केंद्रीय गृह मंत्रालय ने CAA के नियमों में संशोधन करते हुए अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर वाले 8 राज्यों में जिला कलेक्टरों को नागरिकता देने के अधिकार दे दिए हैं। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश के गैर-मुस्लिमों को नागरिकता मिलने में देरी के बीच यह क़दम उठाया गया है।
जम्मू कश्मीर, बंगाल, लद्दाख सहित सीमा क्षेत्र के 8 राज्यों में अब जिला कलेक्टर ही सीएए के तहत नागरिकता दे सकेंगे। इसके लिए केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी सीएए के तहत नागरिकता देने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। गृह मंत्रालय यानी MHA ने नागरिकता नियम, 2009 में संशोधन करते हुए गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जिला कलेक्टरों को सीधे नागरिकता देने का अधिकार दे दिया है।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए पात्र गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों की लंबित नागरिकता की अर्जियों का तेजी से निपटारा करना है। इन तीन देशों के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई को गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक माना गया है। इनके लिए ही सीएए में नागरिकता देने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है।
नियम क्या बदला है?
अब तक सीएए के तहत आने वाले नागरिकता आवेदनों की जांच और मंजूरी एम्पावर्ड कमेटी और जिला स्तरीय समितियों के माध्यम से होती थी। इन समितियों में जनगणना, इंटेलिजेंस ब्यूरो और डाक विभाग जैसे केंद्र सरकार के कई विभागों के अधिकारी शामिल रहते थे। 19 अगस्त को जारी अधिसूचना के अनुसार अब इन आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जिला कलेक्टर ही आवेदन प्राप्त करेंगे, उनकी जांच करेंगे और पात्र पाए जाने पर नागरिकता देने का फ़ैसला करेंगे। इस बदलाव के साथ पहले से लंबित सभी आवेदन भी संबंधित जिला कलेक्टरों को भेज दिए जाएंगे।
कहाँ लागू होगा नया नियम?
- गुजरात
- राजस्थान
- पंजाब
- पश्चिम बंगाल
- असम (जनजातीय क्षेत्रों को छोड़कर)
- त्रिपुरा (जनजातीय क्षेत्रों को छोड़कर)
- जम्मू-कश्मीर
- लद्दाख
किन लोगों को मिलेगा लाभ?
सीएए के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोग भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। ये प्रावधान नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6बी के तहत लागू होते हैं।
नए नियमों के अनुसार जिला कलेक्टर नागरिकता के आवेदन स्वीकार करेंगे, आवेदक के दस्तावेजों की जांच करेंगे, जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त जांच करा सकेंगे, आवेदक से निष्ठा की शपथ दिलवाएंगे और यह तय करेंगे कि आवेदक धारा 6बी के तहत नागरिकता पाने के योग्य है या नहीं। सभी शर्तें पूरी होने पर कलेक्टर भारतीय नागरिकता दे देंगे।
आवेदन कैसे होगा?
गृह मंत्रालय के अनुसार अब आवेदकों को अपना आवेदन ऑनलाइन संबंधित जिला कलेक्टर के पास जमा करना होगा। आवेदन मिलने के बाद इलेक्ट्रॉनिक तरीके से उसकी रसीद जारी की जाएगी।
नए नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसी आवेदक को पर्याप्त अवसर दिए जाने के बाद भी वह व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होता या निष्ठा की शपथ नहीं लेता है तो उसका आवेदन खारिज किया जा सकता है।
गृह मंत्रालय ने नागरिकता आवेदन से जुड़े कई फॉर्म और नियमों में भी संशोधन किया है। अब जिन राज्यों में यह व्यवस्था लागू होगी, वहां आवेदन सीधे संबंधित जिला कलेक्टर के पास भेजे जाएंगे। पहले इन फॉर्मों में एम्पावर्ड कमेटी का उल्लेख था, जिसे अब संशोधित किया गया है।
सरकार ने बदलाव क्यों किया?
केंद्र सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से नागरिकता आवेदन की प्रक्रिया आसान होगी और वर्षों से लंबित मामलों का जल्द निपटारा किया जा सकेगा। सरकार के अनुसार जिला स्तर पर निर्णय लेने की व्यवस्था बनने से आवेदकों को बार-बार अलग-अलग एजेंसियों के पास नहीं जाना पड़ेगा और प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज होगी।
CAA क्या है?
नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी सीएए का उद्देश्य पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए छह गैर-मुस्लिम समुदायों- हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई को भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया आसान बनाना है।
इस कानून को लेकर देशभर में लंबे समय तक राजनीतिक और कानूनी बहस होती रही है। अब केंद्र सरकार ने नागरिकता देने की प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए जिला कलेक्टरों को सीधे अधिकार सौंप दिए हैं।