चीन की पार्टी सीपीसी और बीजेपी के बीच बैठक को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया है कि उनका चीन के साथ क्या संबंध है। आख़िर कांग्रेस ने क्यों बीजेपी-आरएसएस पर हमला किया?
पवन खेड़ा ने चीन की पार्टी और बीजेपी की बैठक पर उठाया सवाल।
चीन जब भारत की जमीन पर अपना हक जता रहा था तो बीजेपी अपने मुख्यालय में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधिमंडल के लिए रेड कार्पेट क्यों बिछा रही थी? यही सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़ा हमला किया है। इसने पूछा है कि आख़िर नरेंद्र मोदी का चीन से क्या रिश्ता है?
नयी दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चीन से रिश्ते पर सीधा सवाल किया। खेड़ा ने कहा, "जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो वहां स्कूलों में चीन की भाषा मंदारिन सीखने की हिमायत करते थे। आखिर नरेंद्र मोदी का चीन से क्या रिश्ता है?" यह बयान ऐसे समय में आया है जब बीजेपी ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीपीसी के साथ मीटिंग की है। कांग्रेस का कहना है कि इससे देश को नुकसान हो रहा है और सरकार की नीयत पर शक है। इसने कहा-
- नरेंद्र मोदी हमें कहते हैं कि चीन से झालर मत खरीदो, लेकिन खुद डोंगफांग नाम की चीनी कंपनी से स्मार्ट मीटर खरीद लेते हैं।
- चीन हमारे देश के नक्शे बदलता है, सरकार उनके ऐप बैन कर देती है।
- चीन हमारे फर्टिलाइजर रोक देता है, रेयर अर्थ मेटल बेचना बंद कर देता है, जिसका नुकसान देश को उठाना पड़ता है।
- गलवान में हमारे 20 जवान शहीद हुए, नरेंद्र मोदी को कोई फर्क नहीं पड़ा।
कांग्रेस नेता ने कहा कि दुनिया अब जान गई है कि भारत जैसे बहादुर देश में एक ऐसा प्रधानमंत्री है जो डराने पर डर जाता है और सामने वाले को क्लीन चिट दे देता है। उन्होंने मोदी को ऐसे नेता बताया जो तारीफ पर गुलामी करने लगते हैं और डराने पर हाथ बांधकर सिर झुका लेते हैं। खेड़ा ने कहा कि पहले ये बातें राज थीं, लेकिन अब पूरे देश को पता चल चुकी हैं।
कांग्रेस ने अपने बयान में कहा, "बीजेपी ने गिरगिट को भी एक रंग सिखा दिया है। जिन्हें चीन को 'लाल आंखें' दिखानी थीं, उनके लिए बीजेपी ने 'लाल कार्पेट' बिछा दी। बीजेपी ने चीन की पार्टी सीपीसी से मीटिंग की है। ये जब सत्ता में नहीं थे, तब भी चीन जाकर मिलते थे, आरएसएस वाले ट्रेनिंग लेते थे। हमें दिक्कत नहीं है कि कोई राजनीतिक दल किसी अन्य देश के राजनीतिक दल से मिले या संवाद करे, मगर हमें दिक्कत है- बीजेपी के दोगलेपन, ढोंग और मक्कारी से।" उन्होंने आगे कहा,
बीजेपी वर्षों तक चिल्लाती रही कि कांग्रेस ने एमओयू साइन कर लिया और अब ये खुद मीटिंग कर रहे हैं। हमें दिक्कत बीजेपी की नीयत से है, क्योंकि बंद दरवाजों के पीछे होनी वाली इन बैठकों के बाद देश को खामियाजा भुगतना पड़ता है। पवन खेड़ा
कांग्रेस प्रवक्ता
जब मोदी बोले थे- चीन को लाल आँख दिखाओ
नरेंद्र मोदी 2014 में जब प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे तब उन्होंने मनमोहन सरकार की आलोचना करते हुए चीन को 'लाल आँख' दिखाने की बात कही थी। यह बयान भारत-चीन सीमा विवाद और चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश पर दावा करने के संदर्भ में दिया गया था। मोदी ने भाषण में चीन की 'विस्तारवादी मानसिकता' की आलोचना की थी और कहा था कि दुनिया बदल चुकी है, विस्तारवाद अब स्वीकार्य नहीं है।
बाद में नरेंद्र मोदी के इस बयान का ज़िक्र कर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल 2020 में गलवान संघर्ष के बाद मोदी सरकार की चीन नीति की आलोचना लगातार करते रहे हैं। विपक्षी दलों की इन आलोचनाओं के बाद भी पीएम मोदी 2020 के बाद लगातार चीन के साथ रिश्ते सुधारने में लगे हैं। पिछले साल प्रधानमंत्री सात साल बाद चीन गए थे। वहां उन्होंने गहरे व्यापारिक रिश्ते बनाने पर सहमति जताई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामान पर 50% टैरिफ लगा दिया था, जिसके बाद भारत ने चीन के साथ तेजी से रिश्ते सुधारने शुरू किए। दोनों देशों ने डायरेक्ट फ्लाइट्स फिर शुरू कीं और चीनी प्रोफेशनल्स के लिए बिजनेस वीजा आसान कर दिया।बहरहाल, पवन खेड़ा ने बीजेपी मुख्यालय में हुई चीन की सीपीसी के साथ मीटिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या इन बैठकों में भारत के हितों पर चर्चा हुई? उन्होंने कई मुद्दों पर सवाल किए-
- क्या गलवान, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों पर जहाँ चीन ने भारत के हितों को नुक़सान पहुँचाया है, उन पर बात हुई?
