देश के सबसे प्रतिष्ठित बार संघ में से एक बॉम्बे बार एसोसिएशन ने नालसार छात्रों के ख़िलाफ़ कार्रवाई पर BCI चेयरमैन मनन मिश्रा की निंदा की है। बार की मांग के साथ ही सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा है कि नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए वह इस्तीफा दे दें।
नालसार के छात्रों का बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा पर हमला।
देश के सबसे प्रतिष्ठित वकील संगठनों में शामिल बॉम्बे बार एसोसिएशन यानी बीबीए ने नालसार यूनिवर्सिटी के छात्रों के मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानी बीसीआई के चेयरमैन मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग की है। एसोसिएशन ने कहा कि नालसार यूनिवर्सिटी के छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई गलत थी और बाद में मांगी गई माफी बहुत देर से आई तथा सिर्फ हालात संभालने की कोशिश थी।
बॉम्बे बार एसोसिएशन की इस मांग के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने भी अपनी पुरानी मांग को नये सिरे से उठाया है और इसे नैतिकता से जोड़ दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास ने भी कहा कि मनन मिश्रा को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
बॉम्बे बार एसोसिएशन ने क्या कहा?
बॉम्बे बार एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा है कि मनन मिश्रा द्वारा उठाया गया कदम एकतरफा था और इससे कानूनी पेशे की गरिमा को नुकसान पहुंचा। एसोसिएशन ने कहा कि बीसीआई द्वारा आदेश वापस लेना स्वागत योग्य है, लेकिन इससे पहले जो कार्रवाई की गई थी, वह गंभीर चिंता का विषय है।
पत्र में कहा गया, 'मनन मिश्रा द्वारा 15 अगस्त 2026 को जारी माफी स्पष्ट रूप से काफी देर से आई। यह वास्तविक पश्चाताप नहीं बल्कि केवल हालात को शांत करने का प्रयास लगती है।' एसोसिएशन ने आगे कहा, 'जब कोई व्यक्ति अपने आचरण से कानूनी पेशे की गरिमा, संवैधानिक स्वतंत्रता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को कमजोर करता है तो केवल माफी पर्याप्त नहीं होती। ऐसे में उन्हें चेयरमैन पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था।'बॉम्बे बार एसोसिएशन ने कहा कि मनन मिश्रा की माफी को सच्चा पश्चाताप नहीं माना जा सकता क्योंकि वह अब भी बीसीआई चेयरमैन के पद पर बने हुए हैं। एसोसिएशन का मानना है कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति की जवाबदेही सिर्फ माफी मांगने से पूरी नहीं होती।
सीजेपी ने भी उठाई इस्तीफे की मांग
कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बॉम्बे बार एसोसिएशन के पत्र का समर्थन करते हुए कहा कि अब मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग और तेज हो गई है। सौरव दास ने कहा, 'बीसीआई चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग हर दिन मजबूत होती जा रही है। अब देश के सबसे प्रतिष्ठित बार संगठनों में से एक बॉम्बे बार एसोसिएशन भी उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है। यह सिर्फ उनकी देर से आई माफी का मामला नहीं है, बल्कि लगातार तानाशाही आदेशों और उनके विवादित आचरण का भी सवाल है।' उन्होंने आगे कहा, 'मनन मिश्रा को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए आज ही इस्तीफा दे देना चाहिए।'क्या है पूरा विवाद?
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ हैदराबाद के कुछ छात्रों ने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया। शुरुआत में 2026 बैच के करीब 70 छात्रों ने इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखा। बाद में अन्य बैचों के कई छात्रों ने भी इस मांग का समर्थन किया।
इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कड़ा कदम उठाते हुए निर्देश जारी किया कि नालसार के 2026 बैच के किसी भी छात्र का राज्य बार काउंसिल में वकील के रूप में नामांकन अगली सूचना तक न किया जाए। इसके साथ ही विश्वविद्यालय से यह भी कहा गया कि विरोध अभियान शुरू करने और उसमें शामिल छात्रों की पहचान कर रिपोर्ट भेजी जाए।हालाँकि, इस आदेश की देशभर में आलोचना हुई। कॉकरोच जनता पार्टी ने तो मनन मिश्रा के आवास के बाहर तो प्रदर्शन की चेतावनी दे दी। भारी दबाव के बाद बीसीआई ने अपना आदेश वापस ले लिया। लेकिन मामले की जाँच जारी रखने की बात कही। इस पर भी मनन मिश्रा की आलोचना हुई। उन्हें फिर दूसरा आदेश भी वापस लेना पड़ा। बाद में तो उन्होंने माफी भी मांगी।
CJI सूर्यकांत ने भी जताई थी नाराजगी
इस पूरे विवाद के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी बीसीआई की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया को इस मामले में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है।
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने साफ़ किया था कि सुप्रीम कोर्ट छात्रों को शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से अपनी बात रखने से नहीं रोकेगा। उन्होंने बीसीआई और सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक या आपराधिक कार्रवाई न की जाए।
विरोध के बाद वापस लिया गया आदेश
बीसीआई का आदेश वापस लेने के पीछे देशभर से हुए विरोध को अहम माना जा रहा है। इस दौरान कई वरिष्ठ वकीलों, पूर्व न्यायाधीशों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज के लोगों ने कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ बताया था।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी छात्रों के समर्थन में आंदोलन की चेतावनी दी थी। इसके बाद बीसीआई ने अपना आदेश वापस ले लिया। मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी के बाद मनन मिश्रा ने कानून के छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि यदि उनके किसी बयान या पत्र से छात्रों की भावनाओं को ठेस पहुंची है तो उन्हें इसका ईमानदारी से खेद है। हालाँकि अब बॉम्बे बार एसोसिएशन का कहना है कि केवल माफी मांगना पर्याप्त नहीं है और इस पूरे घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्हें बीसीआई चेयरमैन पद छोड़ देना चाहिए।