मध्य प्रदेश में बीजेपी ने राज्यसभा की तीनों सीटें जीत ली हैं। तीनों निर्विरोध चुने गए। तीसरी सीट पर विवाद है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुनवाई 12 जून को है। लेकिन नतीजे आज ही आ गए।
महेश केवट (बीजेपी) को निर्विरोध विजयी घोषित किया गया। उनके मुकाबले मीनाक्षी नटराजन थीं।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 2026 के चुनावों में मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटें निर्विरोध जीत लीं। BJP के उम्मीदवारों को विजेता घोषित किया गया और उन्हें आधिकारिक तौर पर जीत का प्रमाणपत्र फौरन जारी कर दिया गया। चुने गए सदस्य हैं: तरुण चुघ (BJP), रजनीश अग्रवाल (BJP) और महेश केवट (BJP)। यह जीत तब मिली जब कांग्रेस की एकमात्र उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया। महेश केवट को उसी सीट पर निर्विरोध विजयी घोषित किया गया। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान चुनाव अधिकारी ने पाया था कि उन्होंने अपने हलफनामे में कोर्ट में दर्ज शिकायतों का विवरण नहीं दिया था। नामांकन रद्द होने और रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा निर्विरोध घोषणा किए जाने के बाद, कांग्रेस ने इस नतीजे को कानूनी रूप से चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
मीनाक्षी नटराजन की रिट याचिका पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी द्वारा मामले की जल्द सुनवाई (अर्जेंट हियरिंग) की मौखिक अपील के बाद इसे शुक्रवार 12 जून की सूची में शामिल करने की मंजूरी दी। हालांकि सिंघवी आज गुरुवार को ही इसकी सुनवाई चाहते थे।
जो जीता वही सिकंदरः मध्य प्रदेश में राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए तीनों बीजेपी नेता- महेश केवट, तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल
कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को चुनाव आयोग जाकर मध्य प्रदेश के चुनाव अधिकारी के फैसले पर आपत्ति जताई थी। लेकिन चुनाव आयोग ने एमपी के चुनाव अधिकारी के फैसले को सही ठहाराया था। इसके बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय लिया।
सिंघवी ने मीनाक्षी नटराजन मामले में सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा
अदालत में वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने आज (11 जून) को ही इस मामले पर तुरंत सुनवाई करने का दबाव बनाया। उन्होंने दलील दी कि आज (गुरुवार) नामांकन वापस लेने का आखिरी दिन है। सिंघवी ने अदालत से अनुरोध किया कि चुनाव नतीजों की घोषणा पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश पारित किया जाए। यानी आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के समय मध्य प्रदेश के नतीजे घोषित नहीं किए गए थे। यह ठीक बिहार एसआईआर मामले जैसा हुआ। बिहार एसआईआर मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चलती रही। बिहार में चुनाव भी हो गए और नतीजे भी घोषित कर दिए गए।सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- मीनाक्षी नटराजन की याचिका कितनी विचारणीय?
जब सिंघवी ने जल्द सुनवाई की मांग की, तो जस्टिस मिश्रा ने टिप्पणी करते हुए पूछा, "यह याचिका कितनी विचारणीय है?" उन्होंने ध्यान दिलाया कि आमतौर पर चुनावी मामलों में अदालतें अंतरिम चरण (interim stage) में हस्तक्षेप नहीं करती हैं। इस पर सिंघवी ने दलील दी कि जब रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा इतनी बड़ी और स्पष्ट गलती (glaring error) की गई हो, तो अदालत हस्तक्षेप कर सकती है। दूसरी तरफ, विरोधी उम्मीदवार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दाम शेषाद्रि नायडू ने भी इस याचिका की विचारणीयता का कड़ा विरोध किया।क्यों रद्द हुआ मीनाक्षी नटराजन का नामांकन?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन आवेदन इस आधार पर खारिज कर दिया था कि उन्होंने तेलंगाना में अपने खिलाफ लंबित एक मामले की जानकारी नामांकन पत्रों में "छिपाई" थी। यह मामला दरअसल तेलंगाना की एक पूर्व कांग्रेस कार्यकर्ता ए. श्रीलता द्वारा हैदराबाद के 'IV एडिशनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट' के सामने दर्ज कराई गई एक निजी शिकायत से जुड़ा है। इस शिकायत में मीनाक्षी नटराजन को प्रतिवादी नंबर 4 बनाया गया है। शिकायतकर्ता ने मुख्य आरोपी (प्रतिवादी नंबर 1) पर छेड़छाड़ के आरोप लगाए हैं, जबकि नटराजन और अन्य वरिष्ठ पार्टी पदाधिकारियों पर बार-बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। बता दें कि मीनाक्षी नटराजन ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) की ओर से तेलंगाना कांग्रेस की प्रभारी हैं।कांग्रेस और नटराजन का पक्ष क्या है
कांग्रेस पार्टी और मीनाक्षी नटराजन के वकीलों का कहना है कि रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला पूरी तरह गलत है। उनकी मुख्य दलीलें इस प्रकार हैं:
सिर्फ प्री-कॉग्निजेंस समन मिला: नटराजन को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 के तहत केवल एक नोटिस/समन मिला है। इस धारा के तहत मजिस्ट्रेट ने उन्हें यह बताने के लिए बुलाया था कि उनके खिलाफ संज्ञान (cognizance) क्यों न लिया जाए। यानी कोर्ट ने अभी तक इस मामले पर कोई संज्ञान नहीं लिया है।
कानून क्या कहता है? जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) की धारा 33A के तहत उम्मीदवार को केवल उन्हीं आपराधिक मामलों का खुलासा करना होता है जिनमें अदालत द्वारा 'संज्ञान' (cognizance) लिया जा चुका हो और जिसमें 2 साल से अधिक की सजा का प्रावधान हो या आरोप (charges) तय हो चुके हों।
कांग्रेस का बयान: कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया (X) पर कहा कि कानून की नजर में बिना संज्ञान लिए कोई आपराधिक मामला अस्तित्व में ही नहीं आता। सिर्फ किसी के आरोप लगा देने से मामला दर्ज नहीं माना जाता। इसलिए नटराजन द्वारा किसी जानकारी को छिपाने का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि छिपाने के लिए कोई आपराधिक मामला था ही नहीं। उनके खिलाफ किसी तरह की आपराधिक शिकायत नहीं है।मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने क्या कहा
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, "हमारे CLP नेता ने हमारे सभी विधायकों के हस्ताक्षर के साथ राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है। मुद्दा यह है कि देश के सबसे ऊंचे सदन, राज्यसभा में मीनाक्षी का नॉमिनेशन एक ऐसी बात पर रद्द कर दिया गया, जिसे आम हालात में पंचायत या ज़िला स्तर पर एक छोटी-मोटी प्रक्रियात्मक कमी माना जाता। उन्होंने कहा कि समन का ज़िक्र नहीं किया गया था। हालांकि, राज्यसभा नॉमिनेशन फ़ॉर्म में समन की जानकारी देने का कोई नियम नहीं है। तो फिर इसका ज़िक्र कहाँ किया जाना था? वे इस वजह को समझा नहीं पाए हैं। आखिरकार, हमने भारत के चुनाव आयोग के सामने न्याय की अपील की। उसके बाद, हम सुप्रीम कोर्ट गए। अगर हमें इन दोनों संस्थाओं से न्याय नहीं मिलता है, तो अंतिम संवैधानिक अथॉरिटी राष्ट्रपति हैं।"