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बीजेपी ने भी किया था हंगामा, तोड़फोड़, कई बार कई दिनों तक नहीं चलने दी  थी संसद

कृषि विधेयकों पर राज्यसभा में विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामा की जिस तरह सत्तारूढ़ बीजेपी ने तीखी आलोचना की, गृह मंत्री ने इसे संसदीय मर्यादा का उल्लंघन करार दिया और राज्यसभा के अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने सदस्यों के निलंबन को सही बताया, उससे कई सवाल खड़े होते हैं।
कई सवाल इसलिए भी खड़े होते हैं कि पत्रकार से राज्यसभा के उप सभापति बने हरिवंश ने सदस्यों के व्यवहार से 'दुखी' होकर एक दिन के व्रत का एलान कर दिया और वेंकैया नायडू को चिट्ठी लिख दी।
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सवाल यह है कि क्या बीजेपी ने कभी (गृह मंत्री राजनाथ सिंह के शब्दों में) 'संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन' नहीं किया है? क्या बीजेपी जब विपक्ष में थी उसने ऐसा कोई काम नहीं किया जो लोकतंत्र के लिए 'शर्मनाक' हो?

बीजेपी का रिकॉर्ड?

कुल मिला कर सवाल यह उठता है कि जब बीजेपी विपक्ष में थी, उसने संसद में शोरगुल, हंगामा किया है या नहीं, उसने संसद की कार्यवाही रोकी है या नहीं?
पुराने अख़बारों पर एक नज़र डालने से लगता है कि बीजेपी ने एक बार नहीं, कई बार संसद में कामकाज नहीं चलने दी है। उसने 2 जी, कोयला घोटाला, मल्टी ब्रांड रीटेल में विदेशी पूंजी निवेश और किसानों के मामलों में भी संसद में ज़ोरदार हंगामा किया है, तोड़फोड़ की है, नारेबाजी की है, संसद नहीं चलने दी है। एक बार तो राज्यसभा का पूरा सत्र ही बेकार चला गया और बीजेपी ने कोई काम नहीं होने दिया।

कोयला घोटाला

बीजेपी के सदस्यों ने संसद के दोनों सदनों को 30 अगस्त 2012 को पूरी तरह ठप कर दिया। वे कोयला घोटाले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे।
उस दिन बीजेपी के सदस्यों ने पहले लोकसभा और बाद में राज्यसभा में इतना ज़ोरदार हंगामा किया था कि कार्यवाही रोक देनी पड़ी। बाद में जब कार्यवाही शुरू हुई तो उन्होंने सीएजी रिपोर्ट को मुद्दा बनाया और इस पर सिंह से इस्तीफे की मांग करते हुए फिर इतना हंगामा किया कि कार्यवाही एक बार फिर स्थगित कर देनी पड़ी थी। ऐसा दोनों सदनों में हुआ था।
इसके बाद इसी मुद्दे पर अगले तीन-चार दिन तक सदन में कोई कामकाज नहीं हुआ। बीजेपी सांसद वेंकैया नायडू ने 1 सितंबर को ज़ोर देकर कहा था कि मामला सिर्फ कोयला घोटाले का ही नहीं है, दूसरे कई मुद्दे हैं।
उन्होंने कहा था कि मनमोहन सिंह देश पर बोझ बन चुके हैं, उन्हें हटना ही होगा। उस दिन भी कोई कामकाज नहीं हुआ था। उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि जब तक प्रधानमंत्री इस्तीफ़ा नहीं देते, इसी तरह विरोध प्रदर्शन चलता रहेगा।

11 सितंबर, 2011

इसके पहले बीजेपी ने 11 सितंबर, 2011 को तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम के इस्तीफ़े की मांग करते हुए संसद के दोनों ही सदनों में हंगामा किया था, कई बार सदन की कार्यवाही रोकी गई थी और कामकाज नहीं हुआ था। बीजेपी सदस्य दिल्ली में पुलिस लाठीचार्ज के ख़िलाफ़ गृह मंत्री का इस्तीफ़ा मांग रहे थे।
ख़ुद लाल कृष्ण आडवाणी ने यह मुद्दा लोकसभा में उठाया था और तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से अलग से मुलाक़ात कर शिकायत की थी। सुषमा स्वराज और अरुण जेटली ने राज्यसभा में कमान संभाली थी और कोई काम नहीं होने दिया था। उन्होंने इसे उचित भी ठहराया था।

