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बयान पर विवाद के बाद हेगड़े ने कहा - नहीं लिया महात्मा गाँधी का नाम

अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले बीजेपी सांसद अनंत कुमार हेगड़े ने महात्मा गाँधी पर हमला बोला था और देश की आज़ादी के लिये किये गये उनके संघर्ष को ड्रामा बताया था। हेगड़े ने बापू को महात्मा कहने पर भी सवाल उठाया था और कहा था कि कैसे ऐसे लोगों को भारत में महात्मा कहा जाता है। 

बयान को लेकर विवाद होने पर हेगड़े ने सफाई देते हुए कहा है कि वह अपने बयान पर अडिग हैं और उन्होंने एक बार भी महात्मा गाँधी का नाम नहीं लिया है। हेगड़े ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा, ‘मीडिया में जो कुछ भी दिखाया जा रहा है, वह झूठ है। मैं अपने बयान पर अडिग हूं। मैंने कभी भी किसी राजनीतिक दल या गाँधी का संदर्भ नहीं दिया।’ उन्होंने कहा, अगर मैंने गाँधी और नेहरू के बारे में या किसी अन्य स्वतंत्रता सेनानी के बारे में एक भी शब्द कहा हो तो मुझे दिखाइये।’ सूत्रों के मुताबिक़, हेगड़े के बयान से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी के बड़े नेता नाराज़ हैं। 
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बेंगलुरू में शनिवार को हुई एक जनसभा में उत्तरी कन्नड़ सीट से सांसद पूर्व केंद्रीय मंत्री हेगड़े ने कहा था कि देश की आज़ादी के पूरे आंदोलन के संघर्ष को अंग्रेजों की सहमति और समर्थन से अंजाम दिया गया। हेगड़े ने कहा था, ‘इन कथित नेताओं में से किसी भी नेता को पुलिस के द्वारा नहीं पीटा गया। उनका स्वतंत्रता आंदोलन बड़ा ड्रामा था। अंग्रेजों की सहमति से यह आंदोलन किया गया। यह सही मायनों में आंदोलन नहीं था। यह मिलीभगत से किया गया आंदोलन था।’ बीजेपी के वरिष्ठ नेता हेगड़े ने महात्मा गाँधी की भूख हड़ताल और सत्याग्रह को भी ड्रामा बताया था। 

हेगड़े ने कहा था, ‘कांग्रेस का समर्थन करने वाले लोग कहते हैं कि भारत को आज़ादी सत्याग्रह के कारण मिली लेकिन यह सही नहीं है। अंग्रेजों ने इस देश को सत्याग्रह के कारण नहीं छोड़ा था।’ उन्होंने आगे कहा कि अंग्रेजों ने परेशान होकर देश को आज़ादी दी थी। बीजेपी सांसद ने कहा था, ‘जब मैं इतिहास पढ़ता हूं तो मेरा खून उबल जाता है। ऐसे लोग हमारे देश में महात्मा बन जाते हैं।’ 

हेगड़े के बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने कहा था कि मोदी सरकार नाम तो गाँधी का लेती है और सपना गोडसे का देखती है। उन्होंने कहा कि सरकार की बोली भी वही है और वह करती भी वही है। उन्होंने कहा कि हेगड़े ने ऐसा बयान देकर गाँधी को ही नहीं पूरे स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन को अपमानित किया है। 

संविधान से हटाएंगे ‘सेक्युलर’ शब्द?

यह वही बयानवीर हेगड़े हैं जिन्होंने एक रैली में कहा था कि बीजेपी संविधान में संशोधन करने के लिए ही सत्ता में आई है। उन्होंने कहा था कि संविधान में पहले भी संशोधन हुए हैं और वे संशोधन करके संविधान से 'सेक्युलर' शब्द को हटाएँगे। लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले जब बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था तो हेगड़े ने उनके बयान को सही ठहराया था और कहा था कि साध्वी प्रज्ञा को इस पर माफ़ी माँगने की कोई ज़रूरत नहीं है।

अपना स्टैंड साफ करे बीजेपी

अब यहां सवाल यह उठता है कि महात्मा गाँधी को लेकर बीजेपी का क्या स्टैंड है। क्योंकि एक ओर तो केंद्र सरकार और बीजेपी की ओर से देश भर में गाँधी जी की 150वीं जयंती पर पदयात्राएं निकाली गई थीं। इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ख़ुद सांसदों, पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश दिये थे और महात्मा गाँधी की शिक्षा और विचारों का प्रचार-प्रसार करने के लिये कहा था। लेकिन दूसरी ओर हाल यह है कि केंद्र में मंत्री पद पर रहे लोग देश की आज़ादी के लिये बापू द्वारा किये गये संघर्ष को ड्रामा बता रहे हैं। बीजेपी के सांसद गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को खुलेआम देशभक्त बता चुके हैं। 

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ऐसे ही एक और नेता नलिन कुमार कतील ने भी नाथूराम गोडसे के पक्ष में बयान दिया था लेकिन कुछ महीने बाद बीजेपी ने उन्हें कर्नाटक बीजेपी का अध्यक्ष बना दिया। बीजेपी ने कहा था कि वह हेगड़े, कतील के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगी, लेकिन आज तक इस मामले में कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ है। ऐसे में सरकार और पार्टी को यह बताना चाहिए कि आख़िर ऐसे लोग पार्टी में क्यों बने हुए हैं और वह कब इन्हें पार्टी से बाहर करेगी। अगर वह ऐसा नहीं करती है तो इसका मतलब यह समझा जा सकता है कि गाँधी पर उसके विचार वह नहीं हैं, जिनका वह दिखावा करने की कोशिश कर रही है। 

बीजेपी ने हेगड़े के बयान से ख़ुद को अलग कर लिया था। वरिष्ठ नेता जगदंबिका पाल ने कहा, 'पूरी दुनिया गाँधी के बारे में जानती है और यह यह उनकी निजी राय हो सकती है।' केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि गाँधी एक सम्मानित व्यक्ति हैं और हेगड़े को यह बात नहीं कहनी चाहिए थी।
गाँधी के पोते तुषार गाँधी ने कहा, ‘हेगड़े का यह कहना सही है कि बापू की आज़ादी की लड़ाई ड्रामा है। यह इतना तीव्र था कि इसने ब्रिटिशों की आँखें खोल दीं कि उन्होंने भारत को अनैतिक तरीके से उपनिवेश बना रखा है और इसे ग़ुलाम बनाया हुआ है।’

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