का विवाद आने वाले दिनों में इसी बड़े सवाल को और तीखा कर सकता है।