मल्टी ब्रांड रिटेल

मल्टी ब्रांड रीटेल में 51 प्रतिशत विदेशी पूंजी निवेश ऐसा मुद्दा था, जिसका बीजेपी ने ज़बरदस्त विरोध किया था और कई दिनों तक सदन नहीं चलने दी थी। सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और स्मृति ईरानी इस विधेयक का सबसे अधिक विरोध करने वालों में थीं। ईरानी राज्यसभा में थीं। राज्यसभा में इस पर इतना विरोध हुआ था कि कई दिनों तक उसकी कार्रवाई रोकी जाती रही। रवि शंकर प्रसाद ने खुले आम आरोप लगाया था कि अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट ने 2.50 करोड़ डॉलर खर्च कर इसके लिए लॉबीइंग की है। 
बीजेपी नेता नितिन गडकरी ने इस मुद्दे के शुरू होने के पहले सितंबर में ही इसका विरोध करने का एलान कर दिया था। शीतकालीन सत्र का बड़ा हिस्सा इसमें ख़त्म हो गया, राज्यसभा का कामकाज नहीं चलने दिया गया था। अंत में दिसंबर के पहले सप्ताह में यह विधेयक पारित हो सका।

2 जी पर बवाल

बीजेपी ने 2013 के बजट सत्र के शुरू मे ही सदन में संकट खड़ा कर दिया और कह दिया कि वह हर कीमत पर विरोध करेगी। उसने 21 अप्रैल 2013 को ज़ोरदार विरोध किया। कई दिनों तक विरोध की वजह से यह संकट खड़ा हो गया कि रेल बजट और आम बजट कैसे पास हो। काफी मान मनौव्वल के बाद बीजेपी के सदस्य इस पर राजी हुए थे कि वे ये दोनों ही बजट रखने देंगे और उसके बाद फिर विरोध करेंगे। 
बीजेपी ने 2जी घोटाले के मुद्दे पर कई दिनों तक संसद नहीं चलने दी थी, उसने कपिल सिब्बल के इस बयान के विरोध में दोनों ही सदन में कामकाज रोक दिया था जिसमें कहा गया था कि 2 जी से वास्तविक नुक़सान नहीं हुआ है, सिर्फ 'नोशनल लॉस' हुआ है। उस समय भी सत्र का बड़ा हिस्सा इसकी भेंट चढ गया था।

विपक्ष में आक्रामक बीजेपी

इसी तरह पाकिस्तान के मुद्दे पर, नियंत्रण रेखा पर होने वाली गोलीबारी रोकने में सरकार की नाकामी के मुद्दे पर, सीमा पर एक भारतीय जवान के सिर काट कर पाकिस्तानी सेना द्वारा ले जाने के मुद्दे पर और दूसरे कई मुद्दों पर बीजेपी ने बहुत ही ज़बरदस्त विरोध किया था।
कृषि विधेयक के विरोध पर जिस तरह उप सभापति ने मत विभाजन नहीं कराया और उसके बाद जिस तरह बीजेपी ने विपक्षी सदस्यों के काम को शर्मनाक और लोकतंत्र की मर्यादा के ख़िलाफ़ बताया, वह मुद्दा अहम है। वे भी ऐसा कर चुके हैं, बल्कि उन्होंने इन दलों की तुलना में अधिक ज़ोरदार विरोध किया था। पर आज वे सत्ता में है और बहुसंख्यकवाद के आधार पर विपक्ष को कुचल रहे हैं।

अब क्या कर रही है बीजेपी?

याद दिला दें कि राज्यसभा में रविवार को कृषि विधेयकों को लेकर हुए हंगामे के बाद 8 सांसदों को एक हफ़्ते के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने सोमवार को यह कार्रवाई की है। नायडू ने कहा कि सांसदों ने जिस तरह का व्यवहार किया, वह बेहद ख़राब था। राज्यसभा में किसानों से जुड़े विधेयकों के पारित होने के बाद काफी देर तक हंगामा हुआ था और विपक्षी दलों के सांसदों ने इसके ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की थी।
निलंबित होने वाले सांसदों में डेरेक ओ ब्रायन, संजय सिंह, राजीव साटव, केके रागेश, रिपुन बोरा, डोला सेन, सैयद नाज़िर हुसैन और एलामारान करीम का नाम शामिल है। सोमवार को सत्र शुरू होते ही विपक्षी दलों के सांसदों ने एक बार फिर जोरदार नारेबाज़ी की। सभापति की इस कार्रवाई से पता चलता है कि वह बेहद सख़्त दिखाई दे रहे हैं क्योंकि कल हंगामा होने के बाद आज उन्होंने तुरंत एक्शन ले लिया और इस कार्रवाई में ज़्यादा वक़्त नहीं लिया। 
शनिवार शाम को 12 विपक्षी दलों ने उप सभापति हरिवंश के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। लेकिन सरकार ने उप सभापति का ज़ोरदाव बचाव किया था और राज्यसभा में विपक्ष के व्यवहार को संसदीय मर्यादा का उल्लंघन और लोकतंत्र के लिए शर्मनाक क़रार दिया था। 

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