- बीजेपी की बैठक के बाद चीन ने कश्मीर की शक्सगाम वैली पर अपना दावा किया, क्या इस पर चर्चा हुई?
- सेना के एक बड़े अधिकारी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन पाकिस्तान की मदद कर रहा था, क्या इस मुद्दे को उठाया गया?
- चीन ने एचक्यू-9 एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए और पाकिस्तान को पीएल-15 मिसाइलें दीं, जो भारत को निशाना बना रही थीं। फिर भी मानसरोवर यात्रा क्यों शुरू की गई?
- चीन ने फर्टिलाइजर और रेयर अर्थ पर बैन लगाया है, क्या आपकी बैठकों में उस पर चर्चा होती है?
- क्या आप ऐसी बैठकों में भारत के किसानों के बारे में सोचते हैं?
'चीन ने डांटा तो अमेरिका... यूएस ने कहा तो फिर चीन चले गए'
पवन खेड़ा ने मोदी सरकार की विदेश नीति को 'डांवाडोल' बताया। उन्होंने कहा, "चीन ने डांटा तो अमेरिका के पास चले गए... अमेरिका ने कुछ कहा तो चीन के पास चले गए। सरकार को समझना होगा कि ये विदेश नीति है, बच्चों का खेल नहीं। मोदी सरकार लोगों को कहती है कि चीन का सामान मत खरीदो और फिर खुद इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में चीन का निवेश मांगती है।"
कांग्रेस ने डोकलाम, सिलीगुड़ी कॉरिडोर, शक्सगाम वैली से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक में चीन की कई हरकतों का जिक्र किया। कांग्रेस ने लद्दाख में बफर जोन की मांग की, लेकिन सरकार ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने मोदी सरकार की मजबूरियों पर सवाल उठाए- चीन के मजदूरों को वीजा देकर मेक इन इंडिया और पीएलआई स्कीम को बढ़ावा क्यों दिया जा रहा है? इसने कहा कि चीन पैंगोंग त्सो झील के रास्ते मिलिट्री पुल बना रहा है, लेकिन सरकार कुछ नहीं बोल रही। ब्रह्मपुत्र नदी के पास चीन डैम बना रहा है, उसे लेकर भी सरकार खामोश है। ऊपर से असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा कहते हैं कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
कांग्रेस ने कहा कि ऐसी बैठकों से दिक्कत नहीं है, लेकिन देशहित में सवाल पूछना ज़रूरी है। पार्टी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे का जिक्र किया, जहां उन्होंने भारत-पाकिस्तान युद्ध में मध्यस्थता की बात कही थी। अब चीन भी ऐसे दावे कर रहा है, लेकिन मोदी सरकार से कोई जवाब नहीं आया। कांग्रेस ने कहा, "नरेंद्र मोदी की आँखें नीचे हैं, हाथ बंधे हैं और सिर झुका हुआ है। यह देश एक झुका हुआ प्रधानमंत्री कभी स्वीकार नहीं करेगा।"
कांग्रेस का कहना है कि पूरी सरकार आँखें मूंदकर बैठी है। वे नहीं समझ रहे कि उनकी इस लापरवाही का खामियाजा आने वाले समय में देश को भुगतना पड़ेगा। यह विवाद ऐसे समय में गर्माया है जब भारत-चीन सीमा पर तनाव बरकरार है और विपक्ष सरकार की नीतियों पर लगातार हमला कर रहा है। बीजेपी की तरफ से अभी इस पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।